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विवादों से रहा है जेपीएससी का नाता, इन परीक्षाओं पर जांच की आंच

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Ranchi: झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) ने 24 सालों में 10 बार सिविल सेवा परीक्षा ली है. 11वीं के लिए आवेदन मांगा गया है. 7वीं से 10वीं की परीक्षा एक बार में ही हुई थी. दुर्भाग्य यह है कि जेपीएससी ने जितनी बार सिविल सेवा परीक्षा आयोजित की है, हर बार विवाद हुआ. सहायक प्राध्यापक की परीक्षा 15 सालो से कोर्ट में लंबित है. नियमत: सिविल सेवा की परीक्षा प्रत्येक साल होनी है, लेकिन प्रत्येक साल परीक्षा नहीं होती है. -2003 में पहली बार जेपीएससी सिविल सेवा परीक्षा के लिए विज्ञापन जारी हुआ था. उस वक्त 64 सीटों के लिए परीक्षा हुई थी. परीक्षा विवादों में चली गई. पहली बार परीक्षा हुई और जांच के घेरे में आ गई. इसे पढ़ें- JSSC-PGT">https://lagatar.in/jssc-pgt-exam-2023-candidates-sitting-on-strike-in-front-of-raj-bhavan-demanding-release-of-results-of-seven-subjects/">JSSC-PGT

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- 2005 में दूसरी बार सिविल सेवा की परीक्षा ली गई. दूसरी जेपीएससी भी जांच के घेरे में आ गई. बहाल हुए 165 अफसरों को बर्खास्त कर दिया गया. बाद में कैबैनेट से पास कर इन्हें फिर से बहाल किया गया. इसे लेकर भी जांच जारी है. -2015 में छठे जेपीएससी के लिए आवेदन मांगा गया. इसकी परीक्षा 2018 में हुई थी. 2020 में रिजल्ट जारी किया गया. कहीं न कहीं यह परीक्षा भी विवादों में रही. - जेपीएससी ने सहायक प्राध्यापक परीक्षा वर्ष 2008 में ली थी. परीक्षा में गड़बड़ी का आरोप लगा था. आरोपों की जांच सीबीआई कर रही है. फिलहाल यह मामला कोर्ट में हैं. 15 साल बीत जाने के बाद भी इस पर कोई फैसला नहीं आया है. विश्वविद्यालयों में सहायक प्राध्यापक के लगभग 4000 पद रिक्त हैं, बावजूद वैकेंसी निकलती ही नहीं. - वर्ष 2021 में ली गई सिविल सेवा परीक्षा विवादों में रही. प्रारंभिक परीक्षा का रिजल्ट जारी होने के बाद इस पर विवाद खड़ा हुआ था. बढ़ते विवाद के बाद कटऑफ में संशोधन किया गया था. हालांकि यह पहली सिविल सेवा परीक्षा थी. जिसकी नियुक्ति प्रक्रिया 252 दिनों में पूरी कर ली गई थी. इसे भी पढ़ें- चेक">https://lagatar.in/check-bounce-case-ameesha-patel-did-not-appear-in-civil-court-cited-personal-reasons/">चेक

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17 साल लग गए नियुक्ति में

फर्स्ट डिप्टी कलेक्टर के 50 पदों के लिए वर्ष 2005 में विज्ञापन निकली थी. अप्रैल 2006 में परीक्षा हुई. सचिवालय और अन्य विभागों के कर्मी परीक्षा में शामिल हुए थे. परीक्षा के बाद प्रश्नपत्र लीक और धांधली का मामला सामने आया था. तब मामला कोर्ट में चला गया. तत्कालीन राज्यपाल सैयद सिब्ते रजी ने इसकी जांच कराई थी. जांच रिपोर्ट मिलने के बाद परीक्षा को रद्द कर दिया गया. जून 2013 में परीक्षा के लिए फिर से विज्ञापन जारी किया गया. किसी कारण परीक्षा नहीं हो पाई. 2020 में इस परीक्षा को लिया गया. इसका रिज्लट 2023 में जारी किया गया. इससे पहले कई लोग रिटायर कर चुके थे. [wpse_comments_template]

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