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झारखंड सरकार बच्चों के कुपोषण के खिलाफ चलायेगी 1 हजार दिन का सघन अभियान

Ranchi : झारखंड में बच्चों का कुपोषण समाप्त करने के लिए महिला, बाल कल्याण विकास विभाग 1 हजार दिनों का सघन महाअभियान चलायेगा. क्योंकि झारखंड में अभी भी कुपोषण की दर 42.3 प्रतिशत बनी हुई है. यह झारखंड के लिए अच्छी स्थिति नहीं कही जा सकती . यह बिहार और मध्य प्रदेश के बाद सबसे अधिक कुपोषित की श्रेणी में आता है. इसका मतलब साफ है कि अगर हमारे बच्चे इतने प्रतिशत कुपोषित हैं तो यह हमारे नौनिहालों के लिए चिंता का विषय है. इसके लिए विभाग ने राज्य कुपोषण के विरुद्ध सशक्त कार्यक्रम क्रियान्वयन के लिए पोषण मिशन की स्थापना की है. सरकार ने तय किया है कि राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर जो भी लेटेस्ट प्रैक्टिस एवं स्ट्रेटजी सफल रही है, उसे झारखंड में लागू किया जायेगा. राज्य में कुपोषण के उन्मूलन और किशोरियों एवं महिलाओं में व्याप्त रक्त की कमी दूर करने सहित अन्य योजनाएं लागू की जायेंगी.

झारखंड में अभिशाप है बाल विवाह, यह कुपोषण का बड़ा कारण है

झारखंड में बाल विवाह अभी भी अभिशाप बना हुआ है. यह बच्चों के कुपोषण का बड़ा कारण है. आंकड़े बताते हैं कि झारखंड में 37.9 प्रतिशत ऐसी महिलाएं है जिनका विवाह 18 साल की उम्र के पहले ही हो जा रहा है. बाल विवाह के मामले में झारखंड अब देश में तीसरे पर स्थान पर है. यह बच्चों के कुपोषण का बड़ा कारण बताया जा रहा है. क्योंकि कम उम्र में विवाहित महिलाओं के बच्चे कुपोषित पैदा होते हैं.

पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चों का वजन सामान्य से कम

झारखंड में कुपोषण का सबसे बड़ा दुष्प्रभाव यह है कि हमारे 47.8 प्रतिशत बच्चे ऐसे हैं जिनका 5 साल से कम उम्र में वजन सामान्य से कम है. इतना ही नहीं झारखंड में 35.3 प्रतिशत बच्चे ऐसे है जिनका वजन उनकी लंबाई की तुलना में कम है. कुपोषण की वजह से बच्चे बौनापन के शिकार हो रहे हैं. -राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण के अनुसार झारखंड में कुपोषण की दर वर्तमान में यह दर 42.3 प्रतिशत है.90 प्रतिशत बच्चों को सही से पोषण नहीं मिल पाता है. यानि की हर 10 बच्चे में 9 बच्चे को कुपोषण के शिकार हैं. झारखंड कुपोषण के मामले में शीर्ष पांच राज्य में शामिल है. [wpse_comments_template]

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