- -ऊर्जा विभाग इस साल कंसल्टेंट का चयन करेगा, तैयार करेगा डीपीआर
- क्षमता बढ़़ाने को लेकर रोड मैप होगा तैयार
2018 में बिहार सरकार ने सौंप दिया था
परिसंपत्ति बंटवारे के तहत बिहार सरकार ने 2017 में आठ हाईडल पावर प्रोजेक्ट को झारखंड को सौंपने का निर्णय लिया था. बिहार स्टेट हाइड्रो इलेक्ट्रिक पावर कॉरपोरेशन ने इसे आधिकारिक रूप से 31 जनवरी 2018 को झारखंड के ऊर्जा विभाग को सौंप दिया था.ये हाईडल परियोजनाएं सौंपी गयी थी
सरायकेला जिला के चांडिल, बोकारो के तेनुघाट, पलामू का उत्तर कोयल, गुमला का जालिम घाट, लोहरदगा का नंदीघाघ, गुमला का संदनीघाट और गुमला की नेतरहाट हाईडल परियोजना.सभी परियोजनाएं निर्माणाधीन हैं
झारखंड के भौगोलिक क्षेत्र में अविभाजित बिहार के समय ये सभी आठ हाईडल परियोजनाएं शुरू की गयी थीं. बिहार सरकार इन पर करीब 235 करोड़ रुपये खर्च चुकी थी. मगर इससे बिजली उत्पादन शुरू नहीं हो सका. अब झारखंड सरकार इनका जीर्णोद्धार करेगी. इन सभी परियोजनाओं की कुल क्षमता 34.85 मेगावाट थी. अब झारखंड सरकार नए सिरे से डीपीआर तैयार करेगी. इसके बाद तय होगा कि इनकी क्षमता और बढ़ाया जा सकती है या नहीं.फिलहाल सिकिदिरी ही झारखंड का एकलौता पानी आधारित बिजली पावर प्लांट
फिलहाल झारखंड में एक मात्र पानी आधारित हाईडल पावर प्रोजेक्ट सिकिदिरी में है. यहां 65-65 मेगावाट की दो यूनिट हैं. इससे केवल बारिश के दिनों में रूक्का डैम से पानी मिलने बाद बिजली उत्पादन होता है. डैम की क्षमता 36 फीट है. 25 फीट वाटर लेबल आने तक ही सिकिदिरी को बिजली उत्पादन के लिए पानी दिया जाता है. यानी साल में 3 से 5 महीने ही मुश्किल से इससे बिजली उत्पादन हो पाता है. इसे भी पढ़ें – 9">https://lagatar.in/salary-outstanding-for-9-months-rims-laundry-workers-will-boycott-work-on-wednesday/">9माह से वेतन बकाया, रिम्स के लॉन्ड्री कर्मी बुधवार को करेंगे कार्य बहिष्कार [wpse_comments_template]

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