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रांचीः दो साल बाद लगेगा जगन्नाथपुर मेला, नए रूप और आकार में दिखेगा रथ, तैयारी शुरू

Syed Shahroz Quamar Ranchi: पुरी से लगभग 533 किलीमीटर दूर रांची में भी भगवान जगन्नाथ के दर्शन कर सकते हैं. पुरी मंदिर सा ही वास्तुशिल्प. यहां पूजा से लेकर भोग चढ़ाने का विधि-विधान भी पुरी जगन्नाथ मंदिर जैसा ही है. जगन्नाथपुर पहाड़ी पर स्थित मंदिर का कलश गगन को चूमता हुआ दिखता है. चारों ओर फैले ऊंचे पेड़ों की हरियाली. मंद-मंद बहती आध्यात्मिक बयार. अलौकिक शांति. हर साल यहां के एक किलोमीटर के दायरे में मेला लगता रहा है. लेकिन कोरोना के कारण ऐसा न हो सका. ट्रस्ट ने इस बार की पूजा और मेले को यादगार बनाने का निर्णय लिया है. इस वर्ष ऐतिहासिक रथयात्रा आषाढ़ शुक्ल पक्ष द्वितीया तिथि दिनांक 1 जुलाई को संपन्न होगी. https://lagatar.in/wp-content/uploads/2022/04/RATH-1.jpg"

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रथ की ऊंचाई 20 से बढ़ाकर 30 फीट करने की योजना

जगन्नाथपुर मंदिर न्यास समिति के प्रथम सेवक सह उपाध्यक्ष ठाकुर नवीन नाथ शाहदेव ने बताया है कि समिति ने रथ के जीर्णोद्धार कराने का निर्णय लिया है. इसे बिल्कुल नए रूप में ढाला जाएगा. सूत्रों के मुताबिक, 20 फीट चौड़े और 20 फीट ऊंचे रथ की ऊंचाई भी 30 फीट करने की योजना है. कारीगरों से बातचीत हो गई है. ट्रस्ट की बैठक में मुहर लगनी बाकी है. शाहदेव के अनुसार, रामकृष्ण मिशन टीवी सेनेटोरियम तुपुदाना के सचिव महाराज की ओर से 100 सीएफटी साल की लकड़ी रथ बनाने के लिए दी जा रही है. रथ बनाने में कुल 221 सीएफटी साल की लकड़ी की जरूरत पड़ेगी. इसे भी पढ़ें-Corona">https://lagatar.in/corona-second-case-of-xe-variant-in-mumbai-peoples-concern-increased/">Corona

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रथ निर्माण हेतु श्रीजगन्नाथ पुरी उड़ीसा से रथ बनाने वाले मिस्त्री को साथ लेकर दशरथ महाराणा 12 अप्रैल को रांची पहुंच रहे हैं. मंदिर के रंग रोगन के लिए अरुण कुमार सिन्हा ने पेंट यथाशीघ्र उपलब्ध करा देने का आश्वासन दिया है.

सामाजिक संगठनों से मदद की अपील,  14 अप्रैल को ट्रस्ट की बैठक

नये रथ के निर्माण के लिए कुछ सामाजिक संस्थानों का सहयोग अपेक्षित है. इस संबंध में 14 अप्रैल को दिन के 11:00 बजे मंदिर प्रांगण में बैठक रखी गई है. वहीं मारवाड़ी सहायक समिति रांची, झारखंड टिंबर ट्रेडर्स एसोसिएशन रांची , अग्रवाल सभा , महेश्वरी सभा , दिगंबर जैन पंचायत, मारवाड़ी ब्राह्मण सभा, पंजाबी हिंदू बिरादरी समिति, गुरुद्वारा गुरु सिंह सभा,कृष्ण से वाधाम ट्रस्ट ,हनुमान मंडल रांची, श्याम मंडल रांची, श्याम मित्र मंडल रांची, झारखंड प्रांतीय मारवाड़ी समिति, बंगाली समाज , उड़िया समाज, गुजराती समाज , फेडरेशन झारखंड ऑफ कॉमर्स रांची , चेंबर ऑफ कॉमर्स रांची , पंडरा बाजार समिति रांची , थोक वस्त्र विक्रेता संघ, खंडेलवाल सभा, ओसवाल सभा, सोना चांदी व्यवसाई समिति, होटल व्यवसाई, बिल्डर्स एसोसिएशन रांची आदि संगठनों से ट्रस्ट ने सहयोग की अपील की है.

1691 में बड़कागढ़ के राजा ने कराया था मंदिर का निर्माण

मंदिर का निर्माण 25 दिसंबर 1691 को बड़कागढ़ के राजा ठाकुर ऐनी नाथ शाहदेव ने कराया था. 1976 में मंदिर ट्रस्ट बना. तब से वही देखरेख कर रहा है. 6 अगस्त, 1990 को अचानक इस मंदिर का एक हिस्सा टूट गया था. भगवान को कई दिनों तक बरामदे में विश्राम कराना पड़ा. लेकिन 1991 में बिहार सरकार और श्रद्धालुओं के सहयोग से मंदिर का जीर्णोद्धार करवाया गया. इसे भी पढ़ें-शौर्य">https://lagatar.in/shaurya-diwas-commandant-honored-officers-and-jawans-who-received-gallantry-award-at-raf-premises/">शौर्य

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