Ranchi: झारखंड में हुए वेतन घोटाला ट्रेजरी में लागू एकीकृत वित्तीय प्रबंधन प्रणाली (IFMS) की खामियों का परिणाम है. राज्य की 33 ट्रेजरी से होने वाली निकासी पर नियंत्रण रखने और गड़बड़ी से बचने के लिए लागू IFMS के 12 Module के तीन Module में खामियां हैं. इसमें Planning Module, Fund and Debt Management Module और Audit Module शामिल है.
राज्य के ट्रेजरी से वित्तीय लेनदेन के लिए लागू एकीकृत वित्तीय प्रबंधन प्रणाली (IFMS) का खामियों की वजह से गलत भुगतान हो रहा है. आंकड़ों के विश्लेषण से इस बात की जानकारी मिली है कि प्रबंधन प्रणाली का खामियों की वजह से Death-cum-Retirement Gratuity(DCRG) और Commuted Value of Pension(CVP) मद से भी अधिक राशि का भुगतान हुआ है. 344 मामलों में DCRG के रूप में 11 करोड़ रुपये का भुगतान हुआ है. एक ही पेंशनर को दो-दो बार पेंशन का भुगतान हुआ है. एक ही PPO नंबर कई पेंशनरों के भुगतान में पाया गया है.
ट्रेजरी के अपग्रेडेशन के लिए तैयार किये गये डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट में ही खामियां पायी गयी है. राज्य में ट्रेजरी के कंप्यूटराइजेशन के दौरान निकासी और प्रबंधन पर नियंत्रण बनाये रखने के लिए 2007 में कुबेर (KUBER) लागू किया.
इसके बाद से इसे और बेहतर बनाने के लिए 2008 में DDO Level बिल इंट्री, वर्ष 2010 में GPF और 2012 में Fun Module 2012 जोड़ा गया. इस बीच केंद्र सरकार ने भी ट्रेजरी के कंप्यूटराइजेशन में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को आर्थित मदद देने की योजना लागू की. लेकिन लेट लतीफी की वजह से झारखंड को इसका लाभ नहीं मिला.
केंद्रीय वित्त मंत्रालय के Department of Expenditure ने 2010 में ट्रेजरी के कंप्यूटराइजेशन के लिए मिशन मोड प्रोजेक्ट (MMP) लागू किया. साथ ही सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को ट्रेजरी कंप्यूटराइजेशन के लिए तीन साल के अंदर अपना डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट भेजने का निर्देश दिया. इसमें सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से यह जानकारी मांगी गयी कि उनके ट्रेजरी के कंप्यूटराइजेशन का वर्तमान स्तर क्या है. वह अपने ट्रेजरी को किस स्तर तक अपग्रेड करना चाहते है.
झारखंड सरकार ने भी केंद्र सरकार द्वारा शुरू किये गये MMP योजना का लाभ लेने की कोशिश की. ट्रेजरी के कंप्यूटराइजेशन का डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR) तैयार किया. लेकिन केंद्र सरकार द्वारा DPR भेजने के लिए निर्धारित समय सीमा के दो साल बाद राज्य सरकार ने अपना DPR भेजा. राज्य सरकार द्वारा 2015 में भेजे गये DPR को भारत सरकार ने अस्वीकार कर दिया और आर्थिक सहायता नहीं दी.
इसके बाद राज्य सरकार ने अगस्त 2015 में NIC (National Informatics Center) की मदद से ट्रेजरी को अपग्रेड करने का फैसला किया. NIC की मदद से ट्रेजरी को अपग्रेड कर कई मॉड्यूल जोड़ा गया. लेकिन अपग्रेडेशन का काम केंद्र को भेजे गये उसी DPR के अनुरूप किया गया, जिसमें कुछ खामियां थी. इसलिए ट्रेजरी के एकीकृत वित्तीय प्रबंधन प्रणाली में खामियां रह गयीं. फिलहाल झारखंड ट्रेजरी का IMFS 2.0 (KUBER) सिस्टम है. इसमें कुल 12 मोड्यूलस हैं.
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