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IAS पूजा सिंघल के जलवेः MLA से लेकर ब्यूरोक्रेट्स तक इनके कायल! गबन के 16 FIR, फिर भी मिली क्लीन चिट

Pravin Kumar Ranchi: आईएएस पूजा सिंघल जहां और जिस पद पर रहीं वहां उनका जलवा रहा. इसकी बदौलत वो हमेशा महत्वपूर्ण पदों पर बनी रहीं. पद पर रहते हुए की गई अनियमितता पर झारखंड की सभी सरकारों ने आंखें बंद ली. 15 नवंबर 2000 को गठित झारखंड के अंदर अब तक 5 विधानसभा चुनाव हुए हैं. 2019 में 5वीं बार राज्य में चुनाव संपन्न हुआ. झारखंड">https://lagatar.in/jharkhand-news/">झारखंड

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इसमें झामुमो, कांग्रेस और राजद ने मिलकर सरकार बनाई और हेमंत सोरेन मुख्यमंत्री बने. 21साल पुराने इस राज्य में 11 बार मुख्यमंत्री बदले. कुल 6 मुख्यमंत्रियों ने अब तक सरकार चलाई है. 2019 तक आजसू पार्टी हर सरकार में सत्ता की साझेदार रही. 22 साल में सत्ता के साझेदर अलग-अलग समय पर बीजेपी, आजसू पार्टी, समता पार्टी,जेडीयू, झामुमो, राजद, कांग्रेस रही. लेकिन किसी भी सरकार ने भ्रष्ट आईएएस अधिकारियों के खिलाफ एक्शन नहीं लिया. आईएएस पूजा सिंघल के जलवों के कायल सत्ताधारी दल के विधायकों के साथ-साथ विपक्ष के विधायक भी रहे. यह बात 2011 की है. विधानसभा में सुदेश कुमार महतो ने विधानसभा मे कहा था कि सरकार 2 दिन में रिपोर्ट मंगा कर कार्रवाई करेगी. पर की नहीं. इसे भी पढ़ें-नहीं">https://lagatar.in/bihars-famous-homeopath-doctor-b-bhattacharya-mourning-in-the-medical-world/">नहीं

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2011 में विधानसभा में माले विधायक विनोद सिंह ने आईएएस पूजा सिंघल के चतरा डीसी रहते हुए मनरेगा में हुई अनियमितता का मामला उठाया था और सरकार से कार्रवाई की मांग की थी. विधायक ने कहा कि पूजा सिंघल उस वक्त चतरा मे पदस्थापित थीं, अभी वह पलामू में उपायुक्त हैं. खूंटी उपायुक्त रहते उनपर मनरेगा में घोटाला करने का आरोप भी लगा. उन्होंने मांग की कि तत्कालीन उपायुक्त को निलंबित कर एफआईआर दर्ज कराया जाये. स्पीकर ने भी साथ दिया था और निगरानी जांच करने की वकालत की थी. इसपर मंत्री सुदेश कुमार महतो ने विधानसभा में कहा था सरकार 2 दिन में रिपोर्ट मांग कर कार्रवाई करेगी. लेकिन सुदेश कुमार महतो ने विधानसभा सत्र के बाद पूरे मामले पर कुछ नहीं किया.

2014 में जब IAS पूजा सिंघल मामले में सवाल सूचीबद्ध था तब विधानसभा सत्र हो गया स्थगित

इसे संयोग ही कहेंगे या कुछ और स्पष्ट रूप से कुछ प्रमाणित नहीं किया जा सकता. लेकिन यह सत्य है कि 2014 में निरसा विधायक अरूप चटर्जी का सवाल विधानसभा के बजट सत्र में दूसरे नंबर पर सूचीबद्ध था. जिसमें पूजा सिंघल पर कार्रवाई करने के सवाल पर चर्चा की जानी थी. लेकिन सवाल आने से ठीक पहले ही विधानसभा में हो-हल्ला होने लगा. पलामू के कई विधायक इस हो-हल्ला में शामिल थे. इसमें सत्ता और विपक्ष के विधायक दोनों थे. इस सवाल से पहले विधायक प्रदीप यादव का सवाल था. जिस पर चर्चा खत्म हो गई थी. लेकिन बाद में कई विधायक हंगामा करते नजर आए. इसके बाद विधानसभा स्थगित कर दी गई. पूजा सिंघल के गबन पर चर्चा विधानसभा में नहीं हो सकी. इसे भी पढ़ें-BIG">https://lagatar.in/big-breaking-jewelery-worth-rs-40-lakh-looted-at-gunpoint-in-bokaro/">BIG

