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झारखंड विधानसभा : पहले चरण में चुनावी अखाड़े का महामुकाबला

  • झारखंड विधानसभा : पहले चरण में पूर्व सीएम, कैबिनेट मंत्री सहित कई हेवीवेट उम्मीदवारों के बीच महामुकाबला
  • पहले चरण में चुनावी अखाड़े का महामुकाबला
  • पूर्व सीएम सहित कई दिग्गजों की धड़कने तेज
  • 13 को जनता सुनायेगी अपना फैसला
Ranchi :   झारखंड विधानसभा चुनाव के पहले चरण में महामुकाबला के लिए पॉलिटिकल प्लेयर तैयार हैं. 43 विधानसभा सीटों के लिए होने वाले इस महामुकाबले में नेक टू नेक फाइट होने की संभावना जतायी जा रही है. इस अखाड़े में पूर्व सीएम से लेकर कैबिनेट मंत्री सहित कई हेवीवेट उम्मीदवार हैं. इसको लेकर राजनीति गलियारों में हार-जीत का ताना बाना भी बुना रहा है. अधिकांश सीटों पर इंडिया गठबंधन और एनडीए के बीच सीधी टक्कर है. वहीं कई सीटों पर त्रिकोणीय संघर्ष के भी आसार बन रहे हैं. कई मायने में यह महामुकाबला दिलचस्प होने वाला है. बहरहाल इन 43 सीटों पर 13 नवंबर को जनता अपना फैसला सुनायेगी.

जानिये कहां किसके बीच है टक्कर ...

मिथिलेश ठाकुर को भाजपा से मिलेगी कड़ी चुनौती

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alt="" width="600" height="400" /> गढ़वा सीट से कैबिनेट मंत्री मिथिलेश ठाकुर को भाजपा से कड़ी चुनौती मिलेगी. इस बार फिर से उनके सामने बीजेपी के सत्येंद्र नाथ तिवारी हैं. 2019 में मिथिलेश ठाकुर ने सत्येंद्रनाथ तिवारी को पटखनी दी थी. वहीं सत्येंद्रनाथ तिवारी 2009 और 2014 में इस सीट से जीत हासिल कर चुके हैं.

कभी झामुमो कैडर में रहे बाबूलाल के सामने होंगे मंत्री रामदास

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alt="" width="600" height="400" /> घाटशिला सीट पर समीकरण बदल गया है. कभी झामुमो के कैडर में रहे बाबूलाल सोरेन भाजपा से अपनी किस्मत आजमा रहे हैं. बाबूलाल पूर्व सीएम चंपाई सोरेन के पुत्र है. इस सीट पर मंत्री रामदास सोरेन और बाबूलाल सोरेन के बीच टफ फाइट होने की संभावना जतायी जा रही है. 2014 में यह सीट भाजपा के खाते में आयी थी. लक्ष्मण टुडू ने रामदास सोरेन को हराया था. फिर 2019 में रामदास सोरेन ने जीत हासिल की थी.

लातेहार में दो दिग्गजों के बीच कांटे की टक्कर

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alt="" width="600" height="400" /> लातेहार सीट से कैबिनेट मंत्री बैद्यनाथ राम अपनी किस्मत आजमा रहे हैं. एक बार फिर उनका सामना भाजपा के प्रकाश राम से है. इस सीट पर हमेशा उथल-पुथल होता रहा है. 2005 में प्रकाश राम राजद के टिकट पर चुनाव जीते थे. वहीं 2014 में उन्होंने जेवीएम के टिकट पर चुनाव लड़ा था और जीते भी हासिल की थी. लेकिन 2019 में वैद्यनाथ राम ने प्रकाश राम को पटखनी दी थी. इस बार फिर दोनों आमने-सामने हैं.

मंत्री रामेश्वर उरांव की प्रतिष्ठा दांव पर

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alt="" width="600" height="400" /> लोहरदगा सीट पर विधायक सह मंत्री रामेश्वर उरांव की प्रतिष्ठा दांव पर लगी है. उनका मुकाबला आजसू की नीरू शांति भगत से है. 2009 और 2014 में आजसू के कमल किशोर भगत ने यहां से जीत दर्ज की थी. जबकि 2005 में कांग्रेस के सुखदेव भगत यहां के विधायक थे.

