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आखिर गिरिडीह ही क्यों आए जेपी नड्डा, क्या भाजपा फिर खुद ही लड़ेगी लोस चुनाव

 
  • खास बातें
  • गिरिडीह से चुनाव जीतने के बावजूद रामगढ़ विस सीट पर ही नजर रही चंद्रप्रकाश चौधरी की
  • संसदीय क्षेत्र में कभी एक्टिव भी नहीं रहे, सांसद से ज्यादा राज्य में मंत्री पद ही रास आता है
Satya Sharan Mishra Ranchi : भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा गुरुवार को गिरिडीह पहुंचे. मोदी सरकार के 9 साल पूरे होने पर पार्टी की ओर से चलाए जा रहे जनसंपर्क अभियान के तहत वे यहां जनसभा को संबोधित किया. नड्डा गिरिडीह ही क्यों आए, इसे लेकर कई तरह के कयास लगाए जा रहे हैं. झारखंड में लोकसभा की 14 सीटों में से 11 भाजपा के कब्जे में हैं, जबकि 2 सीटें (चाईबासा और राजमहल) विपक्ष के कब्जे में है. राजमहल सीट झामुमो, चाईबासा सीट कांग्रेस के पास, तो गिरिडीह सीट भाजपा की सहयोगी आजसू पार्टी के पास है. भाजपा के ही एक नेता का कहना है कि 2019 में नड्डा हारी हुई दोनों लोकसभा क्षेत्रों के अलावा जीते हुए किसी भी लोकसभा क्षेत्र में जनसभा करने आ सकते थे, लेकिन उन्होंने आखिर गिरिडीह को ही क्यों चुना? कहीं ऐसा तो नहीं कि 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा गिरिडीह में अपना प्रत्याशी उतारने की तैयारी में है.

रवींद्र पांडेय ने 5 बार यह सीट जीतकर भाजपा को दी

गिरिडीह लोकसभा सीट से 1996 से 2014 तक (2004 छोड़कर) भाजपा का कब्जा रहा है. रवींद्र पांडेय ने 5 बार यह सीट जीतकर भाजपा को दी. 2019 के चुनाव में वे सीटिंग सांसद थे, लेकिन चुनाव से पहले जब सीटों का बंटवारा हुआ, तो यह सीट भाजपा ने आजसू को दे दी. आजसू प्रत्याशी चंद्रप्रकाश चौधरी चुनाव जीत भी गए, लेकिन सांसद बनने के बाद भी चंद्रप्रकाश चौधरी गिरिडीह में बहुत एक्टिव नहीं दिखे. उनका सारा ध्यान अपने पुराने विधानसभा क्षेत्र रामगढ़ में लगा रहा. झारखंड में गठबंधन में बनने वाली सभी सरकारों में आजसू के कोटे से चंद्रप्रकाश चौधरी मंत्री बने हैं, लिहाजा उन्हें भी सांसद से ज्यादा मंत्री पद ही रास आता है.

गिरिडीह सीट छोड़ विस में ज्यादा सीटें मांग सकती है आजसू

आजसू पार्टी ने लोकसभा का एक सीट में अपनी उपस्थिति तो दर्ज करा ली, लेकिन विधानसभा में उसकी स्थिति कमजोर हो गयी. आजसू को शायद यह एहसास हो गया कि केंद्र की राजनीति में सिर्फ सांसद का पद ही मिलेगा. अगर सत्ता में आकर पहले की तरह सत्ता सुख भोगना है, तो विधानसभा की ज्यादा से ज्यादा सीटों पर चुनाव लड़कर जीतना होगा. पांच-सात सीटें भी जीत ली, तो सत्ता में ज्यादा भागीदारी की डिमांड कर सकेगी. इसलिए संभव है कि आजसू विधानसभा चुनाव में भाजपा से अधिक सीटों की डील कर लोकसभा चुनाव में गिरिडीह सीट छोड़ दे. इसे भी पढ़ें – नड्डा">https://lagatar.in/jmms-challenge-to-nadda-if-you-have-the-courage-go-to-manipur-dont-serve-lies-here/">नड्डा

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