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कानूनी जागरुकता के लिए सड़क पर उतरे न्यायाधीश, धनबाद में 90 दिवसीय अभियान का शुभारंभ

आम लोगों तक कानून की जानकारी पहुंचाने और उन्हें उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से आज रविवार को धनबाद में 90 दिवसीय व्यापक आउटरीच कार्यक्रम की शुरुआत की गयी. यह अभियान झारखंड स्टेट लीगल सर्विसेज ऑथोरिटी के निर्देश पर चलाया जा रहा है.
 

 Dhanbad :   आम लोगों तक कानून की जानकारी पहुंचाने और उन्हें उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से आज रविवार को धनबाद में 90 दिवसीय व्यापक आउटरीच कार्यक्रम की शुरुआत की गयी. यह अभियान झारखंड स्टेट लीगल सर्विसेज ऑथोरिटी के निर्देश पर चलाया जा रहा है.

 

कार्यक्रम की शुरुआत प्रभातफेरी के साथ हुई जिसका नेतृत्व प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह अध्यक्ष डालसा दुर्गेश चंद्र अवस्थी ने किया. प्रभात फेरी सिविल कोर्ट परिसर से निकलकर रणधीर बर्मा चौक तक पहुंची और फिर वापस सिविल कोर्ट में आकर संपन्न हुई.

 

इस संबंध में न्यायाधीश ने बताया कि अगले 90 दिनों तक न्यायिक पदाधिकारियों के नेतृत्व में गठित टीमें जिले के विभिन्न क्षेत्रों में जाकर लोगों को कानूनी साक्षरता से जोड़ेंगी.

 

अभियान के तहत घर-घर जाकर लोगों को उनके अधिकारों, सरकारी योजनाओं और कानूनी सहायता से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां दी जाएंगी.

 

उन्होंने बताया कि नेशनल लीगल सर्विसेज ऑथोरिटी की हेल्पलाइन नंबर 15100 डायन प्रथा (डायन बिसाही) से जुड़े मामलों के लिए हेल्पलाइन 181 समेत अन्य महत्वपूर्ण नंबरों की जानकारी भी लोगों तक पहुंचाई जाएगी.

 

उन्होंने आम लोगों से अपील की कि वे इन हेल्पलाइन नंबरों पर कॉल कर उनकी कार्यप्रणाली को समझें और जरूरत पड़ने पर इसका लाभ उठाएं.

 

इस अभियान में लीगल एड डिफेंस काउंसिल सिस्टम की टीम, विभिन्न एनजीओ, पैनल अधिवक्ता और पैरा लीगल वॉलंटियर्स (PLV) शामिल हैं जो गांव-गांव और मोहल्लों में जाकर लोगों को जागरूक करेंगे.

 

कार्यक्रम के दौरान विद्यालयों और महाविद्यालयों में भी विभिन्न गतिविधियों का आयोजन किया जाएगा जिनमें वाद-विवाद, निबंध, पेंटिंग, भाषण प्रतियोगिता और प्रभात फेरी शामिल हैं.

 

इन गतिविधियों के माध्यम से छात्र-छात्राओं को बाल विवाह, साइबर ठगी, नशा, डायन प्रथा, बाल मजदूरी जैसे सामाजिक मुद्दों के प्रति जागरूक किया जाएगा.

 

इसके अलावा, महिलाओं, दिव्यांगजनों, अनुसूचित जाति-जनजाति, वृद्धजनों और समाज के अन्य कमजोर वर्गों को कानूनी सहायता प्रदान करने पर भी विशेष जोर दिया जाएगा.

 

यह 90 दिवसीय अभियान न केवल लोगों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करेगा बल्कि उन्हें न्याय तक आसान पहुंच दिलाने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण पहल साबित हो सकता है.

 

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