सरयू और बन्ना में होगा महामुकाबला

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  जमशेदपुर पश्चिमी सीट पर सभी की नजरें टिकी रहेंगी. इस सीट पर महामुकाबला होगा. कैबिनेट मंत्री बन्ना गुप्ता और सरयू राय  आमने-सामने हैं. इस बार सरयू राय जदयू के टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं. 2005 और 2009 में सरयू राय बन्ना को पटखनी दे चुके हैं. इस बार दोनों के बीच महामुकाबला होने की संभावना है.

28 साल से बीजेपी के खाते में रही है रांची सीट

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alt="" width="600" height="400" /> इस बार रांची सीट काफी हॉट मानी जा रही है. इस सीट में मुकाबला दिलचस्प होने की संभावना है. यह सीट 28 साल से भाजपा के खाते में रही है. इस बार भी झामुमो ने महुआ मांझी और भाजपा ने सीपी सिंह को चुनावी अखाड़े में उतारा है. पिछली बार बहुत कम मार्जिन 5904 वोट से सीपी सिंह ने जीत हासिल की थी. इस बार कड़ी टक्कर की संभावना जताई जा रही है.

हटिया में बन रहा त्रिकोणीय संघर्ष का आसार

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alt="" width="600" height="400" /> हटिया में त्रिकोणीय संघर्ष के आसार बन रहे हैं. निर्दलीय उम्मीदवार भरत काशी की भी इस क्षेत्र में अच्छी पकड़ है. इस सीट से बीजेपी ने एक बार फिर से नवीन जायसवाल पर दांव खेला है. वहीं कांग्रेस ने अजयनाथ शाहदेव पर दांव लगाया है. बहरहाल दोनों के बीच टफ फाइट होने की संभावना है.

कांके में कांटे की टक्कर की संभावना

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alt="" width="272" height="181" /> https://lagatar.in/wp-content/uploads/2024/11/Untitled-30-272x181.jpg"

alt="" width="272" height="181" /> कांके सीट में भी कांटे की टक्कर की संभावना जताई जा रही है. इस सीट से भाजपा से एक फिर पूर्व विधायक जीतू चरण राम पर भरोसा जताया है. जीतू चरण इस सीट से 2014 में जीत हासिल की थी. वहीं कांग्रेस ने इस बार फिर से सुरेश बैठा पर भरोसा जताया है.

दिलचस्प होगा तमाड़ का रण

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alt="" width="600" height="400" /> इस बार तमाड़ का चुनावी रण भी दिलचस्प होगा. यहां पर एनडीए की ओर से जदयू के गोपाल कृष्ण पातर उर्फ राजा पीटर का सीधा मुकाबला झामुमो के विकास मुंडा से है. राजा पीटर पहली बार झामुमो सुप्रीमो शिबू सोरेन को हराकर चर्चा में आये थे.

राज्यगठन के बाद से खूंटी में खिलता रहा है कमल

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alt="" width="272" height="181" /> https://lagatar.in/wp-content/uploads/2024/11/Untitled-21-6-272x181.jpg"

alt="" width="272" height="181" /> राज्यगठन के बाद से ही खूंटी में कमल खिलता रहा है. यहां से नीलकंठ सिंह मुंडा लगातार जीतते रहे हैं. इस बार फिर नीलकंठ सिंह मुंडा को भाजपा ने उतारा है. इस सीट पर नीलकंठ सिंह मुंडा का मुकाबला झामुमो के राम सूर्य मुंडा से है.

भानू और अनंत के बीच नेक टू नेक फाइट

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alt="" width="600" height="400" /> भवनाथपुर सीट में भाजपा के भानू प्रताप और झामुमो के अनंत प्रताप देव के बीच टफ फाइट की संभावना है। अनंत प्रताप देव 2009 में कांग्रेस के टिकट पर चुनाव जीत चुके हैं। इस बार दोनों के बीच नेक टू नेक फाइट की संभावना जताई जा रही है।

डाल्टनगंज में त्रिकोणीय मुकाबला

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alt="" width="600" height="400" /> डाल्टनगंज सीट में त्रिकोणीय मुकाबले के आसार हैं. इस सीट से कांग्रेस ने केएन त्रिपाठी को और भाजपा ने फिर एक बार आलोक चौरसिया पर भरोसा जताया है. लेकिन इस सीट में पूर्व स्पीकर इंदर सिंह नामधारी के पुत्र दिलीप सिंह के चुनावी मैदान में आने से मुकाबला और दिलचस्प हो गया है.