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प्रमंडलीय आयुक्त की जांच रिपोर्ट के बल पर सरकार ने फिर बनाई नई जांच कमिटी

प्रमंडलीय आयुक्त नितिन मदन कुलकर्णी ने पूजा सिंघल की संलिप्तता को माना. सरकार ने प्रमंडलीय आयुक्त नितिन मदन कुलकर्णी की जांच रिपोर्ट पर कार्रवाई न करने की मंशा से पुनः एक और कमेटी का गठन किया. इस कमेटी की रिपोर्ट के बाद मनरेगा योजना में किए गए गबन को लेकर पूजा सिंघल को दोषी नहीं पाया गया. उन्हें दोष मुक्त कर दिया गया. [pdfjs-viewer url="https://lagatar.in/wp-content/uploads/2022/05/121.pdf"

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खूंटी मामले में भी कर दी गईं आरोप मुक्त

पूजा सिंघल तत्कालीन डीसी खूंटी के विरुद्ध विभागीय ज्ञापन संख्या 2588-13 मार्च 2014 के द्वारा उपायुक्त खूंटी के रूप में पदस्थापन अवधि में बरती गई अनियमितता के लिए आर्टिकल ऑफ चार्जेस इंप्यूटेशन ऑफ मिसकंडक्ट एवं मिसबिहेवियर और साक्ष्यों की तालिका निर्गत की गई थी. जिसमें पूर्व के अग्रिम कुल 15 करोड़ 72 लाख रुपये के समायोजन के बिना ही विभिन्न तिथियों में 10 करोड़ पांच लाख अग्रिम राशि की निकासी की गई. निलंबित कनीय अभियंता विनोद प्रसाद सिन्हा से कार्य लिया गया. जिले में 16 प्राथमिकी दर्ज की गई. पूजा सिंघल पर फर्जी कार्यों की स्वीकृति देने के मामले में कार्मिक विभाग ने संकल्प संख्या 2656 के द्वारा पूजा सिंघल के विरुद्ध विभागीय कार्यवाही के संचालन के लिए अमरेंद्र प्रताप सिंह को संचालन पदाधिकारी नियुक्त किया. इस विभागीय कार्रवाई में उपस्थित पदाधिकारी के रूप में उपायुक्त को स्थापन पदाधिकारी नियुक्त किया गया. अमरेंद्र प्रताप सिंह द्वारा विभागीय कार्रवाई के संचालन के उपरांत जांच प्रतिवेदन समर्पित किया गया. इसमें पूजा सिंघल के विरुद्ध गठित सभी आरोपों को प्रमाणित नहीं माना गया और आरोपों से मुक्त करते हुए उनके विरुद्ध चलाई जा रही विभागीय कार्रवाई को समाप्त करने का निर्णय लिया. कार्मिक विभाग का आदेश, 27 फरवरी 2017 को रघुवर सरकार में जारी हुआ था. बता दें कि खूंटी में हुई अनियमितता को लेकर राजभवन के समक्ष भी धरना दिया गया था. वहीं प्रधानमंत्री कार्यालय में भी अनियमितता के तथ्यों को भेजते हुए शिकायत की गई थी. जिसपर पीएम कार्यालय की ओर से जांच कर कार्रवाई करने की बात कही गई थी. इसे भी पढ़ें- IAS">https://lagatar.in/ias-pooja-singhal-case-ed-is-interrogating-husband-abhishek-jha-and-ca-suman/">IAS

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