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नोबेल शांति पुरस्कार विजेता अमेरिका के 39वें राष्ट्रपति जिमी कार्टर का 100 वर्ष की आयु में निधन

अमेरिकी राष्ट्रपति जो बिडेन ने कहा कि  यह एक दुखद दिन है,  अमेरिका और दुनिया ने एक उल्लेखनीय नेता खो दिया है. वह एक राजनेता और मानवतावादी थे. Washington : नोबेल शांति पुरस्कार अमेरिका के 39वें राष्ट्रपति जिमी कार्टर का रविवार को 100 वर्ष की आयु में निधन हो गया. वह 1977 से 1981 तक अमेरिका के राष्ट्रपति रहे. जानकारी के अनुसार वह काफी लंबे समय से बीमार थे. कार्टर के पुत्र ने उनके निधन की पुष्टि की है. जिमी कार्टर का जन्म1 अक्टूबर 1924 को हुआ था. साल 2002 में जिमी कार्टर नोबेल शांति पुरस्कार प्रदान किया गया था.

1977 में जिमी कार्टर आर फोर्ड को हराकर राष्ट्रपति बने थे

1977 में जिमी कार्टर आर फोर्ड को हराकर राष्ट्रपति बने थे. इस दौरान उन्होंने अमेरिका के मिडिल ईस्ट से रिश्तों की नींव रखी. जिमी कार्टर ने 1978 में ऐतिहासिक कैंप डेविड समझौते की मध्यस्थता की थी, जिससे मध्य पूर्व में शांति के लिए एक रूपरेखा तैयार हुई. साथ ही इजरायल-मिस्र के बीच शांति समझौता हुआ. इसके लिए उन्हें अंतरराष्ट्रीय शांति, लोकतंत्र और मानवाधिकारों को आगे बढ़ाने के लिए नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित किया गया था. कार्टर 1971 से 1975 तक जॉर्जिया के गवर्नर भी रहे. वह 1837 के बाद से डीप साउथ से आने वाले पहले राष्ट्रपति थे, और व्हाइट हाउस में लिंडन बी. जॉनसन और बिल क्लिंटन के कार्यकाल के बीच एकमात्र डेमोक्रेट निर्वाचित राष्ट्रपति थे.

अमेरिकी राष्ट्रपति जो बिडेन ने शोक व्यक्त किया 

अमेरिकी राष्ट्रपति जो बिडेन ने कहा कि  यह एक दुखद दिन है, लेकिन यह बहुत सारी अच्छी यादें वापस लाता है. आज, मेरे विचार से, अमेरिका और दुनिया ने एक उल्लेखनीय नेता खो दिया है. वह एक राजनेता और मानवतावादी थे. और जिल और मैंने एक प्रिय मित्र खो दिया है. मैं 50 से अधिक वर्षों से जिमी कार्टर के साथ घूम रहा हूं. उन वर्षों में मैंने उनसे अनगिनत बातचीत की. हालांकि, मुझे जिमी कार्टर के बारे में जो असाधारण लगता है, वह यह है कि दुनिया भर में लाखों लोगों को लगता है कि उन्होंने एक दोस्त खो दिया है, भले ही वे उनसे कभी मिले न हों. और ऐसा इसलिए है क्योंकि जिमी कार्टर ने शब्दों से नहीं, बल्कि अपने कामों से जीवन जिया. उन्होंने न केवल घर पर, बल्कि दुनिया भर में बीमारी को मिटाने के लिए काम किया. उन्होंने शांति स्थापित की, नागरिक अधिकारों, मानवाधिकारों को आगे बढ़ाया और दुनिया भर में स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनावों को बढ़ावा दिया.      

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