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कर्मियों की कमी से जूझ रहा झारखंड सरकार का कल्याण विभाग, अब संविदा पर ली जाएगी सेवाएं

Ranchi : झारखंड में सरकारी नौकरी की बदहाल स्थिति किसी से छिपी नहीं है. एक नौकरी की आस में युवा अपनी उम्र को पार कर रहे हैं. हालांकि राजनीतिक दलों पर इसका शायद ही कोई फर्क पड़ रहा है. रोजगार देना तो अब प्रदेश की हर राजनीतिक पार्टियों का केवल चुनावी वादा बनकर रह गया है. इसका खमियाजा झारखंड सरकार के विभिन्न विभागों को भुगतना पड़ रहा है. ऐसा ही एक विभाग अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित जाति, अल्पसंख्यक एवं पिछ़ड़ा वर्ग कल्याण विभाग का है. कल्याण विभाग इन दिनों अपने यहां कर्मिंयों की समस्या से जूझ रहा है. इससे विभाग अंतर्गत चल रही केंद्र और राज्य प्रायोजित विभिन्न योजनाएं प्रभावित हो रही हैं. योजनाओं का क्रियान्वयन व मॉनिटरिंग नहीं हो रहा है. इसे देखते हुए विभाग अब विभिन्न विशेषज्ञों वाले व्यक्तियों से सेवा लेगा. सभी सेवाएं संविदा पर होगी. किस पद के लिए सेवा ली जाएगी और कितना मानदेय मिलेगा, यह सभी तय किए गए हैं. इसे भी पढ़ें - भगवान">https://lagatar.in/trust-in-god-the-doctors-are-worried-about-the-security/">भगवान

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इन पदों पर विशेषज्ञों की होगी नियुक्ति

• प्रशासनिक कार्य – प्रबंधन या स्नातक (किसी भी विषय में.) – 75,000 रुपए. • वन सेवा कार्य – स्नातक वनस्पति या अन्य किसी विषय में – 65,000 रुपए. • पशुपालन कार्य – वेटेनरी या विज्ञान में स्नातक – 60,000 रुपए • चिकित्सा कार्य – एम.बी.बी.एस – 60,000 रुपए. • शिक्षा कार्य – स्नातक (किसी भी विषय में) – 60,000 रुपए. • वित्त प्रशासन कार्य – स्नातक अर्थशास्त्र या किसी भी विषय में – 60,000 रुपए. • बैंकिग कार्य के अभियंता – स्नातक वाणिज्य/अर्थशास्त्र या किसी विषय में – 60,000 रुपए • सिविल सेवा के अभियंता – बी.टेक (सिविल) – 60,000 रुपए. • सिविल कार्य के कनीय अभियंता – डिप्लोमा (सिविल) – 45,000 रुपए. • कनीय अभियंता इलेक्ट्रिकल्स/इलेक्ट्रॉनिक्स – डिप्लोमा (इलेक्ट्रिकल्स/इलेक्ट्रॉनिक्स) - 45,000 रुपए

विशेषज्ञों को रखना होगा 20 सालों का अनुभव

संबंधित विशेषज्ञों को अपने-अपने क्षेत्र में 20 सालों के कार्य का अनुभव होना चाहिए. यह सेवा केवल एक वर्ष के लिए होगी. कार्य सेवा से संतुष्ट होने पर विशेषज्ञों को अवधि विस्तार मिलेगी.

निम्न कार्य करने होंगे विशेषज्ञों को

• समय-समय पर जिलों में संचालित सभी योजनाओं की प्रगति का प्रतिवेदन तैयार करना. • जिला से समन्वय स्थापित कर योजना क्रियान्वयन में तेजी लाना. • विभागों द्वारा समय-समय पर दिए जाने वाले अन्य कार्यों को करना. इसे भी पढ़ें - राहुल">https://lagatar.in/rahul-gandhi-said-its-been-52-years-i-dont-have-a-house-congressmen-are-satyagrahi/">राहुल

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