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Jharkhand News: DMF फंड का उपयोग कर खनन क्षेत्रों में लाया जा सकता बदलाव

झारखंड सरकार की टास्क फोर्स-सस्टेनेबल जस्ट ट्रांजिशन और सीड ने शुक्रवार को रिपोर्ट जारी किया. जिसमें कहा गया कि डिस्ट्रिक्ट मिनरल फाउंडेशन (DMF) को सिर्फ खनन प्रभावित क्षेत्रों में मुआवजा और बुनियादी सुविधाओं तक सीमित न रखकर जस्ट ट्रांजिशन के रणनीतिक वित्तीय साधन के रूप में इस्तेमाल किया जाना चाहिए.
 

Ranchi: झारखंड सरकार की टास्क फोर्स-सस्टेनेबल जस्ट ट्रांजिशन और सीड ने शुक्रवार को रिपोर्ट जारी किया. जिसमें कहा गया कि डिस्ट्रिक्ट मिनरल फाउंडेशन (DMF) को सिर्फ खनन प्रभावित क्षेत्रों में मुआवजा और बुनियादी सुविधाओं तक सीमित न रखकर जस्ट ट्रांजिशन के रणनीतिक वित्तीय साधन के रूप में इस्तेमाल किया जाना चाहिए. 


रिपोर्ट के मुताबिक, अप्रैल 2026 तक झारखंड में डीएमएफ के तहत 18,231 करोड़ रुपए जमा हुए हैं, जो देश के कुल संग्रह का 16.3% है. राज्य में डीएमएफ राजस्व का करीब 69% हिस्सा कोयला क्षेत्र से आता है. वहीं 8,434 करोड़ रुपए अब भी पड़े हैं. रिपोर्ट में बताया गया कि धनबाद, पश्चिमी सिंहभूम, चतरा, रामगढ़, बोकारो और हजारीबाग के पास कुल फंड का 77.8% हिस्सा है.


विशेषज्ञों ने डीएमएफ के जरिए रोजगार, कौशल विकास, आर्थिक विविधीकरण, सामाजिक सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण पर निवेश बढ़ाने की जरूरत बताया है और बेहतर योजना और पारदर्शिता से खनन प्रभावित जिलों में लंबे समय तक विकास किया जा सकता है. 


वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के सचिव अबुबकर सिद्दीकी पी. ने कहा कि डीएमएफ स्थानीय स्तर पर दीर्घकालिक सामाजिक-आर्थिक बदलाव का प्रभावी माध्यम बन सकता है. यदि इसका उपयोग केवल बुनियादी ढांचे तक सीमित न रखकर रणनीतिक रूप से किया जाए, तो खनन प्रभावित जिलों में जस्ट ट्रांजिशन की तैयारी मजबूत होगी.


टास्क फोर्स के अध्यक्ष ए.के. रस्तोगी ने कहा कि प्रधानमंत्री खनिज क्षेत्र कल्याण योजना (PMKKKY) के संशोधित दिशा-निर्देश डीएमएफ की भूमिका को और सशक्त बनाते हैं. आर्थिक विविधीकरण, आजीविका संवर्धन, ऊर्जा योजना और पर्यावरणीय रूप से टिकाऊ विकास में डीएमएफ की महत्वपूर्ण भूमिका हो सकती है. खनन निदेशक राहुल कुमार सिन्हा ने कहा कि डीएमएफ को भविष्य उन्मुख और स्थानीय जरूरतों पर आधारित विकास के साधन के रूप में विकसित किया जाना चाहिए, ताकि समुदायों को आत्मनिर्भर बनाया जा सके.


मौकै पर ममता कुमारी, अध्यक्ष, जिला परिषद, चतरा से अर्पित शर्मा, सीईओ, स्किल काउंसिल फॉर ग्रीन जॉब्स, राम बाबू प्रसाद, एडवाइजर, एनटीपीसी माइनिंग लिमिटेड, सौमित्र सिंह (विषेशज्ञ)  अरविन्द कुमार ठाक (डायरेक्टर-रिसर्च, सीड), सृष्टि पल्लव (डायरेक्टर, पॉलिसी एवं पार्टनशिप, सीड) और श्वेता चौधरी (मैनेजर-पॉलिसी, सीड) प्रमुख थे.

 

 

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