- बिना ओबीसी आरक्षण के नगर निकाय चुनाव से झामुमो को होगा अप्रत्यक्ष तौर पर राजनीतिक फायदा
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राज्य में शीघ्र चुनाव कराने का रास्ता साफ
बिना ओबीसी आरक्षण के नगर निकाय चुनाव होने के फैसले के बाद राज्य में शीघ्र चुनाव कराने का रास्ता साफ हो गया है. चर्चा है कि राज्य निर्वाचन आयोग भी जल्द चुनाव कराने को तैयार है. साल के अंत या अगले साल जनवरी में नगर निकाय चुनाव हो सकता है. नवंबर माह के पहले सप्ताह में चुनाव की घोषणा की जा सकती है.दावा : सरकार के फैसलों से विपक्ष हो चुका है मुद्दाविहीन
राजनीतिक जानकारों की मानें, तो एक तरह से इसका फायदा झामुमो की ही होगा. सरकार आपके द्वार कार्यक्रम के ठीक पहले 1932 की स्थानीय नीति और ओबीसी आरक्षण को 14 प्रतिशत से बढ़ाकर 27 प्रतिशत करने के फैसले से पहले ही विपक्ष मुद्दाविहीन हो चुका है.चुनावी फायदा लेना चाहता है झामुमो : आजसू
आजसू का कहना है कि ‘आपकी योजना, आपकी सरकार, आपके द्वार’ को सरकारी प्रचार और समारोह बनाकर झामुमो चुनावी फायदा लेना चाहता है.हिम्मत है तो तीन साल के काम की जानकारी भी जनता को दे सरकार : भाजपा
alt="" width="646" height="475" /> भाजपा प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने कहा, बिना ओबीसी आरक्षण के नगर निकाय चुनाव कराने के फैसले से झामुमो को किसी तरह का कोई चुनावी फायदा नहीं मिलने जा रहा. हेमंत सरकार के पास थोड़ी सी भी हिम्मत है, तो कार्यक्रम के तहत लगाए जा रहे शिविर में हेमंत सरकार को तीन साल के काम की भी जानकारी जनता को देनी चाहिए. सरकार को 1000 करोड़ रुपए की अवैध खनन, सैकड़ों महिलाओं के साथ बलात्कार, आदिवासी बच्चियों के साथ लगातार हो रही हत्याएं, राजनीति लाभ के लिए एक विशेष वर्ग को तरजीह, सांप्रदायिक दंगे में बढ़ोतरी की भी जानकारी जनता को देनी चाहिए.
रघुवर सरकार की जन आशीर्वाद यात्रा की तरह का नहीं है यह कार्यक्रम : झामुमो
alt="" width="600" height="400" /> दूसरी ओर झामुमो प्रवक्ता तनुज खत्री ने कहा कि नगर निकाय चुनाव दलीय आधार पर नहीं होना है. ऐसे में विपक्ष का हेमंत सरकार पर लगाया जा रहा आरोप बेबुनियाद है. हेमंत सोरेन द्वारा लगातार लिए जा रहे फैसलों से भाजपा और उसके सहयोगी आजसू के पास कोई मुद्दा ही नहीं बचा है. ‘आपकी योजना, आपकी सरकार, आपके द्वार’ कार्यक्रम रघुवर सरकार की जन आशीर्वाद योजना की तरह का कोई सरकारी कार्यक्रम नहीं है, जिसमें जनता का आशीर्वाद ही नहीं मिला. आज कोई नेता या जनप्रतिनिधि नहीं बल्कि अधिकारी लाभुकों के घर तक जा रहे हैं. ऐसे में कार्यक्रम को सरकारी प्रचार समारोह बताना बेबुनियाद और आरोपहीन है. इसे भी पढ़ें – सेना">https://lagatar.in/ed-to-probe-sale-of-more-than-two-dozen-large-plots-in-ranchi-including-4-55-acres-of-army-land/">सेना
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