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जोगेंद्र तिवारी व उनके सहयोगियों और उनसे जुड़ी कंपनियों को हाईकोर्ट से नहीं मिली राहत

Ranchi : झारखंड हाईकोर्ट ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा दर्ज मनी लांड्रिंग मामले में आरोपी जोगेंद्र तिवारी और उनसे जुड़ी कंपनियों को राहत देने से इनकार कर दिया है. हाईकोर्ट ने रांची के PMLA कोर्ट द्वारा पारित आदेश को सही ठहराते हुए आरोपियों की डिस्चार्ज याचिकाएं खारिज करने के फैसले में हस्तक्षेप से इनकार कर दिया. जोगेंद्र तिवारी झारखंड के चर्चित  शराब व बालू कारोबारी हैं.
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  • देवघर के चर्चित ‘रॉय बंगला’ भूमि प्रकरण, अवैध बालू खनन और अवैध शराब कारोबार मामला.
  • प्रोसीड्स ऑफ क्राइम के सबूत मौजूद, प्रथम दृष्टया मामला बनता है, तो ट्रायल चलना चाहिए.
  • डिस्चार्ज के स्तर पर साक्ष्यों का गहन परीक्षण नहीं किया जा सकता, डिस्चार्ज याचिका खारिज हुई थी.

Ranchi : झारखंड हाईकोर्ट ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा दर्ज मनी लांड्रिंग मामले में आरोपी जोगेंद्र तिवारी और उनसे जुड़ी कंपनियों को राहत देने से इनकार कर दिया है. हाईकोर्ट ने रांची के PMLA कोर्ट द्वारा पारित आदेश को सही ठहराते हुए आरोपियों की डिस्चार्ज याचिकाएं खारिज करने के फैसले में हस्तक्षेप से इनकार कर दिया. जोगेंद्र तिवारी झारखंड के चर्चित  शराब व बालू कारोबारी हैं.

जानकारी के मुताबिक हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद की कोर्ट ने मामले में दाखिल सभी आपराधिक पुनरीक्षण (क्रिमिनल रिवीजन याचिकाएं) खारिज कर दी. साथ ही PMLA अदालत के 21 अगस्त 2025 के आदेश को बरकरार रखा. अब मामले की सुनवाई ट्रायल कोर्ट में आगे बढ़ेगी. जोगेंद्र तिवारी, मेसर्स गुप्ता ट्रेडर्स एवं अन्य की ओर से रांची की ईडी कोर्ट द्वारा उनके डिस्चार्ज पिटीशन खारिज किए जाने को हाई कोर्ट में चुनौती दी गई थी.

 

 

 

क्या कहा हाई कोर्ट ने

हाईकोर्ट ने कहा कि डिस्चार्ज के स्तर पर साक्ष्यों का गहन परीक्षण नहीं किया जा सकता. यदि रिकॉर्ड पर उपलब्ध सामग्री से प्रथम दृष्टया (Prima Facie) मामला बनता है, तो ट्रायल चलना चाहिए. कोर्ट ने माना कि अनुसूचित अपराधों (Scheduled Offence) और कथित अवैध आय के बीच संबंध का प्रथम दृष्टया आधार मौजूद है. ईडी की विशेष अदालत ने पर्याप्त विचार के बाद डिस्चार्ज याचिका खारिज की थी. इस स्तर पर हस्तक्षेप का कोई ठोस आधार नहीं है.

 

क्या है मामला

दरअसल, यह मामला ECIR केस संख्या 08/2023 से जुड़ा है, जो चार अलग-अलग प्राथमिकी (FIR) के आधार पर दर्ज किया गया था. इनमें देवघर के चर्चित ‘रॉय बंगला’ भूमि प्रकरण, अवैध बालू खनन और अवैध शराब कारोबार से जुड़े मामले शामिल हैं.

 

क्या है आरोप

ईडी के अनुसार जोगेंद्र तिवारी ने विभिन्न कंपनियों और सहयोगियों के नाम पर अवैध गतिविधियों को संचालित किया. जांच में सामने आया कि भूमि हड़पने और फर्जी दस्तावेज के जरिए बिक्री कर अवैध कमाई की गई. अवैध बालू खनन कर सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचाया गया. शराब कारोबार में अनियमितता और तस्करी के जरिए धन अर्जित किया गया. अवैध रूप से अर्जित राशि को विभिन्न कंपनियों के बैंक खातों में जमा कर वैध रूप देने की कोशिश की गई. ईडी ने आरोप लगाया है कि कुल लगभग 13.29 करोड़ रुपये की अवैध कमाई (Proceeds of Crime) को बैंक खातों के माध्यम से ‘लांड्रिंग’ किया गया. आरोपियों की ओर से दलील दी गई कि जिन मूल (Predicate) अपराधों के आधार पर PMLA का मामला दर्ज हुआ, उनमें से कई में अंतिम रिपोर्ट दाखिल हो चुकी है या वे निरस्त हो चुके हैं. जब तक कोई जीवित और लंबित अनुसूचित अपराध (Scheduled Offence) नहीं रहेगा, तब तक PMLA की कार्रवाई जारी नहीं रह सकती. ट्रायल से पहले ही उन्हें डिस्चार्ज किया जाना चाहिए था.

 

जांच में स्पष्ट मनी ट्रेल सामने आए

ईडी ने कोर्ट में कहा है कि कई मूल मामले अब भी लंबित हैं. जांच में स्पष्ट मनी ट्रेल सामने आई है. भारी मात्रा में नकद जमा और संदिग्ध लेन-देन के प्रमाण मिले हैं. यह मामला ट्रायल के दौरान साक्ष्यों के आधार पर तय होना चाहिए, न कि प्रारंभिक चरण में.

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