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पंजाब में फंसा झारखंड का आदिवासी परिवार, बंधुआ जैसी हालत में 16 घंटे काम का आरोप

झारखंड के खूंटी जिला से रोजगार की तलाश में पंजाब गया एक आदिवासी परिवार कथित तौर पर शोषण और बंधुआ जैसी परिस्थितियों में फंस गया है. पीड़ित सनिका पूर्ति ने फोन पर अपनी आपबीती सुनाते हुए आरोप लगाया कि उसे और उसके परिवार को जबरन लंबे समय तक काम कराया जा रहा है और घर लौटने की अनुमति भी नहीं दी जा रही है.
 
  • कम मजदूरी, छुट्टी से इनकार और नवजात की मौत से टूटा परिवार
  • एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट ने शुरू की कार्रवाई

Khunti : झारखंड के खूंटी जिला से रोजगार की तलाश में पंजाब गया एक आदिवासी परिवार कथित तौर पर शोषण और बंधुआ जैसी परिस्थितियों में फंस गया है. पीड़ित सनिका पूर्ति ने फोन पर अपनी आपबीती सुनाते हुए आरोप लगाया कि उसे और उसके परिवार को जबरन लंबे समय तक काम कराया जा रहा है और घर लौटने की अनुमति भी नहीं दी जा रही है.

 

जानकारी के अनुसार, सनिका पूर्ति खूंटी के वीरबांकी थाना क्षेत्र अंतर्गत इचाकुटी गांव का निवासी है. करीब डेढ़ वर्ष पहले वह बेहतर आमदनी की उम्मीद में परिवार के साथ पंजाब गया था, जहां जालंधर जिला के शाहकोट क्षेत्र स्थित एक फार्म हाउस में काम करने लगा. आरोप है कि वहां पहुंचने के बाद से ही वह शोषण के जाल में फंस गया.

 

पीड़ित के अनुसार, उससे रोजाना 15 से 16 घंटे तक काम कराया जाता है. सुबह पशुओं की देखभाल से लेकर देर शाम तक खेतों में मजदूरी करनी पड़ती है, जबकि उसकी पत्नी से घरेलू कार्य कराए जाते हैं. इसके बदले दोनों को मिलाकर बेहद कम पारिश्रमिक दिया जाता है. छुट्टी मांगने पर कथित रूप से अपमानित किया जाता है और गांव लौटने की अनुमति नहीं दी जाती.

 

इस बीच परिवार पर दुखों का पहाड़ तब टूटा जब पंजाब में ही उसकी पत्नी ने जुड़वा बच्चों को जन्म दिया, लेकिन पर्याप्त इलाज के अभाव में एक नवजात की कुछ ही सप्ताह में मौत हो गई. इस घटना ने परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया, बावजूद इसके वे वहां काम करने को मजबूर हैं.

 

पीड़ित ने यह भी बताया कि उसी गांव के अन्य मजदूर भी वहां इसी तरह की परिस्थितियों में काम कर रहे हैं और सभी अपने घर लौटना चाहते हैं, लेकिन रास्ता नहीं मिल पा रहा है. मजदूरी बढ़ाने की मांग भी अनसुनी कर दी जाती है.

 

इधर, मामले की जानकारी एक सामाजिक कार्यकर्ता के माध्यम से प्रशासन तक पहुंची है. इसके बाद एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट ने संज्ञान लेते हुए कार्रवाई शुरू कर दी है. अधिकारियों ने बताया कि जल्द ही टीम गांव जाकर तथ्यों की पुष्टि करेगी और आवश्यक कदम उठाकर परिवार को सुरक्षित वापस लाने का प्रयास किया जाएगा.

 

यह मामला प्रवासी मजदूरों की सुरक्षा और उनके अधिकारों पर गंभीर सवाल खड़ा करता है. रोजगार की तलाश में दूसरे राज्यों में जाने वाले श्रमिकों के लिए ठोस निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था की आवश्यकता एक बार फिर सामने आई है.

 

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