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बंधु के आने से दक्षिण छोटानागपुर में कांग्रेस हुई मजबूत
alt="" width="600" height="400" /> दूसरे दल से आकर कांग्रेस में मजबूत स्थिति पाने वाले नेताओं में सबसे पहला नाम बंधु तिर्की का आता है. फरवरी 2020 में कांग्रेस में शामिल हुए बंधु महज 18 माह बाद ही कार्यकारी अध्यक्ष बने. फिर उन्हें आदिवासी बहुल खूंटी संसदीय सीट का प्रभारी बनाया गया. झारखंड में भारत जोड़ो यात्रा की शुरूआत उन्हीं के प्रभार वाले जिला खूंटी से की गयी. राहुल गांधी के साथ भारत जोड़ो यात्रा में वैसे तो प्रदीप बलमुचू, कालीचरण मुंडा जैसे आदिवासी नेता भी शामिल हुए, लेकिन बंधु तिर्की का शामिल होना काफी असरदार रहा. खुद के साथ बंधु ने महात्मा गांधी के अनुयायी कहने वाले 40 टाना भगतों को भी यात्रा में शामिल करवाया. खुद प्रभारी अविनाश पांडेय ने बंधु तिर्की की इस पहल की सराहना की. इनके शामिल होने से मांडर विधानसभा पहली बार कांग्रेस के हिस्से में आया. दक्षिण छोटानागपुर में भी संगठन मजबूत हुई है.
कोड़ा दंपत्तियों के आने से कोल्हान में कांग्रेस मजबूत
alt="" width="600" height="400" /> इस कड़ी में पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा और गीता कोड़ा का नाम भी शामिल है. कांग्रेस पार्टी हो जनजाति बहुल कोल्हान प्रमंडल में सबसे ज्यादा कमजोर थी. कोल्हान विशेषकर चाईबासा में दोनों नेताओं की पकड़ काफी मजबूत है. साफ है कांग्रेस यहां मजबूत हुई है. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के चाईबासा दौरे को लेकर एक आकलन भी लगाया जा रहा है कि भाजपा की सीधी नजर कोड़ा दंपतियों पर है.
अजय कुमार आज उत्तर-पूर्व के तीन राज्यों के प्रभारी हैं
alt="" width="600" height="400" /> कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष डॉ अजय कुमार भी दूसरे दल से आए थे. पार्टी नेताओं से लड़ाई के बाद कांग्रेस छोड़ी, लेकिन फिर से वे शामिल हो गए. आज वे उत्तर-पूर्व भारत के तीन राज्यों नागालैंड, त्रिपुरा और सिक्किम के प्रभारी हैं. जमशेदपुर संसदीय सीट पर भी इनकी गतिविधि लगातार रहती है. झारखंड में संगठन की मजबूती में इन्होंने कोई कसर नहीं छोड़ी. कोलेबिरा विधानसभा सीट पर कांग्रेस को जीत उन्हीं के प्रदेश अध्यक्ष रहते मिली. डॉ अजय कुमार ने त्रिपुरा विधानसभा को लेकर प्रदेश के दो नेताओं अनूप केसरी और रोशन बरवा को अहम जिम्मेवारी दी है.
खुद को सच्चे कांग्रेसी बताने वाले नेताओं ने भी कमजोर किया संगठन को.
alt="" width="600" height="400" /> - झारखंड कांग्रेस में ऐसे नेता भी हैं, जो खुद को तो कांग्रेस का सच्चा सैनिक बताते हैं. लेकिन पार्टी छवि खराब करने में भी वे पीछे नहीं रहे. कोलकाता कैश कांड तो सबसे ज्यादा चर्चा में आता है. कांड में कांग्रेस के तीन विधायक डॉ इरफान अंसारी, राजेश कच्छप और नमन विक्सल कोंगाड़ी प्रमुख आरोपी हैं. कांग्रेस विधायक कुमार जयमंगल (अनूप सिंह) का आरोप था कि झारखंड में हेमंत सोरेन के नेतृत्व में चल रही कांग्रेस-झामुमो-राजद महागठबंधन की सरकार गिराने के लिए हर विधायकों को 10-10 करोड़ रुपये का ऑफर दिया गया था.
alt="" width="600" height="400" /> - दो पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सुखदेव भगत और प्रदीप बलमुचू ने पार्टी की छवि को खराब किया था. विधानसभा चुनाव के पहले दोनों नेता भाजपा में चले गए. हालांकि अब वे दोबारा कांग्रेस में शामिल हो गए हैं.
alt="" width="600" height="400" /> - कांग्रेस के तीन प्रवक्ता रहे (अभी प्रदेश कमिटी में शामिल हैं) आलोक दूबे, लाल किशोऱ नाथ शाहदेव और राजेश गुप्ता छोटू भी लगातार प्रदेश नेतृत्व के खिलाफ बयानबाजी कर रहे हैं. कांग्रेस अनुशासन समिति ने इन तीनों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए इन्हें छह साल के लिए पार्टी से निष्कासित करने की अनुशंसा की है. इसे भी पढ़ें - दो">https://lagatar.in/lawyers-across-the-state-will-stay-away-from-judicial-work-for-two-more-days-action-will-be-taken-against-those-who-disobey-the-instructions/">दो
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