alt="" width="1600" height="900" /> जयपाल सिंह मुंडा स्पोर्टस कांप्लेक्स रांची वासियों के लिए अब भी सपना बनकर ही रह गया है. इसके लिए नगर निगम ने 8 मार्च 2021 को टेंडर जारी किया था. लेकिन अब भी यह निर्माणाधीन है. कहा तो जा रहा कि आगामी 15 मार्च को इसे निगम को सौंप दिया जाएगा. पर देखने वाली बात यह है कि इस स्टेडियम पर कब से खेल गतिविधियां शुरू हो पाएगी. तब जाकर रांची वासियों का सपना साकार हो पाएगा. मालूम हो कि रांची शहर के बीचों-बीच बन रहे इस स्पोर्ट्स कांप्लेक्स का निर्माण 4.53 करोड़ में किया जाना है. इसके लिए नगर निगम ने 8 मार्च 2021 को टेंडर जारी किया गया था. वहीं 25 मार्च को इस टेंडर का बिड खुला था.स्पोर्टस कांप्लेक्स का काम रेवांत इंजीनियर कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड को मिला है. पहले स्टेडियम का काम पूरा करने के लिए 365 दिन का समय तय किया गया था. इसी साल 3 जनवरी को जयपाल सिंह मुंडा की जयंती के अवसर पर रेवांत इंजीनियर कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड को जयपाल सिंह स्पोर्टस कांप्लेक्स को निगम के हवाले सौंपना था, लेकिन दो माह बीतने के बाद भी स्टेडियम निगम के हवाले नहीं किया गया. मालूम हो कि जयपाल सिंह मुंडा 1982 में ओलंपिक में इंडिया को गोल्ड मेडल दिलाने वाली हॉकी टीम के कप्तान थे. उन्हीं के सम्मान में इस स्टेडियम का निर्माण किया गया है. पहले इस स्थान पर एक तालाब था जिसे भुताहा तालाब कहा जाता था. 80 के दशक में स्कूली छात्र-छात्राओं के श्रमदान से मिट्टी भरकर इसे मैदान का रुप दिया. दो दशक तक इस स्डेडियम में क्रिकेट, फुटबॉल, कबड्डी जैसे खेल हुआ करते थे. बाद में इस स्टेडियम का आधुनिकीकरण करने प्रस्ताव आया और इसे जयपाल सिंह मुंडा स्पोर्टस कांप्लेक्स के रूप में विकसित करने का निर्णय लिया गया.
क्या-क्या काम होना था
स्टेडियम में फुटबॉल मैदान का निर्माण किया गया है. इसके अलावा लॉन टेनिस और बास्केटबॉल कोर्ट भी बनाया जाएगा. मैदान में बैठकर मैच देखने के लिए गैलरी का निर्माण किया जाना है. अभी काम चल रहा है.धनबाद :
राज्य सरकार के संकल्प के बाद भी नहीं बदली शहरी जलापूर्ति व्यवस्था
[caption id="attachment_567539" align="aligncenter" width="773"]alt="" width="773" height="329" /> चालू वर्ष के बजट से आस, पानी के लिए होंगी कुछ खास घोषणाएं[/caption] वित्तीय वर्ष 2022- 23 के बजट में राज्य सरकार ने शहरों में पेयजल उपलब्ध कराने के लिए अपना संकल्प दोहराया था. धनबाद सहित राज्य के अन्य नगर निकायों में पाइपलाइन से जलापूर्ति की नई योजना को स्वीकृति प्रदान की गई थी, जो आज भी अधूरी है. सिर्फ धनबाद की बात करें तो शहरी जलापूर्ति योजना फेज टू का 67 प्रतिशत काम हुआ है. डीसी की अध्यक्षता में कई बैठके भी हुई, लेकिन काम में तेजी नहीं आई. वर्तमान में धनबाद की 5 लाख आबादी को सिर्फ एक वक्त का पानी मिल रहा है. गर्मी और बरसात में पुरानी पाइप के फटने और जाम होने के कारण अलग से जल संकट का सामना करना पड़ता है. वार्ड 20, 21, 22, 23 के साथ सिंदरी एवं कांड्रा का 3300 ऐसा भी घर है, जहां कनेक्शन लेने के बाद भी लोगों को एक बूंद पानी नहीं मिल रहा है. इस बजट में लोगों को सरकार से उम्मीद है कि पानी के लिये कुछ खास पैकेज की घोषणा होगी. ज्ञात हो कि शहरी जलापूर्ति योजना फेज टू की नींव तत्कालीन रघुवर सरकार के कार्यकाल में रखी गई थी. 441 करोड़ की योजना का काम एल एंड टी कंपनी को दिया गया था. जुलाई 2019 में कंपनी ने मैथन से धनबाद के भेलाटांड़ तक समानांतर पाइप बिछाने का काम शुरू किया. इसके साथ नया इंटकवेल और वाटर रिजर्वायर का भी निर्माण शुरू हुआ. लेकिन काम अभी तक पूरा नहीं हो सका है.
