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झारखंड DGP अनुराग गुप्ता ने कानून व्यवस्था को लेकर नौ महत्वपूर्ण बिंदुओं पर की समीक्षा, ये थे मुख्य मामले

Saurav Singh Ranchi: डीजीपी अनुराग गुप्ता ने रांची समेत राज्यभर में कानून व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए आज समीक्षा बैठक की. इस दौरान अपराध, नक्सल, वाहनों में आगजनी समेत दस महत्वपूर्ण बिंदुओं पर समीक्षा की. इस बैठक में जिले के एसपी, रेंज के डीआईजी और जोनल आईजी शामिल हुए. समीक्षा बैठक के दौरान डीजीपी में अधिकारियों को कई दिशा निर्देश भी दिए. इसे भी पढ़ें -अजमेर">https://lagatar.in/ajmer-1992-case-life-imprisonment-to-six-for-sexual-exploitation-of-more-than-100-girls/">अजमेर

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इन दस महत्वपूर्ण बिंदुओं पर डीजीपी ने की समीक्षा

-एक जनवरी 2024 से अब तक राज्य के विभिन्न जिलों में रंगदारी लेवी वसूलने के उदेश्य से अपराधियों और उग्रवादियों द्वारा कितने संपत्ति का नुकसान किया गया.जिस जिले में इस तरह की घटनाएं हुई हैं, इसे लेकर डीजीपी ने जिले के एसपी ने जानना चाहा क्या घटना के पूर्व किसी प्रकार के लेवी वसूली की मांग फोन या अन्य माध्यम से हुई थी. इस तरह के दर्ज कांड में कितने व्यक्तियों को गिरफ्तार किया गया है. दर्ज कांड में कितने व्यक्तियों पर आरोप पत्र समर्पित किया गया है. कितने व्यक्ति इसमें फरार हैं और क्या फरारियों के विरूद्ध वारंट और कुर्की जब्ती की कार्रवाई हुई है अथवा नहीं. -डीजीपी ने राज्य के कुख्यात नक्सलियों और अपराधकर्मियों पर रिवॉर्ड की घोषणा करने की समीक्षा की. इस दौरान उन्होंने जिले के एसपी से पूछा कुख्यात नक्सलियों पर रिवॉर्ड घोषित करने का प्रस्ताव भेजा गया है या नहीं. -जिला के सभी पुलिसकर्मियों के द्वारा वर्दी के साथ नेम प्लेट को पहनने को लेकर भी डीजीपी ने समीक्षा की. इस डीजीपी ने कहा कि सभी एसपी सुनिश्चित करेंगे कि जिले में तैनात सभी पुलिसकर्मी निश्चित रूप से वर्दी में नेम प्लेट पहनेंगे. सभी थाना प्रभारी, एसपी के कार्यालय में प्रतिनियुक्त सभी जवान,मुंशी, टाइपिस्ट, नियमित रूप से वर्दी के साथ नेम प्लेट पहनेंगे. आदेश उन क्षेत्रों में लागू नहीं होंगी, जहां पर घनघोर नक्सल समस्या है. -डीजीपी ने कहा, महिला थानों की समीक्षा मेरे स्तर से की जाएगी. जिनमें महिला थाना में महिला थाना प्रभारी प्रतिनियुक्त, महिला थाना को चलाने के लिए पर्याप्त स्थान उपलब्ध है या नहीं, यदि नहीं तो क्या कोई वैकल्पिक व्यवस्था की जा सकती है. महिला थाना के लिए हाजत की आवश्यकता नहीं है. महिला थाना के लिए एक ऐसा स्थान उपलब्ध हो, जहां पर अपराध की पीड़ित महिलाएं अपनी शिकायत आसानी से दर्ज करा सकें. महिला थाना में नियमित रूप से महिला अपराध से संबंधित प्राथमिकी दर्ज हो रही या नहीं इन बिंदुओं पर डीजीपी ने समीक्षा की. -डीजीपी ने एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग थाना की समीक्षा की. इस दौरान जानना चाहा कि थाना कारगर रूप से कार्य कर रहा या नहीं. थाना में नियमित रूप से प्राथमिकी दर्ज हो रहे या नहीं. -डीजीपी ने साइबर थाना को लेके समीक्षा की. इस दौरान उन्होंने जिले के एसपी से जानना चाहा कि जिला में साइबर थाना कारगर रूप से कार्य कर रहा या नहीं. डायल 1930 के उपयोग की जानकारी साइबर थाना के अधिकारियों को है या नहीं. -डीजीपी ने झारखंड ऑन लाइन प्राथमिकी की समीक्षा की. उन्होंने इसे लेकर पूछा कि ऑनलाइन दर्ज प्राथमिकी पर कार्रवाई संबंधित थाना द्वारा नियमित रूप से की जा रही है या नहीं. थानेदार द्वारा इन दिनों में प्राप्त उक्त ऑनलाइन शिकायत पर बीएनएसएस के प्रावधान के अनुरूप कार्रवाई की जा रही है या नहीं. -डीजीपी ने डायल 112 की भी समीक्षा की. इस दौरान उन्होंने जानना चाहा कि 112 में प्रतिदिन कितने शिकायत दर्ज होते है. रिपोर्ट की समीक्षा किसी अधिकारी के द्वारा की जाती है या नहीं. डायल 112 पर आ रही शिकायतों को नियमित रूप से संबंधित पुलिस अधिकारियों तक भेजा जा रहा है या नहीं. -रांची, धनबाद , बोकारो, जमशेदपुर, देवघर और पलामू जिले में ट्रैफिक की व्यवस्था को लेकर डीजीपी ने समीक्षा की. इस दौरान उन्होंने जिले के एसपी से शहर में ट्रैफिक लाइट है या नहीं, इसके बारे में जानकारी ली, साथ ही ट्रैफिक लाइटें नियमित रूप से कार्य कर रहे हैं, ट्रैफिक में पर्याप्त बल की प्रतिनियुक्ति, ट्रैफिक के कर्मियों को पुलिस की ट्रेनिंग, ट्रैफिक के कर्मियों को चालान काटने की शक्ति उपलब्ध है, चालान वसूली किस रूप से की जा रही है, समेत कई अन्य बिंदुओं पर समीक्षा की. इसे भी पढ़ें -लालटेन">https://lagatar.in/tejashwi-panicked-due-to-fear-of-oil-spilling/">लालटेन

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