Search

झारखंड की "हॉट" सीट सिंहभूम, दो महिला दिग्गजों का होगा आमना-सामना

फिलहाल सभी छह विधानसभा सीटों पर है इंडिया गठबंधन का कब्जा 1991 में झामुमो के कृष्णा मार्डी पहुंचे थे लोकसभा Praveen Kumar/Sukesh Kumar Ranchi : कोल्हान की दो लोकसभा सीटों में से एक सिंहभूम लोकसभा हॉट सीट इसलिए हो गया है, क्योंकि यहां दो महिला दिग्गजों के बीच महामुकाबला है. सिंहभूम लोकसभा के लिए 13 मई को वोट डाले जाएंगे. चुनावी अखाड़े में दो महिला उम्मीदवार खड़ी हैं. भाजपा ने निवर्तमान सांसद गीता कोड़ा को चुनाव में उतारा है, वहीं इंडिया गठबंधन की ओर से झामुमो ने हेमंत सरकार में महिला एवं बाल विकास मंत्री रहीं जोबा मांझी पर दांव खेला है. दो महिला उम्मीदवारों के बीच महामुकाबला की वजह से सिंहभूम सीट राज्य भर में चर्चा का विषय बना हुआ है. दोनों महिला उम्मीदवार अपने पति की राजनीतिक विरासत बचाने में जुटी हैं. दोनों उम्मीदवार अपनी-अपनी विधानसभा सीटों पर भी मजबूत पकड़ रखती हैं. सियासी-सामाजिक पकड़ की बात करें, तो झामुमो की जमीनी पकड़ भाजपा से बेहतर नजर आती है. इसका कारण है चाईबासा की सभी छह विधानसभा सीटों पर झामुमो-कांग्रेस का एकतरफा कब्जा है. वहीं आज के दिन भाजपा का किसी भी विधानसभा सीट पर कब्जा नहीं है. हालांकि विधानसभा चुनाव और लोकसभा चुनाव का वोटिंग पैटर्न अलग होता है. हालांकि अभी तक इस लोकसभा सीट के लिए चुनाव प्रचार परवान नहीं चढ़ा है. भाजपा के स्टार प्रचारक पीएम मोदी की रैली नहीं हुई है, देखना होगा कि उनकी इंट्री के बाद कोल्हान के इस सियासी जमीन में कितना बदलाव हो पाता है. वैसे 2019 के लोकसभा चुनाव में चाईबासा में पीएम मोदी की रैली तो हुई थी, लेकिन उसका न तो लोकसभा चुनाव में कोई असर पड़ा था और न विधानसभा चुनाव में ही. पीएम मोदी की रैली के बाद भी भाजपा पिछड़ गयी थी.

हो बहुल लोकसभा क्षेत्र में झामुमो ने खड़ा किया संथाल प्रत्याशी

सिंहभूम लोकसभा सीट पर 2019 की मोदी लहर में भी कांग्रेस प्रत्याशी के रूप में गीता कोड़ा ने जीत का परचम लहराया था. पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा की पत्नी गीता कोड़ा ने इस बार कांग्रेस छोड़ कमल का दामन थाम लिया है. भाजपा ने गीता कोड़ा को ही सिंहभूम से टिकट देकर चुनाव में उतार दिया है. गीता हो जनजाति से आती हैं. सिंहभूम लोकसभा सीट हो बहुल है. लोकसभा क्षेत्र में करीब 56% आबादी हो जनजातियों की है. इसके बाद पिछड़ा वर्ग में कुर्मी- महतो के बाद संथालों की आबादी है. स्थानीय जानकारों का दावा है कि जगन्नाथपुर विधानसभा में निश्चित रूप से मधु कोड़ा की पकड़ मजबूत है, लेकिन उनके सामने इस संभावित लीड को सरायकेला, चाईबासा, मझगांव, मनोहरपुर और चक्रधरपुर विधानसभा में बनाये रखने की चुनौती होगी. गीता कोड़ा की उम्मीदवारी के सहारे इस बार वहां कमल खिलाने का ख्बाव भाजपा का है. गीता कोड़ा की जीत में झामुमो की सियासी जमीन का कितना बड़ा योगदान था, यह भी एक बड़ा सवाल है. इस हालात में देखना दिलचस्प होगा कि झामुमो की इस ताकत के बगैर गीता कोड़ा कितना दम-खम दिखला पाती हैं.

जोबा मांझी को है संगठन पर भरोसा

सिंहभूम लोकसभा सीट से 1991 में झामुमो के कृष्णा मार्डी ने संथाल होते हुए भी हो बहुल लोकसभा क्षेत्र से चुनाव जीता था. इसके बाद हुए चुनाव में झामुमो लोकसभा सीट नहीं जीत सकी. वहीं पिछले दो दशकों से चुनाव में गठबंधन की राजनीति में सिंहभूम सीट सहयोगी दलों के खाते में चले जाने की वजह से झामुमो लोकसभा सीट पर अपना उम्मीदवार खड़ा नहीं कर पाता था. 2019 के विधानसभा चुनाव में सिंहभूम लोकसभा की सभी 6 विधानसभा सीटें इंडिया गठबंधन ने जीत ली थी. झामुमो के कब्जे में पांच सीटें सरायकेला, चाईबासा, मझगांव, मनोहरपुर और चक्रधरपुर है. वहीं जगन्नाथपुर सीट कांग्रेस के कब्जे में है. भाजपा गठबंधन के पास विधानसभा की सीटें नहीं है. ऐसे में जोबा मांझी की सिंहभूम लोकसभा सीट पर संथाल होते हुए दावेदारी को कमजोर नहीं आंका जा सकता. संयुक्त बिहार और झारखंड सरकार में कई बार मंत्री रह चुकीं जोबा मांझी वर्ष 1995 से लेकर 2019 तक के विधानसभा चुनाव में सिर्फ एक बार 2009 में ही हारी हैं. 1995, 2000, 2005, 2014 और 2019 में वह मनोहरपुर विधानसभा से लगातार चुनाव जीतती रही हैं.

सिंहभूम लोस सीट से झामुमो प्रत्याशी बदलने की भी चर्चा

सिंभूम लोकसभा सीट से झामुमो के प्रत्याशी बदलने की भी चर्चा हो रही है. मामला मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन तक भी पहुंचा है. नाम न लिखने की शर्त पर कोल्हान के दो विधायकों ने कहा अभी चुनाव का मामला बिल्कुल ठंडा पड़ा हुआ है. सभी विधायक पार्टी उम्मीदवार के लिए काम करेंगे. लेकिन किसी भी हो समुदाय के प्रत्याशी को पार्टी चुनाव में उतारती, तो सीट आसानी से निकाला जा सकता था. हालांकि 1991 में झारखंड मुक्ति मोर्चा से कृष्णा मार्डी चुनाव जीत चुके हैं. वह संथाल समुदाय से आते हैं. विधायकों की मानें, तो प्रत्याशी बदलने के मामले में अगले एक-दो दिनों में फैसला हो सकता है. इसे भी पढ़ें : पतरातू">https://lagatar.in/doubt-over-electricity-production-this-year-from-patratu-super-thermal-power-plant/">पतरातू

सुपर थर्मल पावर प्लांट से इस साल बिजली उत्पादन पर संशय
[wpse_comments_template]

Comments

Leave a Comment

Follow us on WhatsApp