गिरिडीह :
विभागीय लेट-लतीफी के कारण, अधर में लटका डीआईईसी निर्माण कार्य
[caption id="attachment_567534" align="aligncenter" width="1280"]alt="" width="1280" height="720" /> स्थानीय लोगों की उम्मीदों पर फिर रहा पानी[/caption] चैताडीह मातृत्व शिशु कल्याण केंद्र में निर्माणाधीन डिस्ट्रिक्ट अर्ली इंटरवेंशन सेंटर (डीआईईसी) अधर में लटका है. वर्ष 2021-22 में यहां 96 लाख रुपए की लागत से स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों से जूझ रहे गिरिडीह के बच्चों की चिकित्सा के लिए डीआईईसी निर्माण की योजना बनी थी. विभागीय लेट लतीफी के कारण योजना पूरी नहीं हो पाई है. चैताडीह मातृत्व शिशु कल्याण केंद्र गिरिडीह सदर अस्पताल की इकाई है. डीआईईसी सेंटर बनने पर एक ही छत के नीचे बच्चों के स्वास्थ्य संबंधी सुविधा उपलब्ध होती. केंद्र में बाल रोग विशेषज्ञ के अलावा फिजियोथैरेपिस्ट, साइकोलॉजिस्ट, न्यूट्रीशन और स्पीच थैरेपिस्ट की भी तैनाती की योजना है. बच्चों में होने वाली गंभीर बीमारियों का इलाज यहां किया जाता. डीआईईसी की स्थापना की योजना बनने से गिरिडीह के लोगों में बच्चों की चिकित्सा को लेकर उम्मीद जगी थी. लोगों ने सोचा कि अब बच्चों के इलाज कराने बाहर नहीं जाना पड़ेगा. निर्माण कार्य में देरी होने से लोगों की उम्मीद पर पानी फिरता दिखता है. वैसे निर्माण कार्य जारी है, लेकिन यह कब पूरा होगा इसकी गारंटी देने वाला कोई नहीं है.लोग कहते हैं कि समय पर इस सेंटर के पूरा हो जाने से जिला वासियों को काफी लाभ होता. पूछने पर लोग कहते हैं कि काम तो चल रहा है. पर जिस गति से काम हो रहा है यह कहना मुश्किल है कि कब यह बनकर तैयार होगा.
