alt="" width="1599" height="1578" /> हिरेंद्र बिरूआ, चिकित्सा अधीक्षक रिम्स[/caption] [caption id="attachment_371074" align="aligncenter" width="853"]
alt="" width="853" height="1280" /> डॉ मनोज कुमार, माइक्रोबायोलॉजी, रिम्स[/caption]
विभिन्न विभागों के डॉक्टरों के साथ हुई बैठक
वहीं रिम्स के चिकित्सा अधीक्षक डॉ हिरेंद्र बिरुआ ने कहा कि देश के कुछ राज्यों में मंकीपॉक्स के मामले सामने आने का बाद रिम्स भी अलर्ट पर है. उन्होंने कहा कि अपर मुख्य सचिव का आदेश मिलने के बाद रिम्स के स्किन, पीडियाट्रिक, मेडिसिन और पीएसएम विभाग के डॉक्टरों के साथ बैठक की गयी. डेंगू वार्ड में एक कमरे को चिन्हित कर पांच बेड का आइसोलेशन वार्ड तौयार करने का निर्देश दिया गया है. ताकि राज्य में मंकीपॉक्स के संदिग्ध मरीज मिलने का बाद उन्हें यहां भर्ती कर सैंपल की जांच के लिए पुणे भेजा जा सके. रिपोर्ट आने की अवधि तक मरीज को यहां चिकित्सकों की निगरानी में रखा जाएगा. इसे भी पढ़ें- बिहार">https://lagatar.in/6th-jpsc-after-wednesday-in-the-supreme-court-the-hearing-will-continue-on-thursday-know-what-happened-today/">बिहार: आतंकी गुट जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े सीवान के 4 संदिग्ध युवकों पर एनआईए की नजर
मंकीपॉक्स के संदिग्धों की जांच का तरीका अलग
वहीं माइक्रोबायोलॉजी विभाग के चिकित्सक डॉ मनोज कुमार ने कहा कि मंकीपॉक्स, चिकेन पॉक्स और स्मॉल पॉक्स के जैसा ही है. उन्होंने कहा कि इसकी जांच पूरे देश भर में सिर्फ एनआईवी लैब पुणे में हो रही है. संदिग्धों की जांच के लिए सैंपल कलेक्शन का तरीका अलग-अलग है. स्किन, गले का स्वाब और ब्लड तीनों सैंपल लेने के बाद कोल्ड चैन मेंटेन करते हुए जांच के लिए भेजना है. मंकीपॉक्स के क्या हैं लक्षण- बुखार, सिरदर्द, मांसपेशी में दर्द, पीठ दर्द, थकान महसूस होना, लिर्फ नोड में सुजन और शरीर में चकते, जो तीन सप्ताह तक रह सकते हैं.
- संक्रमित मरीज के खांसने, छींकने से निकलने वाले ड्रॉपलेट्स से यह वायरस दूसरे व्यक्ति में फैलता है. साथ ही संक्रमित व्यक्ति के कपड़े से भी फैलता है.
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