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JSMDC : 76 लाख की हेरीफेरी के आरोप का सामना कर रहे थे अशोक कुमार, बिना एफआईआर किये ही सेवा समाप्त

  • बालू और कोयला प्रभारी का काम देख रहे थे अशोक कुमार, संविदा पर थे कार्यरत
  • पूर्व खान सचिव के श्रीनिवासन और पूजा सिंघल के चहेते रहे अशोक कुमार
  • उनके खिलाफ सितंबर 2022 को जारी हुआ था 76 लाख हेराफेरी मामले में नोटिस
Ranchi : झारखंड राज्य खनिज विकास निगम (जेएसएमडीसी) में संविदा पर काम कर रहे बालू और कोयला प्रभारी अशोक कुमार पर 76 लाख की हेरीफेरी का आरोप लगा था. वे पूर्व खान सचिव के श्रीनिवासन और पूजा सिंघल के चहेते माने जाने थे. नियम के अनुसार उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराना चाहिए था. लेकिन बिना एफआईआर किए ही इनकी संविदा को समाप्त कर इन्हें सेवा से हटा दिया गया है. https://lagatar.in/wp-content/uploads/2023/01/11rc_m_238_11012023_1.jpg"

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सितंबर 2022 को जारी हुआ था नोटिस

लगातार मीडिया के पास जेएसएमडीसी द्वारा जारी एक ज्ञापन है, जिसे पिछले साल 23 सितंबर को जारी किया गया था. ज्ञापन में अशोक कुमार पर खरसोतापचडूमर बालू घाटों से बालू खनन चालान जारी करने में अनियमितता करने का आरोप लगाया गया था. दोनों बालू घाट गढ़वा जिले में स्थित हैं. जेएसएमडीसी ने नोटिस मिलने के 15 दिनों के भीतर राशि वापस नहीं करने पर कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी थी.

एमडी से नहीं हो पायी बात, अशोक कुमार ने सेवा समाप्ति की पुष्टि की

जानकारी के मुताबिक, अभी तक यह स्पष्ट नहीं है कि जेएसएमडीसी ने उक्त राशि अशोक कुमार से वसूल कर पाया है या नहीं. आखिर उनके खिलाफ एफआईआर (प्राथमिकी) क्यों नहीं दर्ज की गई. इस बारे में जेएसएमडीसी के प्रबंध निदेशक अमित कुमार से संपर्क किया गया, लेकिन उन्होंने न ही फोन उठाया न ही मैसेज का जवाब दिया. जैसे ही उनका पक्ष आएगा, उसे प्रकाशित किया जाएगा. वहीं, अशोक कुमार से जब इस सिलसिले में बात की गयी, तो उन्होंने पुष्टि की है कि उनकी सेवा समाप्त कर दी गयी है. हालांकि उन्होंने अपने खिलाफ लगे भ्रष्टाचार के आरोपों से इनकार किया है. कहा कि यह एक भ्रम के अलावा और कुछ नहीं है.

मेरे जवाब से निगम पूरी तरह संतुष्ट : अशोक कुमार 

अशोक कुमार ने बताया कि जेएसएमडीसी के मांगने पर उन्होंने जो जवाब दिया, उससे जेएसएमडीसी पूरी तरह से संतुष्ट है. जब पूछा गया कि उन्होंने अपने जवाब से जेएसएमडीसी को कैसे संतुष्ट किया, तो उन्होंने अनुरोध किया कि वे इस मामले में अब और नहीं जाना चाहते. वे एक गरीब आदमी हैं. पिछले महीने (दिसंबर) में उनकी सेवा खत्म कर दी गयी और वर्तमान में वे एक निजी नौकरी कर रहे हैं. दूसरी तरफ जेएसएमडीसी द्वारा दिए दूसरे नोटिस से स्पष्ट है कि उनके किसी भी जवाब से निगम संतुष्ट नहीं है कि आखिर दोनों बालू घाटों से 76.54 लाख रुपए का गबन कर उनके द्वारा कैसे राजस्व की हानि पहुंचायी गयी. इसे भी पढ़ें – डॉ">https://lagatar.in/allegations-of-rigging-in-dr-bhimrao-ambedkar-unnat-gram-yojana-demand-for-investigation-from-md/">डॉ

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