Ranchi : झारखंड में सामने आए ट्रेजरी घोटाले को लेकर सियासत तेज हो गई है. नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र लिखकर पूरे मामले की सीबीआई जांच कराने की मांग की है. मरांडी ने इस घोटाले को राज्य के सबसे बड़े वित्तीय घोटालों में से एक बताते हुए कहा है कि अगर समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो यह मामला बिहार के चर्चित चारा घोटाले जैसी स्थिति पैदा कर सकता है.
बाबूलाल मरांडी ने अपने पत्र में कहा है कि यह मामला सिर्फ वित्तीय गड़बड़ी नहीं बल्कि संगठित भ्रष्टाचार का बड़ा उदाहरण है. उन्होंने दावा किया कि शुरुआत में यह मामला केवल बोकारो और हजारीबाग तक सीमित माना जा रहा था, लेकिन अब यह राज्य के 14 जिलों तक फैल चुका है.
बाबूलाल के अनुसार हजारीबाग, बोकारो, पलामू, गढ़वा, रांची, रामगढ़, देवघर, जमशेदपुर और साहिबगंज समेत कई जिलों के कोषागारों से लगभग 130 करोड़ रुपये की अवैध निकासी की पुष्टि सामने आ रही है.
उन्होंने कहा कि बोकारो में गिरफ्तार लेखापाल कौशल पांडे को मुख्य आरोपी बताया जा रहा है, लेकिन इतनी बड़ी हेराफेरी कोई अकेला व्यक्ति नहीं कर सकता. उन्होंने बोकारो में उस समय पदस्थापित अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठाया है. मरांडी ने कहा कि बोकारो में पहले 4.5 करोड़ रुपये की अवैध निकासी की बात सामने आई थी, लेकिन अब यह राशि बढ़कर 16 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है.
हजारीबाग मामले का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि वहां अवैध निकासी की राशि 8 करोड़ रुपये से बढ़कर करीब 30 करोड़ रुपये तक पहुंच चुकी है. उन्होंने आरोप लगाया कि इस मामले में सिपाही शंभू कुमार चौधरी और पंकज कुमार उर्फ धीरेंद्र सिंह की मुख्य भूमिका सामने आई है. बाबूलाल ने दावा किया कि अवैध कमाई से रिश्तेदारों के नाम पर करोड़ों रुपये की संपत्ति खरीदी गई है.
पत्र में यह भी कहा गया है कि जांच के दौरान यह चौंकाने वाली जानकारी सामने आई कि पुलिस विभाग में असमय मौत का शिकार हुए कर्मियों के आश्रितों के खातों का दुरुपयोग किया गया. इन खातों के जरिए अवैध निकासी कर रकम को रिश्तेदारों के खातों में ट्रांसफर किया गया.
बाबूलाल ने पूरे मामले में JAP-IT की भूमिका की भी निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है. उन्होंने कहा कि ई-कुबेर प्रणाली में हुई कथित गड़बड़ी और तकनीकी हेराफेरी की भी जांच जरूरी है.
उन्होंने यह भी कहा कि जिलों में पुलिस प्रशासन के खर्च की निगरानी की जिम्मेदारी डीएसपी मुख्यालय और एसपी की होती है. ऐसे में उनकी भूमिका की भी गहन जांच होनी चाहिए.
बाबूलाल ने सरकार को याद दिलाया कि ऊर्जा विभाग में कथित करीब 100 करोड़ रुपये, पर्यटन विभाग में करीब 10 करोड़ रुपये और पेयजल एवं स्वच्छता विभाग में करीब 23 करोड़ रुपये की अवैध निकासी के मामले सामने आ चुके हैं.
अंत में बाबूलाल मरांडी ने मांग की कि पूरे मामले की जांच तत्काल सीबीआई को सौंपी जाए ताकि निष्पक्ष जांच हो सके, सच्चाई सामने आए और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई हो सके.
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