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झारखंड स्वास्थ्य विभागः ये जो गड़बड़ियों की खबरें हैं, सरकार का सिरदर्द बनेगा

दवाईयों की खरीद में घपला, एंबुलेंस खरीद में गड़बड़ी, एंबुलेंस का संचालन सही नहीं, रिम्स की वित्तीय हालत खराब. यह सारी खबरें मीडिया में हैं. तो क्या झारखंड के स्वास्थ्य विभाग में कोई सिंडिकेट काम कर रहा है? जो हर खरीद के मामलों में बिचौलिया की भूमिका निभा रहा है और सरकारी राशि का गबन कर रहा है. निश्चित रूप से इसमें विभाग के अधिकारी और मंत्रालय तक में बैठे लोग शामिल हैं. इस विभाग के जो मंत्री हैं उनका नाम इरफान अंसारी है. यह जानना दिलचस्प होगा कि वह किन-किन लोगों से घिरे रह रहे हैं.
 

इन आठ खबरों पर गौर करें...

पहली उपकरण की खरीद ऑडिट में सरकारी अस्पतालों के लिए डायग्नोस्टिक और मेडिकल उपकरणों की खरीद में वित्तीय गड़बड़ी का मामला. ऑडिट में बताया गया है कि नियमों की अनदेखी और तकनीकी हेरफेर कर एक खास कंपनी को लाभ पहुंचाया गया.

दूसरी

गोदामों में दवा एक्सपायर

 

कैग की रिपोर्ट के अनुसार करोड़ों रुपये की जीवनरक्षक दवाएं, जिसे अस्पतालों तक पहुंचाया जाना था, वह गोदाम में पड़ा रहा और एक्सपायर हो गया. डिजिटल 'ई-औषधि प्रणाली' की चेतावनी पर ध्यान नहीं दिया गया.

तीसरी

एनएचएम टेंडर

राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के तहत 26 करोड़ रुपये के टेंडर में प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया. टेंडर से जुड़ी फाइलें गायब कर दी गई हैं.

चौथी

सीएजी की अपत्तियां

महालेखाकार (Audit) ने मार्च 2026 में झारखंड मेडिकल एंड हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर एंड प्रोक्योरमेंट कारपोरेशन लिमिटेड (JMHIDPCL) में 16 गंभीर वित्तीय व प्रशासनिक आपत्तियां दर्ज की हैं. विभाग को इस पर जवाब देना है.

पांचवीं

आयुष्मान में भर्जी क्लेम

आयुष्मान भारत योजना में बड़े पैमाने पर फर्जी क्लेम और मनी लांड्रिंग के आरोप हैं. ईडी छापेमारी कर चुकी है. आरोप है कि राज्य के 200 से अधिक अस्पतालों ने मृत व्यक्तियों का इलाज करके फर्जी मेडिकल बिल जमा किया और करोड़ों रुपये का गबन किया. इसके अलावा मोतियाबिंद का ऑपरेशन की संख्या भी विवादों में हैं.

छठी

पांच गुणा कीमत पर खरीद

स्वास्थ्य विभाग पर आरोप लगे हैं कि जेम (GeM) पोर्टल के माध्यम से उत्पादों की वास्तविक कीमत से तीन से पांच गुना अधिक दरों पर मेडिकल सामग्रियों की खरीद की गई. 

सातवीं

शेल कंपनियों को टेंडर

विपक्ष ने आरोप लगाया है कि रांची, बोकारो व दुमका में शेल कंपनियों को टेंडर दिया गया है. सभी कंपनियां एक ही परिवार के लोगों के हैं.

आठवीं

एंबुलेंस खरीद

सीएजी की रिपरो्ट में बताया गया है कि 55.58 करोड़ रुपये की लागत से 206 एंबुलेंस खरीदा गया. एंबुलेंस खरीदने से पहले उसकी जरुरतों के बारे में नहीं विचार किया गया और एंबुलेंस करीब एक साल तक खड़ी रही. सवाल उठता है कि क्या सिर्फ कमीशन के चक्कर में एंबुलेंस की खरीद की गई.

 

कोई सिंडिकेट काम कर रहा है!

दवाईयों की खरीद में घपला, एंबुलेंस खरीद में गड़बड़ी, एंबुलेंस का संचालन सही नहीं, रिम्स की वित्तीय हालत खराब. यह सारी खबरें मीडिया में हैं. इससे यह तो स्पष्ट हो जाता है कि झारखंड स्वास्थ्य विभाग में सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है. ऐसा लगता है झारखंड के स्वास्थ्य विभाग में कोई सिंडिकेट काम कर रहा है? जिसे मंत्रालय का सहयोग मिल रहा है.

 

जैसा कि बताया जा रहा है मंत्रालय में बैठे बिचौलियों की भूमिका हर काम में हैं. सरकारी राशि का गबन हो रहा है. विभाग में पदस्थापित अधिकारी और मंत्रालय तक में बैठे लोग संदेह के घेरे में हैं. इस विभाग के जो मंत्री हैं उनका नाम इरफान अंसारी है. हमेशा विवादों में घिरे रहते हैं. यह जानना दिलचस्प होगा कि वह किन-किन लोगों से घिरे रह रहे हैं. कहीं ऐसा ना हो कि अगले कुछ महीनों में यह विभाग झारखंड सरकार के लिए सबसे बड़ा सिरदर्द बन जाये.

 

यह टिप्पणी आपको कैसी लगी, कमेंट बॉक्स में जरूर लिखें. स्वास्थ्य विभाग से संबंधित सूचनाओं को भी कमेंट बॉक्स में साझा करें.

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