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झारखंड HC ने कहा-कोलकाता में प्रॉपर्टी की रजिस्ट्री हुई, सिर्फ इसलिए डीड रद्द करना उचित नहीं

 
Vinit Abha Upadhyay Ranchi :  झारखंड हाईकोर्ट ने अपने एक आदेश में कहा है कि संपत्तियों से संबंधित बिक्री विलेखों (सेल डीड) को केवल इसलिए गलत घोषित नहीं किया जा सकता, क्योंकि उसका पंजीकरण (रजिस्ट्रेशन) कोलकाता के रजिस्ट्रार एश्योरेंस के समक्ष किया गया है. दरअसल धनबाद के रहने वाले प्रभास कुमार शाह ने गंगा प्रसाद भगत से धनबाद की एक भूमि की कोलकाता में रजिस्ट्री करवायी थी. जिसके बाद उनकी सेल डीड को रद्द करने के लिए गंगा प्रसाद की पत्नी ने निचली अदालत में याचिका दायर की थी. जिसपर सुनवाई करते हुए धनबाद कोर्ट ने सेल डीड रद्द करने का फैसला सुनाया था. धनबाद कोर्ट के इस फैसले को  प्रभास कुमार शाह ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी. जिसपर हाईकोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस प्रदीप कुमार श्रीवास्तव की कोर्ट में सुनवाई हुई. इस दौरान अदालत ने कहा कि सेल डीड को केवल इस आधार पर गलत घोषित करना कि इसे कोलकाता में रजिस्ट्रार एश्योरेंस के कार्यालय ने पंजीकृत किया गया था, कानून के तहत उचित नहीं है.

ट्रायल और अपीलीय कोर्ट ने प्रावधानों में गलती व गलत व्याख्या की

हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि धारा 28 के मुताबिक, अचल संपत्ति को प्रभावित करने वाले दस्तावेजों को बिहार में संबंधित उप-जिला या जिले के उप-रजिस्ट्रार कार्यालय में पंजीकृत किया जाना चाहिए. धारा 30 ने रजिस्ट्रारों को उन दस्तावेजों को पंजीकृत करने की विवेकाधीन शक्ति दी है, जिन्हें उनके अधिकार क्षेत्र के तहत उप-रजिस्ट्रारों द्वारा नियंत्रित किया जा सकता है. उपधारा 2 में इसे कुछ जिलों तक विस्तारित किया गया है. कोर्ट ने कहा कि ट्रायल और अपीलीय कोर्ट ने अनुच्छेद 254 के तहत प्रावधानों में गलती और गलत व्याख्या की गयी. लेनदेन में धोखाधड़ी या जबरदस्ती की अनुपस्थिति पर ध्यान दिया और केवल कोलकाता के रजिस्ट्रार के एश्योरेंस कार्यालय से रजिस्ट्रेशन के आधार पर गलत करार दिये जाने को अनुचित मानते हुए धनबाद कोर्ट के आदेश को रद्द कर दिया. [wpse_comments_template]
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