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झारखंड डीजीपी विहीन, अनुराग गुप्ता के फैसले नियम विरुद्धः बाबूलाल

Ranchi: नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने कहा है कि दो दिनों से झारखंड संवैधानिक रूप से डीजीपी विहीन राज्य है. झारखंड में एसीबी, सीआईडी और पुलिस सभी के व डीजीपी का पद रिक्त है. वे शुक्रवार को भाजपा प्रदेश कार्यालय में आयोजित प्रेस कांफ्रेंस में बोल रहे थे. उन्होंने कहा कि अनुराग गुप्ता द्वारा दिए जा रहे निर्देश पूरी तरह असंवैधानिक है. एक आईपीएस अफ़सर जिस पर भ्रष्टाचार, पक्षपात और फ्रॉड का आरोप हो, कोई भी सरकार अपने राज्य और जनता की सुरक्षा उसके हवाले कैसे कर सकती है? आईपीएस अनुराग गुप्ता के ऊपर आरोपों की लिस्ट काफ़ी लंबी है. उन पर बिहार के जमाने में मगध यूनिवर्सिटी पुलिस स्टेशन पर भी केस दर्ज हुआ था. हेमंत सोरेन ने 26 महीने निलंबित किए रखा
हेमंत सोरेन ने ख़ुद इन्हें 24 फ़रवरी 2020-से 9 मई 2022 (26 महीने) निलंबित किये रखा. लेकिन इस दौरान हेमंत सोरेन और अनुराग गुप्ता की नज़दीकियां इतनी बढ़ीं कि सस्पेंशन की अवधि ख़त्म होते ही हेमंत सोरेन ने अनुराग गुप्ता को वापस झारखंड में ही नियुक्ति दे दी.
इनकी नियुक्ति की शर्त यह थी कि उन्हें झारखंड में ईडी के मुकदमों को मैनेज करना होगा. साथ ही सरकार के भ्रष्टाचार का खुलासा करने वाले गवाहों पर झूठे केस चलाकर दबाव बनाना होगा. अनुराग गुप्ता के प्रयास से ईडी के अफ़सरों को डराने और काम से रोकने के लिये तीन-तीन मुकदमे पुलिस में दर्ज करवाये गये. जिनकी जांच और कार्रवाई पर हाईकोर्ट को रोक लगानी पड़ी है. अभी हाल में ईडी के तीन गवाहों को पुलिस केस कर जेल भेजा गया.
जनवरी 2025 से अबतक पूजा सिंघल, छवि रंजन, आलमगीर आलम समेत दस से भी ज़्यादा सरकारी लोगों पर प्रॉसिक्यूशन सैंक्शन के लिये ईडी ने झारखंड सरकार को अनुरोध भेजा हुआ है. लेकिन एक भी मामले में झारखंड सरकार ने अबतक सैंक्शन नहीं दिया है.
2024 में चुनाव आयोग ने डीजीपी अनुराग गुप्ता को अपने पद का दुरुपयोग करने का दोषी पाया. उन्हें हटाकर दूसरे डीजीपी की नियुक्ति की. लेकिन हद तो तब हो गई जब मुख्यमंत्री बनने के कुछ घंटों के अंदर ही हेमंत सोरेन ने अनुराग गुप्ता को डीजीपी का अतिरिक्त प्रभार दे दिया. कोर्ट के आदेश की अवहेलना कर कार्यवाहक डीजीपी बनाया गया कोर्ट के आदेश की अवहेलना करके अनुराग गुप्ता को कार्यवाहक डीजीपी बनाया गया. फिर सुप्रीम कोर्ट की फटकार के बाद 7 जनवरी को आनन-फानन में ऑल इंडिया सर्विस रूल्स (1958) को दरकिनार करते हुए सरकार ने डीजीपी की नियुक्ति के लिए एक नई नियमावली ही बना डाली. ऑल इंडिया सर्विस नियमों के अनुसार, सरकार को डीजीपी की नियुक्ति के लिए पैनल की अनुशंसा यूपीएससी को भेजनी होती है, किंतु झारखंड सरकार ने अपनी मर्ज़ी के नियम बनाकर यह ज़िम्मेदारी ख़ुद ही ले ली. जानबूझकर रिटायरमेंट के 2 महीने पहले नियुक्ति करना दर्शाता है कि वे नियुक्ति के बाद कम से कम दो साल डीजीपी बनाए रखने वाले नियम का इस्तेमाल अपने राजनीतिक फ़ायदे के लिए कर रहे हैं.
इस असंवैधानिक नियुक्ति के संदर्भ में गृह मंत्रालय ने झारखंड सरकार को जो पत्र लिखा है, उसका जवाब में हेमंत सोरेन गृह मंत्रालय को ही पुनर्विचार करने को बोल रहे हैं. सरकार नियमों को ताक पर रखकर संवैधानिक पदों की गरिमा समाप्त कर रही है.
यह सिर्फ़ डीजीपी की नियुक्ति तक ही सीमित नहीं है-झारखंड में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो और सीआईडी का कार्यभार भी ग़ैर क़ानूनी तरीक़े से यही संभाल रहे हैं. कोयले की चोरी में बेतहाशा वृद्धि अनुराग गुप्ता के कार्यकाल में कोयले की चोरी में बेतहाशा वृद्धि हुई है. जब धनबाद इलाक़े में मुझे लोगों ने बताया कि उस इलाक़े से रोज़ाना 500 ट्रक से भी ज़्यादा कोयले की चोरी हो रही है. मैंनें ये बातें सरकार के संज्ञान लाईं. लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हो रही. इस मामले में तो उस इलाक़े से आने वाले विधायक जयराम महतो ने तो यहां तक कह दिया कि बाबूलाल जी की जानकारी कम है, वहां तो रोज़ाना सात सौ से आठ सौ ट्रक कोयले की चोरी हो रही है. बाबूलाल मरांडी ने अविलंब राज्य में डीजीपी नियुक्त करने की मांग की. इसे भी पढ़ें- बिलावल">https://lagatar.in/bilawal-bhutto-also-admitted-that-supporting-terrorism-is-no-secret/">बिलावल

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