गिरिडीह :
शिलान्यास के चार वर्ष बाद भी शुरू नहीं हो सका मिल्क प्रोसेसिंग प्लांट
[caption id="attachment_567537" align="aligncenter" width="1280"]alt="" width="1280" height="606" /> मई 2018 में रखी गई थी आधारशिला[/caption] जमुआ प्रखंड के परगोडीह स्थित गौशाला मैदान में 2 मई 2018 को तत्कालीन कृषि मंत्री रणधीर सिंह ने पचास हजार लीटर क्षमता की मिल्क प्रोसेसिंग प्लांट निर्माण कार्य का शिलान्यास किया था. कई वर्ष बीत जाने के बाद भी इसका निर्माण कार्य शुरू नहीं हो सका है. निर्माण कार्य नहीं होने से क्षेत्र की जनता निराश हैं. इस प्लांट से जमुआ, देवरी, तिसरी, गावां और धनवार प्रखंड के पशुपालकों को लाभ पहुंचता. निर्माण कार्य शुरू नहीं होने से पशुपालकों का सपना अधूरा रह गया. तत्कालीन रघुवर दास सरकार ने इस प्लांट का निर्माण बजट में शामिल किया था. कृषि विभाग की ओर से लाखों रुपए खर्च कर शिलान्यास समारोह का आयोजन तामझाम के साथ किया गया था. निर्माण कार्य शुरू नहीं होने के संबंध में जमुआ विधायक केदार हाजरा ने बताया कि वर्तमान राज्य सरकार की गलत नीति के कारण निर्माण कार्य अधर में लटक गया है. जमुआ प्रखंड प्रमुख मिस्टू देवी ने बताया कि मिल्क प्रोसेसिंग प्लांट चालू होने से इस क्षेत्र के पशुपालकों को लाभ पहुंचता. पशुपालकों के हित में इस प्लांट का निर्माण जरूरी है.इतने साल बाद भी प्लांट के अभी तक पूरा नहीं होने से क्षेत्र के लोगों में थोड़ी नाराजगी भी है. वे कहते हैं चार साल हो गए अब पता नहीं चल रहा है कि यह योजना कब पूरी होगी. क्षेत्र के लोग इस योजना को आशाभरी निगाह से देख रहे हैं कि यह कब पूरी होगी.
लातेहार :
सात साल बाद भी पूरा नहीं हुआ औरंगा नदी पर पुल निर्माण का कार्य
[caption id="attachment_567530" align="aligncenter" width="1600"]alt="" width="1600" height="721" /> अब तक महज 43 प्रतिशत काम ही पूरा हो पाया है[/caption] लातेहार शहर को रेलवे स्टेशन क्षेत्र से जोड़ने वाली औरंगा नदी पुल का शिलान्यास तत्कालीन मुख्यमंत्री रघुवर दास ने 27 नवंबर 2016 को रखी थी. लेकिन सात साल के बाद भी उक्त पुल का निर्माण कार्य पूरा नहीं हुआ है. पथ निर्माण विभाग, लातेहार के द्वारा इस पुल का निर्माण कार्य कराया जा रहा है. रांची की गायत्री बिल्डकॉन प्राइवेट लिमिटेड को यह कार्य आवंटित किया गया था. इस पुल की प्रशासनिक प्राक्कलन 610.929 लाख रुपये थी. जबकि इसका एकरारनामा 594.48 लाख रुपये में किया गया था. सात सालों में महज 43 फीसदी कार्य ही हो पाया है. जब पुल का निर्माण कार्य तीन वर्षों में भी पूरा नहीं हुआ तो पथ निर्माण विभाग के कार्यपालक अभियंता ने 19 नवंबर 2019 को अपने पत्रांक 1138 के माध्यम से मुख्य अभियंता कार्यालय को पत्र लिखकर पहली बार उक्त पुल के निर्माण कराने वाली एजेंसी का एकरारनामा विखंडन (टर्मिनेट) करने के लिए पत्राचार किया था. इसके बाद उन्होंने नौ अक्टूबर 2021 तथा नौ फरवरी 2022 को मुख्य अभियंता कार्यालय को पुल निर्माण की अंतिम मापी लेकर संवेदक का एकरारनामा रद्द करने के लिए पत्राचार किया था. मालूम हो कि लातेहार-सरयू-कोटाम पथ पर जिला मुख्यालय से महज तीन किलोमीटर की दूरी पर औरंगा नदी पर बन रहा यह पुल काफी महत्वपूर्ण है. घोर उग्रवाद प्रभावित सरयू और गारू प्रखंड तक पहुंचने के लिए एक सुगम मार्ग है. इस मार्ग से महुआडांड और नेतरहाट आसानी से पहुंचा जा सकता है. इस पथ से लातेहार से नेतरहाट की दूरी मात्र 80 किलोमीटर है.
