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हाईकोर्ट ने मधुकम में चल रही बुलडोजर कार्रवाई पर लगाई रोक

सुखदेवनगर क्षेत्र में अतिक्रमण हटाए जाने के मामले में झारखंड हाईकोर्ट ने पीड़क कार्रवाई पर रोक लगा दी है. मामले की सुनवाई हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति राजेश शंकर की बेंच में हुई.
 

Ranchi :  सुखदेवनगर क्षेत्र में अतिक्रमण हटाए जाने के मामले में झारखंड हाईकोर्ट ने पीड़क कार्रवाई पर रोक लगा दी है. इससे हस्ताक्षेपकर्ताओं (पीड़ितों) को तत्काल राहत मिली है.

 

मामले की सुनवाई हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति राजेश शंकर की बेंच में हुई. रौनक कुमार एवं 11 लोगों की ओर से हाईकोर्ट में हस्तक्षेप याचिका दाखिल कर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई पर रोक लगाने का आग्रह किया गया है. हस्तक्षेपकर्ता की ओर से अधिवक्ता गौरव राज ने पक्ष रखा.

 

कोर्ट ने सुनवाई के दौरान अपने आदेश में कहा है कि जब तक भुगतान/समझौते का मुद्दा अदालत के समक्ष विचाराधीन है, तब तक सर्किल ऑफिसर आगे कोई दबावपूर्ण या जबरन कार्रवाई नहीं करेंगे.

 

हाई कोर्ट ने महादेव उरांव की अवमानना वाद पर यह आदेश दिया. कोर्ट ने इस मामले में दायर हस्तक्षेप याचिका पर आज त्वरित सुनवाई की है.

 

कोर्ट को बताया गया कि इससे संबंधित एक याचिका के खारिज होने के बाद, हस्तक्षेपकर्ताओं ने समझौते के तहत याचिकाकर्ता को काफी धनराशि का भुगतान किया था, ताकि वे विवादित भूमि पर कब्जे में बने रह सकें. इसके बावजूद याचिकाकर्ता उनके बेदखली पर जोर दे रहे हैं.

 

यह भी कहा गया कि कोर्ट द्वारा 16 जनवरी 2026 को दिए गए आदेश में हेहल के सर्किल ऑफिसर को अंतिम अवसर देते हुए चार सप्ताह में अनुपालन हलफनामा दाखिल करने को कहा गया था. लेकिन सर्किल ऑफिसर द्वारा हस्तक्षेपकर्ताओं को उनके घरों से जबरन हटाये जाने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं. 

 

इस पर कोर्ट ने सर्किल ऑफिसर हेहल को निर्देश दिया कि वह यह स्पष्ट करते हुए शो-कॉज हलफनामा दाखिल करें कि क्या हस्तक्षेपकर्ताओं को नोटिस दिया गया था?  क्या उन्हें दस्तावेज प्रस्तुत करने का अवसर मिला? क्या समझौते के भुगतान संबंधी कोई आदेश पारित किया गया था? बिना आदेश के बेदखली की कार्रवाई क्यों की गई? 

 

कोर्ट ने 22 अक्टूबर 2024 के एक रिट याचिका पर आदेश का हवाला देते हुए कहा कि सर्किल ऑफिसर को निर्देश दिया गया था कि शांति देवी एवं अन्य और  मोहन साहू एवं अन्य (हस्तक्षेपकर्ता) को नोटिस जारी करें.

 

यह सत्यापित करें कि पूर्व आदेश अब तक रद्द नहीं हुए हैं. उसके बाद कानून के अनुसार भूमि का कब्जा याचिकाकर्ता को सौंपा जाए. इसके बाद कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 27 फरवरी की तिथि निर्धारित कर दी. 

 

दरअसल बीते दिनों जिला प्रशासन ने खादगड़ा शिव दुर्गा मंदिर रोड स्थित मुंडारी प्रकृति की जमीन पर बने 12 घरों को तोड़ने का आदेश दिया है. इसके तहत बुलडोजर की कार्रवाई शुरू की गई थी, जिसका स्थानीय निवासी विरोध कर रहे हैं.

 

स्थानीय लोगों का कहना है कि उन्होंने प्रति कट्ठा 5.25 लाख रुपये के हिसाब से भुगतान कर जमीन खरीदी है और यहां घर बनाकर वर्षों से रह रहे हैं. लोगों का आरोप है कि 38.25 डिसमिल जमीन के लिए उन्होंने कुल भुगतान लगभग 1 करोड़ 8 लाख 93 हजार 750 रुपये किया गया था, लेकिन अब उन्हें बेदखल किया जा रहा है.

 

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