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झारखंड विस चुनाव :  मईंया सम्मान योजना बनाम गोगो दीदी योजना हो सकती है डिसाइडिंग फैक्टर

बंटेंगे तो कटेंगे.... बनाम जोड़ते हैं जोड़ते रहेंगे... फैक्टर पर भी टिकी रहेंगी नजरें  Ranchi :  झारखंड विधानसभा चुनाव में सत्ता की चाबी किसके हाथ लगेगी, इसे लेकर कयासों का दौर जारी है. पहले चरण की 43 सीटों पर जनता ने अपना फैसला सुना दिया है. दूसरे चरण की 38 सीटों पर 20 नवंबर को जनता अपना फैसला सुनायेगी.  राजनीतिक गलियारों में इस बात की चर्चा है कि झामुमो की मईंया सम्मान योजना बनाम भाजपा की गोगो दीदी योजना पहला डिसाइडिंग फैक्टर हो सकता है. इन योजनाओं के जरिए इंडी गठबंधन और एनडीए ने आधी आबादी को साधने की भरपूर कोशिश की है.

मईंया सम्मान योजना के तहत 53 लाख महिलाओं को 1000 रुपए प्रतिमाह

फिलहाल मईंया सम्मान योजना के तहत 53 लाख महिलाओं को 1000 रुपए प्रतिमाह दिये जा रहे हैं. दिसंबर से इस योजना के तहत प्रतिमाह 2500 रुपए देने की घोषणा की गयी है. वहीं भाजपा ने इसके काउंटर में गोगो दीदी योजना का ऐलान किय़ा है. इसके तहत भाजपा ने दावा किया है कि हर महिला को हर महीने 2100 रुपए दिये जायेंगे.

 महिला वोटरों की संख्या में 33.37 फीसदी का इजाफा

झारखंड में पिछले बार की तुलना में महिला वोटरों की संख्या में 33.37 फीसदी का ईजाफा हुआ है. राज्य में महिला वोटरों की संख्या एक करोड़ 29 लाख 20 हजार 548 है. इस हिसाब से आधी आबादी इस चुनाव में डिसाइडिंग फैक्टर के रूप में सामने आयेगी.

 बंटेंगे तो कटेंगे और जोड़ते हैं जोड़ते रहेंगे... फैक्टर  

विधानसभा चुनाव में एनडीए और इंडी गठबंधन के स्लोगन भी अहम भूमिका में है. घुसपैठ को लेकर एनडीए ने स्लोगन दिया है कि बंटेंगे तो कटेंगे, एक रहेंगे तो सेफ रहेंगे... इसके काउंटर में इंडी गठबंधन ने जोड़ते हैं और जोड़ते रहेंगे... का नारा दिया है. एनडीए घुसपैठ को लेकर लगातार हमलावर रही है. पीएम सहित बीजेपी के टॉप लीडरों ने घुसपैठ को लेकर इंडी गठबंधन को घेरने में कोई कसर नहीं छोड़ी. वहीं इंडी गठबंधन ने भी जोड़ते हैं जोड़ते रहेंगे... के स्लोगन के साथ काउंटर अटैक किया है. खुद सीएम हेमंत सोरेन ने कहा है कि केंद्र की योजनाएं समाज को जाति-धर्म के आधार पर विभाजित करती है. हम जोड़ते हैं और जोड़ते रहेंगे.

संथाल में बटेंगे तो कटेंगे के जरिए बीजेपी कर रही सेंधमारी

संथाल में बीजेपी ने घुसपैठ को अहम मुद्दा मानकर इंडी गठबंधन को घेरने की पूरी कोशिश की है. इस क्षेत्र में एनडीए और इंडी गठबंधन के बीच जोरदार आजमाइश होगी. संताल परगना जेएमएम का गढ़ माना जाता रहा है. शिबू सोरेन, हेमंत सोरेन और बसंत सोरेन संताल परगना से ही चुनाव लड़ते रहे हैं. इस बार भी हेमंत सोरेन बरहेट से चुनाव लड़ रहे हैं. उनके भाई बसंत सोरेन दुमका से जेएमएम के प्रत्याशी हैं. हेमंत के ही परिवार से उनकी भाभी जामा से जेएमएम के टिकट पर चुनाव लड़ती रही हैं, जो इस बार जामताड़ा से भाजपा की प्रत्याशी बन गयी हैं. आदिवासी बहुल इस इलाके में जेएमएम की पहचान शिबू सोरेन के कारण रही है.

पिछले चुनाव में संथाल की 13 सीटें इंडी गठबंधन के खाते में आयी थी

संथाल परगना क्षेत्र में 2019 के विधानसभा चुनाव में झामुमो ने 9 सीटें जीती थीं, इसके साथ इनकी सहयोगी पार्टी कांग्रेस ने भी यहां चार सीटें जीती थी. यानी 18 में से 13 सीटें झामुमो और उसकी सहयोगी पार्टी के पास थी. इस जीत के साथ ही झामुमो झारखंड में अपनी सरकार बनाने में कामयाब रहा था. 2019 के चुनाव में बीजेपी संथाल में सिर्फ 4 सीटें ही जीत पायी थी. बीजेपी का मानना है कि अगर झारखंड की सत्ता में आना है तो संथाल में झामुमो के गढ़ तो तोड़ना होगा.

संथाल की 18 विधानसभा सीटों पर बीजेपी की नजर

संथाल की 18 विधानसभा सीटों पर बीजेपी की पैनी नजर है. यही वजह है कि यहां बीजेपी के लगभग सभी बड़े नेताओं ने सभा की और डेमोग्राफिक चेंज के मुद्दे को उठाया गया. पीएम मोदी तक ने ये बयान दिया कि झारखंड में घुसपैठिए आकर यहां की बेटियों को फुसलाकर शादी कर रहे हैं और उनकी जमीन पर कब्जा कर रहे हैं. उन्होंने इसके लिए लोगों से सावधान रहने की भी अपील की.

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