बरही :
नहीं पूरी हुई पीएम आवास योजना पिछले बजट में मिली थी स्वीकृति
[caption id="attachment_567531" align="aligncenter" width="1280"]alt="" width="1280" height="960" /> अभी भी अधूरा पड़ा है 21 आवासों का निर्माण कार्य[/caption] पिछले बजट में बरही प्रखंड को 73 प्रधानमंत्री आवास योजना मंजूर की गई थी. लेकिन सभी आवासों का निर्माण कार्य अब तक पूरा नहीं हो पाया है. साल भर बाद फिर बजट सत्र आ गया, लेकिन महज 52 आवास ही पूर्ण हो सके हैं. 21 आवास अब भी अधूरे पड़े हैं. प्रखंड समन्वयक (आवास) कमलेश तिवारी ने बताया कि कुल 73 लाभुक में 69 लाभुक को पहली किस्त 40 हजार रुपए, जबकि 52 लाभुक को दूसरी किस्त के रूप में 85 हजार की राशि दी जा चुकी है. भूमि क्लीयरेंस नहीं होने के कारण चार लाभुकों को राशि निर्गत नहीं की जा सकी . अधूरे आवास की जानकारी देते हुए प्रखंड समन्वयक ने बताया कि दुलमहा पंचायत में चार और बसरिया उर्फ पंचमाधव पंचायत के कुल 17 लाभुकों ने अब तक अपना आवास पूर्ण नहीं किया है. निरीक्षण के दौरान बीडीओ सीआर इंदीवर ने सभी लाभुकों को शीघ्र आवास पूर्ण करने का निर्देश दिया है. सरकार के निर्देशानुसार तीन महीने में आवास पूर्ण कर लेना है. प्रखंड में निर्गत कुल 73 आवास में किसी भी लाभुक को तीनों किश्त की राशि निर्गत नहीं की जा सकी है. दुलमहा पंचायत के मुखिया नारायण यादव ने बताया कि प्रायः यह देखा गया हैं कि लाभुक पहली किश्त की राशि लेने के बाद अपने स्तर से प्रधानमंत्री आवास के ले आउट से हटकर बड़ा घर बनाने के लिए अधिक पैसे की व्यवस्था में लग जाते हैं. ऐसे में खर्च ज्यादा होते हैं, जो पहली किश्त की राशि में संभव नहीं है. पैसे इंतजाम करने में देर हो जाती है, नतीजतन समय पर आवास पूरे नहीं हो पाते हैं. उन्होंने कहा कि सरकार को इस राशि को बढ़ानी चाहिए.
पाकुड़ :
शहरी क्षेत्र में घर-घर गंगा पानी आपूर्ति योजना रह गई है अधूरी
[caption id="attachment_567535" align="aligncenter" width="1156"]alt="" width="1156" height="868" /> गंगा नदी के किनारे रखी गई थी आधारशिला[/caption] बृहद शहरी जलापूर्ति योजना के तहत पाकुड़ शहर में घर-घर गंगा पानी की आपूर्ति की योजना अधूरी रह गई. गंगा नदी का पानी पश्चिम बंगाल के चांदपुर से पाइप लाइन के जरिए लाना था. वर्ष 2011 में चांदपुर में गंगा नदी के किनारे आधारशिला भी रखी गई. इस योजना पर 40 करोड़ 70 लाख 38 हजार रुपये की लागत आती. लागत के लिए प्रशासनिक स्वीकृति भी प्रदान की गई. नगर विकास एवं आवास विभाग ने वर्ष 2011- 12 से लेकर 2018- 19 तक राशि भी नगर परिषद् को आवंटित की गई. नगर परिषद् ने राशि पेयजल एवं स्वच्छता विभाग पाकुड़ को आवंटित किया. राशि आवंटित किए जाने के बावजूद योजना पूरी नहीं हो पाई. योजना को लेकर कई बार उपायुक्त की अध्यक्षता में नगर परिषद् और पेयजल स्वच्छता विभाग की बैठक हो चुकी है. योजना पूरी करने का उपायुक्त ने निर्देश भी दिये, बावजूद इसके योजना पूरी नहीं हो पाई. एक दशक बीत जाने के बाद भी शहर के लोग गंगा पानी के लिए तरस रहे हैं. इस संबंध में पूछे जाने पर नगर परिषद् के कार्यपालक पदाधिकारी कोशलेश यादव ने बताया कि राशि और आवश्यक कागजात पेयजल स्वच्छता विभाग को उपलब्ध कराया जा चुका है. योजना को पूरा करने की जिम्मेवारी इस विभाग की है. योजना अधूरी रहने के बारे में पेयजल स्वच्छता विभाग के कार्यपालक अभियंता राहुल कुमार कहा कि अभी सिविल वर्क चल रहा है. अभी और तीन माह सिविल वर्क पूरा होने में लगेगा. इसके बाद अन्य कार्य किए जाएंगे.
