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देवघर रोप-वे हादसा : 45 घंटे चला रेस्क्यू ऑपरेशन, 46 लोगों को निकाला गया सुरक्षित, 3 की मौत

Deoghar : देवघर रोप-वे हादसे में लगभग 45 घंटे तक रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया गया. जिसमें 46 लोगों को सुरक्षित निकाला गया है. जबकि रेस्क्यू के दौरान दो लोगों की मौत हो गयी है. 45 घंटे के इस ऑपरेशन में इंडियन एयरफोर्स समेत आइटीबीपी व सेना और एनडीआरएफ के साथ स्थानीय लोग भी लगे हुए थे. मंगलवार को लगभग 14 लोगों को सुरक्षित निकाला गया है. जबकि  सोमवार को 32 को निकाला गया था.बता दें कि मंगलवार को रेस्क्यू के दौरान एक महिला डेढ़ हजार फीट नीचे गिर गयी थी. जिससे उसकी मौत हो गयी. महिला की पहचान छठी लाल साह की पत्‍नी शोभा देवी के रुप में हुई है. इसे भी पढ़ें - रांची">https://lagatar.in/in-ranchi-the-heat-broke-the-record-of-56-years-yellow-alert-do-not-leave-the-house-from-12-to-4-oclock/">रांची

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सोमवार को भी रेस्क्यू के दौरान एक व्यक्ति की मौत हुई थी 

बता दें कि यह हादसा रविवार की शाम 5 बजे हुआ था.  जहां रविवार  को त्रिकुट पहाड़ पर बने रोप-वे का तार टूट गया था. तार टूटने के बाद रोप-वे के 18 झूलों में करीब 54 लोग हवा में ही फंस गये थे. तार टूटने की घटना में एक पर्यटक की मौत हो गई थी, जबकि कई घायल हो गये थे. घायलों का इलाज सदर अस्पताल में चल रहा है. सोमवार को सेना की टीम मौके पर पहुंची और रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया. सोमवार को रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान रमेश मंडल नामक व्यक्ति के बेल्ट टूट जाने से वो खाई में गिर गया. जिससे उसकी मौत हो गयी. इसे भी पढ़ें - गौतम">https://lagatar.in/gautam-adanis-wealth-grew-like-a-rocket-rose-to-the-sixth-position-far-ahead-of-mukesh-ambani/">गौतम

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समुद्र तल से 2470 फीट की उंचाई तक जाता है रोप-वे

देवघर का त्रिकुट पहाड़ झारखंड के रोमांचक पर्यटन स्थल में से एक है. इस पहाड़ पर आप ट्रेकिंग, रोपेवे, वन्यजीवन एडवेंचर्स की जाती है. रोप-वे के जरिये चढ़ाई करते वक्त पहाड़ी पर घने जंगल में प्रसिद्ध त्रिकुटाचल महादेव मंदिर और ऋषि दयानंद की आश्रम मिलता है. यह एक ट्रायकिट हिल्स है. जिसमें  तीन चोटियां हैं और सबसे उंची चोटी समुद्र तल से 2470 फीट की ऊंचाई तक जाती है. और जमीन से लगभग 1500 फीट की उंचाई पर लोग ट्रेकिंग का आनंद लेते हैं. तीनों चोटियों में से केवल दो को ही ट्रेकिंग के लिए सुरक्षित माना गया है. चूंकि तीसरी चोटी पर बहुत ज्यादा ढलान है. इस कारण इसे ट्रेकिंग के लिये सुरक्षित नहीं माना जाता है. रोप-वे के जरिये पर्यटक मुख्य चोटी के शीर्ष पर पहुंच जाते हैं. पहाड़ की चोटी एक बड़ा सा मैदान जैसा है. जहां लोग कुछ दूर रूकते हैं. खाते-पीते हैं और वापस रोप-वे के जरिये लौट आते हैं. इसे भी पढ़ें - 1">https://lagatar.in/personnel-in-preparation-for-taking-off-cms-announcement-of-20000-appointments-in-1-month-department-wise-information-being-sought/">1

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