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झारखंड : 2.5 साल बाद ट्रेनिंग, बिना प्रशिक्षण दिए ही कर दी गई थी तैनाती

 
Shubham Kishor Ranchi : झारखंड का खेल विभाग पिछले लगभग ढाई साल से अनट्रेंड जिला खेल पदाधिकारियों के भरोसे चल रहा था. इन पदाधिकारियों को तैनाती तो दे दी गई थी, लेकिन आधिकारिक प्रशिक्षण नहीं दिया गया था. इसकी सबसे बड़ी वजह यह थी कि इनके प्रशिक्षण की व्यवस्था और मापदंड ही तैयार नहीं हो सके थे. अब प्रशिक्षण की व्यवस्था भी हो चुकी है और इसके लिए मापदंड भी तैयार किए जा चुके हैं. अत: सरकार सभी जिला खेल पदाधिकारियों को प्रशिक्षण देने जा रही है. यह प्रशिक्षण 54 दिनों का होगा. बता दें कि झारखंड के 24 जिलों में से 20 जिलों में ही जिला खेल पदाधिकारी तैनात किए गए हैं. चार जिला पदाधिकारियों की और आवश्यकता है. अभी ये चार जिले अतिरिक्त प्रभार की भरोसे चल रहे हैं. बता दें कि जिले में होने वाली विभिन्न प्रकार की खेल गतिविधियां इन्हीं खेल पदाधिकारियों के माध्यम से संचालित की जाती हैं जिसके लिए इनका प्रशिक्षित होना अनिवार्य होता है. झारखंड में जिला खेल पदाधिकारियों की यह पहली नियुक्ति थी.

अक्टूबर 2020 को सीएम ने दिए थे नियुक्ति पत्र

जिला खेल पदाधिकारियों की नियुक्ति प्रक्रिया झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) के माध्यम से की गई थी. जेपीएससी से जो भी अभ्यर्थी चयनित होकर आते हैं, उनकी ट्रेनिंग कार्मिक विभाग द्वारा श्री कृष्ण लोक प्रशासन संस्थान रांची में होती है. 8 अक्टूबर 2020 को सीएम हेमंत सोरेन ने चयनित खेल पदाधिकारियों को नियुक्ति पत्र सौंपा था. नियुक्ति पत्र देने के साथ ही उनका पदस्थापन भी कर दिया गया था. अब ढाई साल बाद सरकार ने सभी डीएसओ के लिए संस्थागत प्रशिक्षण लेना अनिवार्य कर दिया है.

17 अप्रैल से शुरू होगी ट्रेनिंग

17 अप्रैल से सभी 20 जिला खेल पदाधिकारियों को 54 दिनों के लिए श्री कृष्ण लोक प्रशासन संस्थान रांची में प्रशिक्षण दिया जाएगा. इस संबंध में विभाग की ओर से एक पत्र जारी कर दिया गया है. इसमें कहा गया है कि झारखंड क्रीड़ा संवर्ग (नियुक्ति, प्रोन्नति एवं सेवा शर्त) नियमावली 2015 के कंडिका संख्या 13 (i) में किए गए प्रावधान के आलोक में सभी जिला खेल पदाधिकारियों के लिए संस्थागत प्रशिक्षण लेना अनिवार्य है.

न व्यवस्था थी न मापदंड, इसलिए हुई देरी

झारखंड खेल प्राधिकरण के उपनिदेशक देव शंकर दास ने बताया कि जब भी किसी विभाग में नियुक्ति होती है तो ट्रेनिंग अनिवार्य होती है. चूंकि प्रत्येक जिले के लिए डीएसओ एक नया समवर्ग बनाया गया था, इसलिए इनके प्रशिक्षण की व्यवस्था और मापदंड तैयार नहीं हो सके थे, इसलिए इन्हें प्रशिक्षण नहीं दिया जा सका. इसे भी पढ़ें – झारखंड">https://lagatar.in/jharkhand-load-shedding-increased-due-to-increase-in-demand-in-summer/">झारखंड

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