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जेपीएससी मामला : सुप्रीम कोर्ट ने कहा, हाईकोर्ट खुद ही सुपर एग्जामिनर नहीं बन सकता

Ranchi/New Delhi : हाईकोर्ट खुद ही सुपर एग्जामिनर नहीं बन सकता. सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायाधीश जॉयमाल्या बागची और एनवी अंजारिया की पीठ ने हाईकोर्ट के फैसले के ख़िलाफ जेपीएससी द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान यह राय व्यक्त की.


सुप्रीम कोर्ट ने  झारखंड हाईकोर्ट के फैसले के पैरा 33,36,39,40 और 41 को रद्द कर दिया है. साथ ही जेपीएससी को न्यायिक सेवा में चयन की प्रक्रिया शीघ्र पूरा करने का निर्देश दिया है.


उल्लेखनीय है कि जेपीएससी द्वारा न्यायिक सेवा के अधिकारियों (सिविल जज जूनियर डिविजन) की नियुक्ति के लिए 2023 मे विज्ञापन प्रकाशित किया गया था. जेपीएससी द्वारा लिखित परीक्षा की Answer key जारी करने के बाद सवाल नंबर 8,47 और 96 के जवाब पर विवाद हो गया था.


जेपीएससी द्वारा प्रकाशित Answer key में सवाल नंबर आठ में पहले सही जवाब “A” प्रकाशित किया गया. बाद में इसे संशोधित कर सही जवाब “B” किया गया. इसके साथ ही सवाल नंबर 47 और 98 पर भी विवाद हुआ. जेपीएससी द्वारा जवाब बदलने के मामले में विवाद होने पर मामला हाईकोर्ट पहुंचा.


सुनवाई के बाद तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश एमएस रामचंद्र राव और न्यायाधीश दीपक रौशन की पीठ ने अप्रैल 2025 में फैसला सुनाया. अदालत ने अपने फैसले के पारा-33 में कहा कि सवाल नंबर 8.47 और 96 का जेपीएससी द्वारा दिया गया जवाब गलत है.


पारा 36 में हाईकोर्ट ने कहा कि सवाल नंबर आठ के जवाब में “A” लिखने वालों को एक नंबर दे. साथ ही सवाल नंबर 47 और 98 को हटा दें. न्यायालय ने अपने फैसले के पारा 39 में कहा कि जेपीएससी पहले 98 सवाल पर ही नंबर की गणना करे. साथ ही 100 सवाल के आधार नंबर की गणना के लिए फारमूला तय किया.


 पारा 40 में न्यायालय ने अपने बताये गये फारमूले पर छात्रों के मिले नंबर की गणना कर मेरिट लिस्ट जारी करने आदेश दिया. पारा 41 में न्यायालय ने मेरिट लिस्ट जारी करने के लिये चार सप्ताह का समय दिया.


हाईकोर्ट द्वारा दिये गये इस फैसले के ख़िलाफ़ जेपीएससी मे सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की. सुप्रीम कोर्ट में मामले की सुनवाई के दौरान जेपीएससी की ओर से यह सवाल उठाया गया कि क्या हाईकोर्ट को किसी सवाल के सही या ग़लत होने का फैसला करने का अधिकार है?


सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई के बाद अपने फैसले में यह कहा कि मामला न्यायिक सेवा की परीक्षा से संबंधित है, यह सही है कि हाईकोर्ट के माननीय न्यायाधीशों को बार और बेंच की बहुत जानकारी है.


इससे उन्हें सवालों की बेहतर समझ हो सकती है. लेकिन न्यायिक पुनरीक्षण के दौरान परीक्षा से संबंधित सवालों के जवाब के मामले में हाईकोर्ट सुपर एक्जामिनर या विशेषज्ञ की भूमिका में नहीं रह सकता. यह काम विशेषज्ञों पर ही छोड़ देना चाहिए.


सुप्रीम कोर्ट ने अपनी इस राय के साथ हाईकोर्ट के फैसले के पारा 33,36,39,40 और 41 को रद्द कर दिया है. साथ ही जेपीएससी को सवालों के जवाब पर उठे विवाद को सुलझा कर जल्द से जल्द नियुक्ति की प्रक्रिया को पूरा करने का निर्देश दिया है.

 

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