Ranchi: झारखंड के एकमात्र फूड टेस्टिंग लैब को मान्यता नहीं मिल रही है. इससे बाजारों में बिकने वाले स्ट्रीट फूड, होटल और रेस्टोरेंट में लोगों को सुरक्षित खाना मिल रहा है या नहीं इसकी निगरानी नहीं हो पा रही है. बता दें की रांची के नामकुम में झारखंड का यह एकमात्र फूड टेस्टिंग लैब है, जिसे पिछले डेढ़ साल से मान्यता नहीं मिली है. सिर्फ तीन मोबाइल लैब हैं, जिनमें दो रांची में हैं और एक देवघर में है. इसे पढ़ें-
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पोस्ट करने वाले नवाब चिश्ती का मंत्री और विधायक के साथ फोटो वायरल जांच के लिए कोलकाता भेजा जाता है सैंपल
जानकारी के मुताबिक, नामकुम स्थित झारखंड का एकमात्र फूड टेस्टिंग लैब की मान्यता डेढ़ साल पहले यानी 31 दिसंबर 2020 को ही खत्म हो गई है. इस कारण खाने पीने की चीजों के सैंपल को कोलकाता भेजा जाता है. सैंपल रिपोर्ट आने में दो से तीन महीने तक समय लग जाता है. जिस वजह से खाने-पीने के इस्तेमाल में मिलावट करने वाले लोगों के ऊपर सही समय पर कार्रवाई नहीं हो पाती है. इसे भी पढ़ें-
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में हावी हो रही सांप्रदायिक ताकतें, हमें अपने और जनता के अधिकारों के लिए लड़ाई लड़नी पड़ेगी : बन्ना गुप्ता अपग्रेड नहीं होने की वजह से मान्यता रद्द कर दी गई
नामकुम स्थित फूड टेस्टिंग लैब अपग्रेड नहीं होने की वजह से मान्यता रद्द कर दी गई है. जानकारी के मुताबिक, खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम 2006 के अनुसार फूड टेस्टिंग लैब को एनएबीएल (नेशनल एक्रीडिएशन बोर्ड फॉर टेस्टिंग एंड कैलिब्रेशन लैबोरेट्रीज) से मान्यता प्राप्त होना जरूरी है. एनएबीएल ने झारखंड की इस लैब को कुछ शर्तों के साथ सैंपल जांच की मान्यता दी थी, जिस वजह से 2006 से स्टेट में लैब चल रही थी और इसे 2011 तक एनएबीएल के मानक के अनुसार विकसित हो जाना चाहिए था, सरकार ने उस वक्त कहा था कि जब तक एक्रीडिएशन नहीं मिलता है, तब तक इसी लैब से काम चलाते रहना है, एनएबीएल की मानकों के अनुसार 2020 तक इस लैब को अपग्रेड नहीं किया गया इस वजह से इसकी मान्यता रद्द कर दी गई. [wpse_comments_template]
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