पांकी में भी त्रिकोणीय संघर्ष

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alt="" width="600" height="400" /> पांकी सीट भी त्रिकोणीय संघर्ष में फंसती नजर आ रही है. पूर्व विधायक विदेश सिंह के बेटे देवेंद्र सिंह उर्फ बिट्टू सिंह निर्दलीय मैदान में हैं. भाजपा के कब्जे वाली सीट पर कांग्रेस प्रत्याशी के लिए भी मुश्किल खड़ी कर रहे हैं. भाजपा ने विधायक कुशवाहा शशिभूषण मेहता और कांग्रेस ने पूर्व मंत्री मधु सिंह के पुत्र लाल सूरज को प्रत्याशी बनाया है. मेहता पहली बार यह सीट 2019 में जीते थे. बिट्टू सिंह यहां से उप चुनाव जीतकर 2016 में विधायक बने थे.

हुसैनाबाद में दिलचस्प मुकाबला

इस सीट से भाजपा ने वर्तमान विधायक कमलेश सिंह को अपने पाले में कर लिया है. वहीं, राजद के प्रदेश अध्यक्ष संजय सिंह यादव व बसपा के पूर्व विधायक कुशवाहा शिवपूजन मेहता इनकी राह में रोड़ा अटकाने में लगे हैं. यादव यहां से 2000 और 2009 में विधायक रह चुके हैं. वहीं कमलेश सिंह को 2005 और 2019 में इस सीट का नेतृत्व करने का अनुभव है. इस सीट पर भाजपा के बागी विनोद सिंह निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में मैदान में हैं.

हॉट सीट है सरायकेला

इस बार सरायकेला को हॉट सीट माना जाना है। इस सीट से पूर्व सीएम चंपाई सोरेन जीतते रहे हैं। लेकिन इस बार चंपाई सोरेन भाजपा के उम्मीदवार है।. भाजपा से टिकट नहीं मिलने के कारण गणेश महली झामुमो में शामिल हो गये. दोनों दलों को अपने ही दल से नाराज कार्यकर्ताओं का सामना करना पड़ रहा है.

बिशुनपुर में झामुमो का सीट बचाने पर जोर

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alt="" width="600" height="400" /> बिशुनपुर में झामुमो का सीट बचाने पर जोर है. पिछले तीन चुनावों में झामुमो के चमरा लिंडा ने जीत की हैट्रिक लगायी है. लिंडा इस बार भाजपा के समीर उरांव चुनौती दे रहे हैं. खोई सत्ता पाने के लिए भाजपा के लोग जोर लगाये हुए हैं. झामुमो के बागी जगन्नाथ उरांव निर्दलीय मैदान में हैं. इस कारण मुकाबला दिलचस्प हो गया है.

अरूण उरांव की प्रतिष्ठा दांव पर

राज्य गठन के बाद से हुए चुनावों में सिसई की जनता ने हर बार विधायक बदला है. इस बार भी यहां एनडीए व इंडिया गठबंधन आमने-सामने है. चुनावी दंगल में निवर्तमान विधायक जिग्गा सुसारन होराे को भाजपा के अरुण उरांव चुनौती दे रहे हैं. पिछले चार चुनावों में दो बार भाजपा और एक-एक बार कांग्रेस व झामुमो के टिकट पर विधायक चुने गये हैं.

 चतरा सीट पर बिहार के दोनों दल हैं आमने-सामने

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alt="" width="272" height="181" />https://lagatar.in/wp-content/uploads/2024/11/Untitled-27-1-272x181.jpg"

alt="" width="272" height="181" /> इस बार चतरा सीट पर बिहार के दो राजनीतिक दलों के उम्मीदवार आमने-सामने हैं. इस साल एनडीए गठबंधन के तहत इस सीट से लोजपा चुनाव लड़ रही है. वहीं, इंडिया गठबंधन से राजद को सीट मिली है. राजद ने मंत्री सत्यानंद भोक्ता की बहू रश्मि प्रकाश को टिकट दिया है. वहीं, लोजपा (आर) से जनार्दन पासवान चुनाव लड़ रहे हैं. ऐसे में दोनों प्रत्याशियों के बीच कड़ा मुकाबला होने की संभावना है

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