Ranchi: दिल्ली देश का सबसे प्रदूषित शहर बन गया है. लेकिन झारखंड की स्थिति भी कम चिंताजनक नहीं है. पूरे राज्य में हवा का स्तर इतना खराब हो चुका है कि 24 में से 21 जिले राष्ट्रीय PM2.5 मानक से ऊपर पाए गए हैं.
झारखंड क्यों बना प्रदूषण का गढ़?

CREA (Centre for Research on Energy and Clean Air) की रिपोर्ट के मुताबिक, झारखंड के कोयला खदान क्षेत्रों-धनबाद, बोकारो, रामगढ़ और हजारीबाग से निकलने वाला धुआं, जमशेदपुर और चांडिल की फैक्ट्रियों का प्रदूषण, साथ ही लातेहार, सिमडेगा और पश्चिमी सिंहभूम में लगने वाली जंगल की आग ने हवा की गुणवत्ता को बेहद खराब कर दिया है. रांची और आसपास तेजी से बढ़ रहा निर्माण भी PM2.5 स्तर को ऊपर धकेल रहा है.
देशभर की हालत भी गंभीर

अध्ययन बताता है कि भारत के 749 जिलों में से 447 जिले राष्ट्रीय मानक (40 µg/m³) से अधिक प्रदूषण की चपेट में हैं. यानी देश का 60% हिस्सा खराब हवा में सांस ले रहा है. सबसे ज्यादा प्रभावित जिले दिल्ली और असम में पाए गए हैं.
झारखंड का प्रदर्शन बेहद खराब

21 जिलों का मानक से नीचे रहना दिखाता है कि झारखंड भी पंजाब, हरियाणा, त्रिपुरा, मेघालय और जम्मू-कश्मीर की तरह लगभग हर जिले में प्रदूषण सीमा पार कर चुका है. यह स्थिति आने वाले समय के लिए बड़ा खतरा है.
आगे क्या करना होगा?
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर झारखंड को इस संकट से निकलना है तो खनन क्षेत्रों में सख्त उत्सर्जन निगरानी, सभी शहरों में लोकल एयर क्वालिटी सेंसर, ग्रीनर ट्रांसपोर्ट सिस्टम, निर्माण कार्यों में कड़ाई से नियमों का पालन जरूरी है.वरना उद्योगों के विस्तार के साथ प्रदूषण और भी बढ़ सकता है.
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