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झामुमो ने खेला आदिवासी कार्ड, कहा-आदिवासी राष्ट्रपति को आमंत्रण नहीं, इसलिए संसद भवन उदघाटन का करेंगे बहिष्कार

झामुमो का भाजपा पर तीखे प्रहार
  • अंग्रेजों से माफी मांगने वाले सावरकर के जन्म दिन पर साजिशन चुना गया 28 मई की तिथि
  • जिस राष्ट्रपति से संसद में अभिभाषण पढ़वाते हैं, जो राष्ट्राध्यक्ष हैं, सेना प्रमुख हैं, उन्हें नहीं बुलाना देश और संविधान का अपमान
  • भाजपा ने पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद और वर्तमान राष्ट्रपति की जाति बताकर चुनाव मैदान में उतारा
  • आदिवासी होने के कारण भाजपा राष्ट्रपति को नहीं बुला रही है
Ranchi : झारखंड मुक्ति मोर्चा ने देश के नए संसद भवन के उद्घाटन में राष्ट्रपति को नहीं बुलाने पर आदिवासी कार्ड खेला है. झामुमो के वरिष्ठ नेता सुप्रियो भट्टाचार्य ने गुरुवार को आयोजित पत्रकार वार्ता में कहा कि चूंकि वर्तमान राष्ट्रपति आदिवासी हैं, संथाली हैं इसलिए उन्हें देश के नए संसद भवन उद्घाटन में नहीं बुलाया जा रहा है. यह देश की बड़ी विडंबना और एक त्रासदी जैसी ही है कि जो वीर सावरकर जो अंग्रेजों के सामने कई बार घुटने टेके, माफी मांगी, समझौता किया, उनके जन्मदिन को चुना नए संसद भवन के उदघाटन का दिन. ऊपर से हमारे देश के संसदीय एवं लोकतांत्रिक व्यवस्था के प्रमुख राष्ट्राध्यक्ष राष्ट्रपति को उदघाटन का मुख्य अतिथि बनाना तो दूर, उन्हें आमंत्रित तक नहीं किया गया. यह देश की 140 करोड़ जनता और संविधान का अपमान है. इसलिए झामुमो देश के नए संसद भवन के उद्घाटन समारोह में नहीं जाएगा.

भाजपा देश में नयी परंपरा की शुरूआत कर रही है 

सुप्रियो भट्टाचार्य ने कहा कि आखिरकार भाजपा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी चाहते क्या हैं, इसे देश को बताना चाहिए. देश में किस परंपरा की शुरूआत की जा रही है. राष्ट्रपति का पद देश का सर्वोच्च संवैधानिक पद होता है. यह पद जाति एवं धर्म से ऊपर होता है. मगर भाजपा देश की इकलौती पार्टी है, जो राष्ट्रपति जैसे अहम पद को लेकर जातिवाद और संप्रदायवाद करती है. पूर्व राष्ट्रपति के कोविंद और वर्तमान राष्ट्रपति को चुनाव मैदान में उतारने के लिए इनकी जाति को प्रचारित किया गया. अजीब विडंबना है.

राष्ट्रपति को नहीं बुलाना बड़े शर्म की बात

सुप्रियो भट्टाचार्य ने कहा कि जिस राष्ट्रपति के द्वारा देश के प्रधानमंत्री और सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस की नियुक्ति होती है. जिस राष्ट्रपति से संसद के दोनों सदनों के सत्र को संबोधित कराया जाता है. जो राष्ट्रपति न केवल राष्ट्राध्यक्ष हाेते हैं बल्कि सेना का भी प्रमुख होते हैं. उन्हें ही संसद भवन के उद्घाटन में आमंत्रित नहीं किया जाना कैसी राजनीति और कैसी परंपरा है. इसे प्रधानमंत्री और भाजपा को बताना चाहिए. प्रधानमंत्री जो ऑस्ट्रेलिया में भारतीय मूल के नागरिकों की वाहवाही लूट कर आए हैं, उनका सिर भी भाजपा के ऐसे कदम से झुक जाएगा.

सुप्रीम कोर्ट से है उम्मीद, न्याय मिलेगा

झामुमो नेता सुप्रियो ने कहा कि मोदी सरकार के इस निर्णय से न केवल विपक्ष बल्कि देश के लोग भी निराश हैं. इसलिए मोदी सरकार के इस निर्णय के खिलाफ लोग सुप्रीम कोर्ट गए हैं. चूंकि सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति भी राष्ट्रपति और राष्ट्रपति की नियुक्ति मुख्य न्यायाधीश कराते हैं, इसलिए झामुमो और देश की जनता को उम्मीद है कि सुप्रीम कोर्ट से न्याय मिलेगा. इसे भी पढ़ें – CID">https://lagatar.in/appeal-to-cid-dg-rescue-simdegas-daughter-trapped-in-the-clutches-of-touts-in-delhi/">CID

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