Lagatar Desk: पत्रकारों को अपनी खबर का सोर्स बताना होगा. इसे लेकर आज (मंगलावर) को सुप्रीम कोर्ट में महत्वपूर्ण सुनवाई होगी. कई मीडिया संगठनों ने सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार के इस कानून को चुनौती दी है.
यह मामला डिजिटल पर्सनल डाटा प्रोटेक्शन (डीपीडीपी) एक्ट से जुड़ा हुआ है. कानून साल 2023 में पास किया गया था. इसे अगले साल यानी 2027 में लागू किया जाना है. कानून के तहत सरकार किसी भी संगठन से ऐसी जानकार माँग सकती है, जो वह (सरकार) चाहे. इससे खबर का सोर्स उजागर हो सकते हैं.
कानून के तहत अगर किसी व्यक्ति के खिलाफ जांच चल रही है तो उस व्यक्ति से खबर प्रकाशित करने की सहमति लेनी पड़ सकती है. साथ ही प्रकाशित ख़बर को मिटवाने या संपादित करने के लिए कहा जा सकता है.
इस कानून में पत्रकारिता करने वाले डिजिटल पत्रकारों के लिए कोई स्पष्ट छूट नहीं है. हालांकि केंद्र सरकार का कहना है कि यह डेटा सुरक्षा कानून है. प्रेस की आजादी का सम्मान किया जाएगा. हालांकि सरकार ने पत्रकारों के लिए कोई लिखित छूट नहीं दी है.
डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म को इसी बात की चिंता है कि सरकारें इस डेटा कानून की आड़ में पत्रकारों को खबर का सोर्स बताने के लिए मजबूर कर सकती है. इसे लेकर मीडिया संगठनों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाख़िल की थी. ताकि पत्रकारों के लिए सरकार लिखित छूट दे.