जमशेदपुर :
अधर में लटक गयी है गोविंदपुर एलिवेटेड कॉरिडोर योजना
[caption id="attachment_567536" align="aligncenter" width="600"]alt="" width="600" height="400" /> योजना को 2021 में पूरा होना था,सही तरीके से नहीं शुरू हो पाई कार्ययोजना[/caption] झारखंड के तत्कालीन मुख्यमंत्री रघुवर दास और जमशेदपुर सांसद विद्युत वरण महतो की महत्वाकांक्षी योजना चार वर्ष बीतने के बाद भी पूरी नहीं हो पायी है. वर्तमान में जिला प्रशासन भी यह कहने की स्थिति में नहीं है कि यह कब तक पूरा हो पाएगा. इस योजना का शिलान्यास तत्कालीन मुख्यमंत्री रघुवर दास ने 2018 में जमशेदपुर प्रखंड के धानचटानी में आयोजित जनसंवाद कार्यक्रम में किया गया था. इस योजना को वर्ष 2021 में पूरा होना था, लेकिन सरकार एवं विभाग की सही ढंग से कार्य योजना नहीं बनाए जाने के कारण यह योजना शुरू होने के साथ ही विवाद में रहा. वहीं राज्य सरकार द्वारा समय पर आवंटन नहीं दिए जाने और समय अत्यधिक लगने के कारण ठकेदार द्वारा रेट रिविजन के लिए भी विभाग एवं सरकार से लगातार आग्रह किया गया. लेकिन गोविंदपुर एलिवेटेड कॉरिडोर योजना के प्रति सरकार की बेरुखी के कारण योजना अधर में लटक गयी है. क्या है गोविंदपुर एलिवेटेड कॉरिडोर योजना : तत्कालीन मुख्यमंत्री रघुवर दास एवं सांसद विद्युत वरण महतो की महत्वाकांक्षी योजना गोविंदपुर एलिवेटेड कॉरिडोर योजना 56 करोड़ रुपये की लागत से गोविंदपुर के अन्ना चौक से एनएच-33 के पीपला तक 11.7 किलोमीटर सड़क निर्माण होना था. इसमें स्वर्णरेखा नदी पर पुल भी बनना था. ठेकेदार द्वारा गोविंदपुर के अन्ना चौक पर कुछ कार्य भी किए गए.
