New Delhi/Ranchi : राष्ट्रीय ग्रामीण विकास सम्मेलन में झारखंड की ग्रामीण विकास, ग्रामीण कार्य एवं पंचायती राज मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने राज्य की ओर से प्रभावी ढंग से कई महत्वपूर्ण मुद्दे उठाए. उन्होंने केंद्र सरकार से महात्मा गांधी के नाम पर नई जनहितकारी योजना शुरू करने, मनरेगा के तहत 125 दिनों के रोजगार के लिए पर्याप्त बजट उपलब्ध कराने, न्यूनतम मजदूरी बढ़ाकर 433 रुपये करने और मनरेगा की लंबित राशि का शीघ्र भुगतान करने की मांग की.
सम्मेलन में मंत्री ने कहा कि विकसित ग्रामीण भारत के निर्माण में महात्मा गांधी के विचारों और योगदान को उचित सम्मान मिलना चाहिए. उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी के नाम से संचालित योजना का नाम हटाया जाना दुर्भाग्यपूर्ण है और केंद्र सरकार को राष्ट्रपिता के नाम पर नई योजना शुरू करनी चाहिए.
उन्होंने मनरेगा के तहत 125 दिनों के रोजगार के लिए पर्याप्त बजट उपलब्ध कराने पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब केंद्र सरकार लगातार मनरेगा के बजट में कटौती कर रही है, तब रोजगार के दिनों में बढ़ोतरी का दावा व्यवहारिक नहीं है. उन्होंने झारखंड पर 60:40 की नई फंडिंग व्यवस्था से बढ़ने वाले आर्थिक बोझ का भी मुद्दा उठाया.
प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत आवास निर्माण की राशि बढ़ाकर दो लाख रुपये करने की मांग करते हुए मंत्री ने मजबूत फैब्रिकेटेड स्ट्रक्चर वाले आवास निर्माण का सुझाव दिया. उन्होंने कहा कि लाभुकों को एकमुश्त राशि मिलने से आवास निर्माण समय पर पूरा होगा और निर्माण में आने वाली बाधाएं दूर होंगी. साथ ही अबुआ आवास योजना में मनरेगा के तहत 90 दिनों की मजदूरी देने की भी मांग की.
दीपिका पांडेय सिंह ने केंद्र सरकार से मनरेगा के मटेरियल मद में झारखंड की लगभग 900 करोड़ रुपये की लंबित राशि का शीघ्र भुगतान करने का आग्रह किया. उन्होंने कहा कि भुगतान में देरी से ग्रामीण विकास योजनाएं प्रभावित हो रही हैं और मनरेगा ग्रामीण गरीबों के लिए रोजगार का प्रमुख माध्यम है.
सम्मेलन में उन्होंने झारखंड में न्यूनतम मनरेगा मजदूरी बढ़ाकर 433 रुपये प्रतिदिन करने की मांग भी रखी। उनका कहना था कि बढ़ती महंगाई को देखते हुए मजदूरों को सम्मानजनक मजदूरी मिलनी चाहिए.
मंत्री ने स्वयं सहायता समूह (SHG) की महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए झारखंड में रूरल इंडस्रीलन स्थापित करने पर भी जोर दिया. उन्होंने कहा कि राज्य की 32 लाख से अधिक महिलाएं आज आजीविका और उद्यमिता के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य कर रही हैं. यदि उनके उत्पादों को बेहतर बाजार और वैश्विक पहचान मिले तो झारखंड ग्रामीण अर्थव्यवस्था में नई मिसाल कायम कर सकता है.
सम्मेलन के दौरान केंद्रीय ग्रामीण विकास एवं कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने झारखंड सरकार द्वारा दिए गए सुझावों पर सकारात्मक पहल करने का भरोसा दिया.
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