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हाल-ए-झारखंड:  पुलिस पदाधिकारी मना रहे रंगरलियां, वीडियो वायरल होने पर होते हैं लाइन हाजिर

Ranchi: झारखंड में इन दिनों राज्य में पुलिस पदाधिकारियों के कई मामले सामने आ रहे हैं. पुलिस जवानों को तो छोड़िए, अब पुलिस पदाधिकारी तक महिलाओं के साथ रंगरलियां मनाते, आपत्तिजनक हरकतों और विवादों को लेकर चर्चा में हैं. इनमें कई पदाधिकारियों और पुलिस जवानों का महिलाओं संग वीडियो वायरल भी हो रहा है  तो कहीं महिला उत्पीड़न और यौन शोषण जैसे गंभीर आरोप लग रहे हैं.
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Ranchi: झारखंड में इन दिनों राज्य में पुलिस पदाधिकारियों के कई मामले सामने आ रहे हैं. पुलिस जवानों को तो छोड़िए, अब पुलिस पदाधिकारी तक महिलाओं के साथ रंगरलियां मनाते, आपत्तिजनक हरकतों और विवादों को लेकर चर्चा में हैं. इनमें कई पदाधिकारियों और पुलिस जवानों का महिलाओं संग वीडियो वायरल भी हो रहा है  तो कहीं महिला उत्पीड़न और यौन शोषण जैसे गंभीर आरोप लग रहे हैं.

 

बता दें कि राज्य के जमशेदपुर जिले में एक थानेदार पर सहायक पुलिसकर्मी महिला ने यौन शोषण और छेड़छाड़ का आरोप लगाया था. वहीं पलामू में एक एएसआई का महिला डांसर के साथ आपत्तिजनक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था. इधर गुमला में दो इंस्पेक्टर और एक सब इंस्पेक्टर की आपत्तिजनक तस्वीरें और वीडियो वायरल होने का मामला चर्चा में रहा. इस मामले में एक सब इंस्पेक्टर जेल भी गया, हालांकि फिलहाल वह जमानत पर बाहर हैं.

 

सिर्फ यही ही नहीं, राज्य के कई जिलों में इस तरह के मामले समय-समय पर सामने आते रहे हैं. लेकिन सवाल इस बात को लेकर उठता रहा है कि अधिकतर मामलों में कार्रवाई के नाम पर सिर्फ लाइन हाजिर कर दिया जाता है. कुछ समय बाद संबंधित पुलिसकर्मियों और अधिकारियों को फिर से पोस्टिंग भी मिल जाती है.

 

इन सब मामलों के बाद पुलिस विभाग की कार्यशैली और अनुशासन पर सवाल खड़े कर हो रहे हैं, लोगों का कहना है कि जब कानून का रखवाला ही विवादों में घिर जाएगा, तो आम जनता को न्याय कैसे मिलेगा.

 

कई मामलों में महिला पुलिसकर्मियों और अन्य महिलाओं ने पुलिस पदाधिकारियों पर मानसिक प्रताड़ना और यौन शोषण तक के आरोप लगाए. लेकिन कार्रवाई के नाम पर अक्सर सिर्फ लाइन हाजिर या विभागीय जांच की औपचारिकता ही देखने को मिली. यही वजह है कि अब पुलिस विभाग की निष्पक्षता और सख्ती दोनों पर सवाल उठने लगे हैं.

 

सूत्रों की मानें तो कुछ मामलों को दबाने की कोशिश भी हुई, लेकिन सोशल मीडिया के दौर में अब हर मामला तेजी से जनता तक पहुंच जाता है. वायरल वीडियो और चर्चाओं ने पुलिस महकमे की छवि को गहरा नुकसान पहुंचाया है.

 

सिर्फ यही नहीं, राज्य के कई जिलों में इस तरह के मामले समय-समय पर सामने आते रहे हैं. लेकिन सवाल इस बात को लेकर उठता रहा है कि अधिकतर मामलों में कार्रवाई के नाम पर सिर्फ लाइन हाजिर कर दिया जाता है. कुछ समय बाद संबंधित पुलिसकर्मियों और अधिकारियों को फिर से पोस्टिंग भी मिल जाती है.

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