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Social Media से : झारखंड भाजपा के पदधारी- संयोग या प्रयोग?

इसे महज संयोग कहिएगा या झारखंड भाजपा का एक बड़ा प्रयोग कहिएगा कि वर्तमान में जितने भी नोटिफाइड पदाधिकारी है, जो कि 24 है और अध्यक्ष मिला के 25 है, जो हाल में ही 28 मार्च 2026 को जारी किया गया है.
 

Avinash Mishra

 

इसे महज संयोग कहिएगा या झारखंड भाजपा का एक बड़ा प्रयोग कहिएगा कि वर्तमान में जितने भी नोटिफाइड पदाधिकारी है, जो कि 24 है और अध्यक्ष मिला के 25 है, जो हाल में ही 28 मार्च 2026 को जारी किया गया है. 

 

तो इन 25 (अध्यक्ष जी को मिला के) में से 10 ऐसे पदाधिकारी हैं, जिन्होंने जनता के समक्ष जीवन में कभी न कभी चुनाव लड़ा है (लोकसभा या फिर विधानसभा क्योंकि राज्यसभा में जनता तो नहीं चुनती है) और सबसे बड़ी बात कि सभी पदाधिकारी जो चुनाव लड़े हैं. अंतिम बार जब लोकसभा-विधानसभा लड़े थे तो हार का ही सामना करना पड़ा था.

 

सबसे पहले अध्यक्ष आदित्य साहू जी 2009 में चुनाव लड़े थे, सिल्ली से भाजपा के टिकट पर उन्हें हार का सामना करना पड़ा था. 2480 वोट मिले थे, लेकिन तब की परिस्थिति देखिए और आज की आज आदित्य साहू जी राज्यसभा सांसद है. प्रदेश के अध्यक्ष भी.

 

विडंबना देखिए तीनों महामंत्री गणेश मिश्र जी, अमर बाउरी जी और मनोज सिंह जी तीनों के तीनों अपने अंतिम चुनाव हारे हुए हैं, इसमें से सबसे बड़ी बात ये रही कि गणेश मिश्र और मनोज सिंह मोदी लहर में 2014 में चुनाव हार गए.  गणेश मिश्र जी जहां लगभग 1000 वोट से चुनाव हारे थे. वहीं मनोज सिंह जी लगभग 17 हजार वोटों से चुनाव हारे थे और तीसरे नंबर पर रहे थे. 

 

अमर बाउरी जो कि 2024 के चुनाव से पूर्व नेता प्रतिपक्ष थे, वो 2024 के चुनाव में बुरी तरह हारते हुए तीसरे नंबर पर रहे. लगभग 33700 वोटों से हारे, मतलब तीन में से दो महामंत्री ऐसे हैं, जो अपने-अपने अंतिम लड़े, चुनाव में तीसरे स्थान पर रहे हैं. 

 

अब आइए उपाध्यक्ष की लिस्ट में, तो देखेंगे कि नीलकंठ सिंह मुंडा, आभा महतो, भानु प्रताप शाही, सुनील सोरेन और गीता कोड़ा. ये सभी अपना-अपना अंतिम लड़ा हुआ चुनाव हार चुके हैं. वहीं प्रदेश मंत्री में सरोज सिंह भी अपना अंतिम लड़ा हुआ चुनाव हारे हुए हैं. उन्होंने 2019 में झारखंड विकास मोर्चा के टिकट से चुनाव लड़ा था और लगभग 1500 वोट लाए थे और पांचवे स्थान पर थे.

 

हां, देखा जाए तो अध्यक्ष आदित्य साहु और उपाध्यक्ष में प्रदीप कुमार वर्मा ही ऐसे पदाधिकारी है, जो वर्तमान में राज्यसभा सांसद हैं और इस लिस्ट को हारे हुए चुनाव पदाधिकारियों के लिस्ट में थोड़ा चांद लगा रहे हैं. 

 

तो इसे क्या बोलिएगा की पार्टी ने प्रयोग किया है या फिर ये महज एक संयोग है. जहां पर 25 में से 10 पदाधिकारी ऐसे हैं, जो चुनाव लड़े हैं और अपने अंतिम चुनाव में हारे हुए हैं.

 

डिस्क्लेमर :  ये लेखक के निजी विचार हैं...

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