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JPSC-JSSC PROTEST :  अनशनकारियों को धरना स्थल भेजने से अस्पताल प्रबंधन का इनकार

अस्पताल प्रबंधन ने भूख हड़ताल पर बैठे तीन अनशनकारियों की बिगड़ती सेहत को देखते हुए उनका हेल्थ बुलेटिन जारी किया है. डिप्टी सुपरिंटेंडेंट डॉ. विमलेश और इंचार्ज डॉ. हरीश के नेतृत्व में डॉ. अमृता और डॉ. हफीजुल की टीम ने प्रेस कांफ्रेंस किया है.
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डॉक्टर ने प्रेस कांफ्रेंस कर दी जानकारी

Ranchi :   अस्पताल प्रबंधन ने भूख हड़ताल पर बैठे तीन अनशनकारियों की बिगड़ती सेहत को देखते हुए उनका हेल्थ बुलेटिन जारी किया है. डिप्टी सुपरिंटेंडेंट डॉ. विमलेश और इंचार्ज डॉ. हरीश के नेतृत्व में निगरानी कर रही डॉ. अमृता और डॉ. हफीजुल की टीम ने इस संबंध में प्रेस कांफ्रेंस किया है.

 

डॉक्टरों ने बताया- अनशनकारियों की स्थिति गंभीर है

अस्पताल प्रबंधन ने तीनों अनशनकारियों की स्वास्थ्य को देखते हुए उन्हें धरनास्थल पर भेजने से साफ इनकार कर दिया है. डॉक्टरों का कहना है कि अनशनकारियों में भुकमरी के गंभीर लक्षण दिखाई दे रहे हैं, ऐसे में उन्हें अस्पताल से डिस्चार्ज करना चिकित्सकीय रूप से उचित नहीं है. 

 

अस्पताल प्रशासन ने कहा कि डॉक्टर मरीजों से जबरदस्ती नहीं कर सकते हैं, केवल चिकित्सीय सलाह दे सकते हैं. लेकिन मौजूदा स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए उनकी जान को खतरे में डालकर उन्हें अस्पताल से छुट्टी देने की अनुमति नहीं दी जा सकती है. 


दरअसल अनशनकारियों और उनके समर्थकों की ओर से धरना स्थल पर जाने और वहां झंडा फहराने के लिए अस्पताल से छुट्टी देने की मांग की गई थी. जिसके बाद अस्पताल प्रबंधन ने प्रेस कांफ्रेंस कर अनशनकारियों का हेल्थ बुलेटिन जारी किया है. 

 

डॉक्टरों ने बताया कि पिछले 15 दिनों से अन्न का त्याग कर चुके देवेंद्र नाथ मेहता ने अब फ्लूइड्स लेने से भी इनकार कर दिया है. हालांकि वे पानी पी रहे हैं. डॉक्टरों के अनुसार, उनकी मेडिकल रिपोर्ट में इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन पाया गया है और सोडियम का स्तर गिरकर 124 तक पहुंच गया है. उनके यूरिन में कीटोन बॉडीज भी मिली हैं, जो लंबे समय से भोजन नहीं लेने के कारण शरीर में हो रही भुखमरी का संकेत हैं.

 

वहीं, अन्य दो अनशनकारियों हबीबा और राहुल क्रांति की स्थिति भी चिंताजनक बताई गई है. दोनों के यूरिन में कीटोन बॉडीज पाई गई हैं, जबकि राहुल क्रांति में इसका स्तर 3+ है. डॉक्टरों के मुताबिक, फिलहाल फ्लूइड देने के बाद ही दोनों का ब्लड प्रेशर नियंत्रित किया जा रहा है. 

 

डॉक्टरों ने बताया कि लंबे समय तक भोजन नहीं मिलने पर शरीर को ग्लूकोज की पर्याप्त आपूर्ति नहीं होती. ऐसी स्थिति में शरीर ऊर्जा के लिए जमा चर्बी को तोड़ना शुरू करता है, जिससे कीटोन बॉडीज बनती हैं. लंबे समय तक भूखे रहने की स्थिति में कीटोन का बढ़ना शरीर में गंभीर भुखमरी का संकेत माना जाता है. 


इधर, अनशनकारियों और उनके समर्थकों की ओर से धरना स्थल पर जाने और वहां झंडा फहराने के लिए अस्पताल से छुट्टी देने की मांग की गई थी।

 

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