देवघर :
क्यू कांप्लेक्स का निर्माण अधूरा रहने से श्रद्धालु परेशान
[caption id="attachment_567533" align="aligncenter" width="1600"]alt="" width="1600" height="1200" /> वर्ष 2015 में रखी गई नींव, 125 करोड़ की आएगी लागत[/caption] बाबाधाम में भगवान भोलेनाथ की पूजा-अर्चना करने के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ वर्षभर लगी रहती है. सावन महीने और अन्य त्योहार के अवसर पर भीड़ अन्य दिनों की तुलना में ज्यादा बढ़ जाती है. ज्यादा भीड़ होने कारण यहां श्रद्धालुओं को ठहरने, भोजन पकाने, सामानों को सुरक्षित रखने के लिए कमरा उपलब्ध नहीं हो पाता. इसके अलावा श्रद्धालु बाबा भोलेनाथ पर जलार्पण के लिए घंटों आकाश तले खड़े रहते हैं. ज्यादा देर तक खड़े रहने से पांव भारी हो जाता है. श्रद्धालुओं की सुविधा को देखते हुए देवघर में 125 करोड़ रुपए की लागत से बहुउद्देशीय क्यू कॉम्प्लेक्स बनाने की योजना बनी थी. वर्ष 2015 में इसकी नींव रखी गई. कई वर्ष गुजर जाने के बाद भी निर्माण कार्य पूरा नहीं हो पाया है. क्यू कॉम्प्लेक्स का निर्माण होने से श्रद्धालुओं को सुविधा होगी. 25 से 30 हजार कतारबद्ध श्रद्धालु बैठ पाएंगे. कॉम्प्लेक्स में मंदिर कार्यालय, प्रशासनिक भवन, 6 शैय्या वाला स्वास्थ्य केंद्र, पेयजल, शौचालय और श्रद्धालुओं के बैठने की व्यवस्था रहेगी.लोग कहते हैं कि बाबाधाम में जब भीड़ बढ़ती है तो श्रद्धालुओं की परेशानी बढ़ जाती है. आने वाले समय में श्रद्धालुओं की संख्या और भी बढ़ेगी. इसलिए भी जरुरी है कि क्यू कम्प्लेक्स का निर्माण कार्य पूरा होना चाहिए. इस दिशा में प्रशासन को भी पहल करने की जरुरत है.
पलामू :
वर्षों से लटका है पांकी प्रोजेक्ट गर्ल्स हाईस्कूल के भवन का कार्य
[caption id="attachment_567541" align="aligncenter" width="1152"]alt="" width="1152" height="864" /> चार कमरे में अध्ययनरत हैं 950 छात्राएं[/caption] केंद्र व राज्य सरकार जहां बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ का नारा बुलंद कर रही है. वहीं दूसरी ओर छात्राओं को पढ़ने के लिए बेहतर भवन भी नहीं मिल पा रहा है. यही हाल है पांकी प्रोजेक्ट गर्ल्स हाईस्कूल उच्च विद्यालय का. पांकी विधायक डॉ. कुशवाहा शशिभूषण मेहता की उपस्थिति में 13 फरवरी 2020 को 47 लाख की लागत से दस अतिरिक्त वर्ग कक्ष के निर्माण कार्य की आधारशिला रखी गई थी. परंतु तीन वर्ष बीतने के बाद भी भवन निर्माण अधूरा पड़ा है. शिक्षा विभाग की अनदेखी का दंश स्कूल में पढ़ने वाले छात्र व शिक्षक झेल रहे हैं. 950 छात्राएं नामांकित हैं. इनके बैठने के लिए चार कमरें हैं. जिससे छात्रों को पढ़ने और शिक्षकों को पढ़ाने में काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. भुगतान के बाद कार्य शुरू होगा : जेई शिक्षा विभाग के जेई चंदन कुमार ने बताया कि 2019 में भवन निर्माण का कार्यादेश मिला था. परन्तु विलंब होने से कार्य धीमी गति से हुआ है .संवेदक को रुपये भुगतान के साथ ही कार्य शुरु हो जायेगा. दो शिक्षक के भरोसे चल रहा है विद्यालय : प्राचार्य : प्रोजेक्ट हरिवंश नारायण बालिका उच्च विद्यालय पांकी प्रखंड का इकलौता विद्यालय है. परन्तु विद्यालय में शिक्षकों की घोर कमी है. भवन निर्माण अधूरा रहने से छात्राओं को बैठने में बहुत परेशानी हो रही है. इस बाबत कई बार विभाग का भी ध्यान आकृष्ट कराया गया. परन्तु अभी तक इस दिशा में कोई सकारात्मक पहल नहीं हो पाई है. [wpse_comments_template]

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