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Jharkhand High Court News : सरकार की गलती से प्रार्थियों का मौलिक अधिकार छिन गया, सरकार प्रमोशन पर फिर से पुनर्विचार करें

  • - मामला 9 एडिशनल कलेक्टरों के प्रमोशन का.

Ranchi : झारखंड के 9 एडिशनल कलेक्टरों की ओर से प्रमोशन (जॉइंट सेक्रेटरी पद) के लिए दायर याचिका की सुनवाई झारखंड हाई कोर्ट में हुई. मामले में हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति दीपक रोशन की कोर्ट ने स्पष्ट किया कि प्रमोशन के लिए विचार किया जाना संविधान के तहत एक मौलिक अधिकार है, जो भारत के संविधान के आर्टिकल 14 और आर्टिकल 16 से जुड़ा हुआ है.  सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ताओं के साथ अन्याय (victimisation) हुआ, सरकार की गलती से उनका मौलिक अधिकार छिन गया है. इसलिए राज्य को उनके प्रमोशन पर फिर से पुनर्विचार  (reconsider) करना होगा. 

 

क्या था मामला

जानकारी के मुताबिक 9 एडिशनल कलेक्टरों ने प्रमोशन (जॉइंट सेक्रेटरी पद) के लिए याचिका दायर की थी. इनकी भर्ती झारखंड सिविल सर्विसेज एग्जामिनेशन 2006 के माध्यम से हुई थी. राज्य सरकार ने इन्हें प्रमोशन के लिए विचार नहीं किया क्योंकि इनका नाम CBI की चार्जशीट में दागदार भर्ती (tainted recruitment) के लाभार्थी के रूप में आया था. कोर्ट ने माना कि अगर 2023 में सही समय पर DPC होती और वैकेंसी सही गिनी जाती तो याचिकाकर्ताओं को चार्जशीट से पहले ही प्रमोशन मिल सकता था.

 

दरअसल, 22 दिसंबर 2023 को हुई DPC (Departmental Promotion Committee) में सरकार ने केवल 14 वैकेंसी बताया, जबकि याचिकाकर्ताओं के अनुसार 30+ वैकेंसी थीं. इसी कारण उन्हें प्रमोशन के लिए कंसीडर ही नहीं किया गया. बाद में 20 अप्रैल 2024 को CBI ने चार्जशीट दाखिल की. मार्च 2025 में जब फिर DPC हुई. याचिकाकर्ताओं का मामला sealed cover procedure में डाल दिया गया. जबकि उनके जूनियर्स को प्रमोशन दे दिया गया. 

 

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