भागवत ने कहा, सनातन धर्म ही हिंदू राष्ट्र है, 15 साल में देश फिर से अखंड भारत होगा
ग्रामीण जीविका के लिए पूर्ण रूप से जंगल पर आश्रित हैं.
ग्रामीण महिलाएं सुबह-शाम जंगल जाती है और वहां से महुआ चुनकर उसे बाजार में बेच रही है. जिसे महिलाओं के दो वक्त के भोजन का जुगाड़ हो जा रहा है. ग्रामीणों ने बताया कि महिलाएं रोजाना जंगल जाकर महुआ चुन कर 200 से 300 रूपये की आमदनी कर रही है. वहीं गांव के अधिकांश ग्रामीण जीविका के लिए पूर्ण रूप से जंगल पर आश्रित हैं. इसे भी पढ़ें - गृह">https://lagatar.in/jharkhand-news-ranchi-news-school-teachers-and-principals-will-be-able-to-move-to-home-districts-cm-jharkhand-migrant-workers-accident-fund/">गृहजिलों में स्थानांतरित हो सकेंगे स्कूली शिक्षक और प्रिंसिपल, बना ‘सीएम झारखंड प्रवासी श्रमिक दुर्घटना कोष’
पर्यावरण संरक्षण को लेकर ग्रामीण सतर्क
लोगों ने बताया कि महुआ का सीजन खत्म होते ही केन्दुपत्ता और भेलवा तोड़कर बाजार में बेचकर परिवार का भरण पोषण करते हैं. इसी कारण पर्यावरण संरक्षण को लेकर ग्रामीण सतर्क हैं. गोमिया ,बेरमो,कसमार के जंगलों में प्रकृति ने कई ऐसे चीजों को अपने आंचल में समेटे हुए हैं जो झारखंडियों का सहारा बने हुए हैं. इसे भी पढ़ें - लोहरदगा">https://lagatar.in/jharkhand-news-lohardaga-some-youths-stopped-the-loudspeaker-playing-at-the-religious-place-the-police-made-the-matter-quiet/">लोहरदगा: धार्मिक स्थल पर बज रहे लाउडस्पीकर को कुछ युवकों ने कराया बंद, पुलिस ने कराया मामला शांत [wpse_comments_template]

Leave a Comment