- - 8 साल में 3383 किमी बढ़ी सड़कों की लंबाई, पर नेशनल एवरेज से 311 किमी पीछे है राज्य
Ranchi: झारखंड में पिछले आठ वर्षों (2018-2026) के दौरान सड़कों की कुल लंबाई 11,709 किमी से बढ़कर 15,092 किमी तक पहुंच गई है. हालांकि, जब इस विस्तार की तुलना राष्ट्रीय मानकों से होती है, तो झारखंड का सड़क नेटवर्क अभी राष्ट्रीय औसत के आधे से भी कम है. आंकड़ों के मुताबिक, झारखंड में प्रति 1000 वर्ग किमी क्षेत्रफल पर सड़कों का जाल (सड़क घनत्व) मात्र 189.36 किमी है, जबकि पूरे भारत का औसत 500.84 किमी है. सड़क घनत्व का सीधा मतलब यह है कि राज्य के कुल क्षेत्रफल के अनुपात में वहां कितनी सड़कें उपलब्ध हैं.
नेशनल हाईवे में देश से आगे
हालांकि झारखंड ने नेशनल हाईवे (NH) के निर्माण में देश के औसत को पीछे छोड़ दिया है. राज्य में नेशनल हाईवे का घनत्व 43.91 है, जो राष्ट्रीय औसत 40.20 किलोमीटर से बेहतर है. यानी मुख्य शहरों को जोड़ने वाले बड़े रास्तों का काम तो तेजी से हुआ है, लेकिन असली समस्या उन सड़कों की है जो गांवों को जिलों से जोड़ती हैं. राज्य सरकार के अधीन आने वाली इन आंतरिक सड़कों की कमी के कारण ही सुदूर इलाकों में रहने वाली आबादी को मुख्य रास्तों तक पहुंचने में आज भी मुश्किल होती है.
आबादी के अनुपात में सड़कों का विस्तार कम
क्षेत्रफल के अलावा आबादी के लिहाज से भी झारखंड को अभी लंबा सफर तय करना है. आंकड़ों के अनुसार, देश में हर एक लाख की आबादी पर औसतन 11 किमी हाईवे उपलब्ध है, लेकिन झारखंड में यह आंकड़ा केवल 8.62 किमी ही है. स्पष्ट है कि राज्य की आबादी जिस तेजी से बढ़ रही है, उस अनुपात में सड़कों का जाल नहीं बिछ पाया है.
आम जनजीवन पर असर
सड़कों के इस कमजोर जाल का सीधा असर आम नागरिकों के जीवन पर पड़ रहा है. सड़कों की पहुंच कम होने की वजह से गांवों से अस्पतालों, बाजारों और स्कूलों तक पहुंचने के लिए लोगों को लंबा और कठिन सफर तय करना पड़ता है. कनेक्टिविटी की इस कमी के कारण न केवल आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाएं समय पर नहीं पहुंच पाती हैं, बल्कि किसानों को अपनी उपज मंडियों तक ले जाने में भारी लागत और समय का नुकसान उठाना पड़ता है. जब तक राज्य के सड़कों के घनत्व में सुधार नहीं होगा, तब तक ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देना एक बड़ी चुनौती बना रहेगा.
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