Ranchi: झारखंड राज्य लोक सेवा आयोग के तत्कालीन अध्यक्ष एल ख्यांग्ते को 500 OMR Sheet में हेराफेरी करने की जानकारी थी. कर्नाटक के एक व्यक्ति ने आयोग के अध्यक्ष को इससे संबंधित लिखित सूचना दी थी. इसमें अभय के कारनामों का उल्लेख किया गया था. साथ ही गड़बड़ी की स्वतंत्र जांच कराने का अनुरोध किया था. लेकिन अध्यक्ष ने जनवरी 2026 में मिली इस सूचना के आलोक में किसी तरह की कार्रवाई नहीं की थी.
जनवरी 2026 में अध्यक्ष को भेजे गये शिकायती पत्र में यह कहा गया था कि TDPL के कर्मचारी अभय कुमार तिवारी ने आयोग द्वारा आयोजित परीक्षाओं में पैसा लेकर बड़े पैमाने पर गड़बड़ी की है. शिकायती पत्र में कहा गया था कि आयोग द्वारा विज्ञापन संख्या 4/24 के आलोक में आयोजित फॉरेस्ट रेंज ऑफिसर (FRO) के प्रारंभिक परीक्षा (PT) के 350, OMR Sheet में हेराफेरी की है. अभय तिवारी ने विज्ञापन संख्या 3/24 के आलोक में आयोजित असिस्टेंट कंजरवेटर ऑफ फॉरेस्ट (ACF) के प्रारंभिक परीक्षा के 150, OMR Sheet में हेराफेरी की है.

जनवरी 2026 में अध्यक्ष को भेजा गया शिकायती पत्र
आयोग के अध्यक्ष को भेजे गये शिकायती पत्र में अभय कुमार तिवारी द्वारा 14वीं सिविल सेवा परीक्षा में भी गड़बड़ी करने और पैसा वसूले की जानकारी दी गयी थी. इसमें कहा गया था कि अभय तिवारी प्रारंभिक परीक्षा पास कराने के लिए पांच लाख रुपये लिया है. लिखित परीक्षा पास कराने के लिए 25 लाख रुपये और इंटरव्यू पास कराने के लिए 10 लाख रुपये लेता है. यानी वह परीक्षा में सफल घोषित कराने के लिए 40 लाख रुपये लेता है. फॉरेस्ट रेंज ऑफिसर और असिस्टेंट कंजरवेटर ऑफ फॉरेस्ट की परीक्षा पास कराने के लिए भी उसने पैसे लिया है.
अध्यक्ष को भेजे गये पत्र में कहा गया था कि अभय तिवारी कई फोन नंबरों का इस्तेमाल करता है. लेकिन इसमें से कोई नंबर उसके नाम से निबंधित नहीं है. वह 9162835417,9304204167, 9341041433 सहित कुछ अन्य नंबरों का इस्तेमाल कर रहा है. उसके द्वारा इस्तेमाल किये नंबरों में से कुछ अविनाश मरांडी, राजा राम सहित अन्य नामों से निबंधित है. झारखंड राज्य कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) पेपर लीक मामले में नामकुम थाना में दर्ज प्राथमिकी (45/2024) में भी वह अभियुक्त है.
अध्यक्ष को भेजे गये पत्र में अभय तिवारी द्वारा पैसा लेकर नियुक्ति के लिए चलाये जा रहे सिंडिकेट का भी उल्लेख किया गया है. इसमें यह कहा गया कि अभय द्वारा चलाया जा रहे सिंडिकेट में TDPL Main Programmer उसमान और Asistant Programmer अवध शामिल है. वह इन्हीं लोगों के साथ मिल कर OMR Sheet में हेराफेरी करता है. उसके द्वारा की जा रही इस हेराफेरी की वजह से रिजल्ट प्रकाशित करने में देर होता है.
अध्यक्ष को भेजे गये शिकायती पत्र में यह भी कहा गया कि फर्जी तरीके से नियुक्ति के लिए सक्रिय सिंडिकेट द्वारा पैसा देकर नौकरी पाने वालों का महत्वपूर्ण दस्तावेज जमानत रख लिया जाता है. इसमें मैट्रिक से ग्रेजुशन तक के मूल शैक्षणिक प्रमाण पत्र, परीक्षार्थी को मिला OMR Sheet सहित अन्य दस्तावेज शामिल हैं. सिंडिकेट द्वारा अपने संपर्क में आये परीक्षार्थियों से दस्तखत किया हुआ एक चेक भी लिया जाता है. इसमें उतनी राशि का उल्लेख रहता है, जितने में परीक्षा पास कराने के लिए समझौता होता है.
आयोग को भेजे गये इस शिकायती पत्र में यह अनुरोध किया गया था कि वह परीक्षा में गड़बड़ी के सिलसिले में दी गयी सूचनाओं की स्वतंत्र रूप से जांच करायें. परीक्षा के काम से जुड़े कमरों में लगे CC TV की जांच करायें. इससे अभय तिवारी और सिंडिकेट द्वारा की गयी जा रही गड़बड़ी की पुष्टि होगी. लेकिन आयोग के अध्यक्ष ने इस शिकायती पत्र के आलोक में किसी तरह की कार्रवाई नहीं की.
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