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कोलकाता कांड के विरोध में रिम्स के जूनियर डॉक्टरों ने किया कार्य बहिष्कार, ओपीडी-ओटी सेवा ठप

Ranchi : कोलकाता के आरजीकेएमसीएच हॉस्पिटल की जूनियर महिला डॉक्टर की दुष्कर्म के बाद हत्या के विरोध में रिम्स, रांची के जूनियर डॉक्टरों ने मंगलवार को कार्य बहिष्कार किया. इसके चलते अस्पताल की ओपीडी और रूटीन सर्जरी सेवा बंद रही. रिम्स में सुबह 9 बजे ओपीडी खुली, सीनियर डॉक्टर अपने केबिन में बैठे भी, तभी जूनियर डॉक्टरों ने वहां घूम-घूमकर ओपीडी बंद करा दी. आम दिनों में रिम्स की ओपीडी में प्रतिदिन 2 हजार से ज्यादा पर्ची कटती है. लेकिन मंगलवार को सुबह में मात्र 271 पर्ची कटी. वहीं, इमरजेंसी पर लोड बढ़ गया. सभी मरीज दिनभर परेशान रहे. ओपीडी सेवा बंद कराने के बाद सभी जूनियन डॉक्टर अधीक्षक कार्यालय के समक्ष ओनियन हॉल में जमा हुए और शाम तक वहीं डटे रहें. इधर, कलकत्ता हाईकोर्ट के निर्देश पर महिला डॉक्टर की हत्या का केस सीबीआई को ट्रांसफर कर दिया गया है. अब जेडीए आईएमए के साथ बैठक कर बुधवार को कार्य बहिष्कार पर निर्णय लेंगे.

रिम्स में भी महिला डॉक्टर सुरक्षित नहीं

जेडीए के बैनर तले चल रहे विरोध के दौरान रिम्स के जूनियर डॉक्टरों ने प्रबंधन से अपनी सुरक्षा की मांग की. जेडीए पूर्व अध्यक्ष डॉ. जयदीप ने कहा कि रिम्स में भी महिला डॉक्टर सुरक्षित नही हैं. देर रात ड्यूटी कर उन्हें अकेले हॉस्टल लौटना पड़ता है. रास्ते में कहीं भी लाइट की व्यवस्था नही है. सुरक्षाकर्मी भी नहीं रहते हैं. इस पर रिम्स निदेशक डॉ राजकुमार ने जल्द कैंपस में 1200 सीसीटीवी कैमरे और 2 पुलिस पोस्ट बनवाने का आश्वासन दिया. जूनियर डॉक्टरों के प्रदर्शन के क्रम में रिम्स के 300 से ज्यादा पीजी स्टूडेंट, इंटर्न के अलावा आईएमए के प्रतिनिधि, आईएमए विमेंस विंग की प्रेसिडेंट डॉ. भारती कश्यप, ट्राइबल मेडिकल एसोएिशन से डॉ. निशिथ एक्का, रिम्स के डॉ. विकास कुमार के साथ अन्य शामिल थे। वहीं, रिम्स जेडीए से प्रेसिडेंट डॉ. अंकित कुमार, वाइस प्रेसिडेंट डॉ. अभिषेक, डॉ. ओम कुमार, डॉ. अर्चना कुमारी, डॉ. कुमारी क्रीति समेत अन्य शामिल थे.

जेडीए की ये हैं मुख्य मांगें

ऐसी दुर्भाग्यपूर्ण घटना के लिए प्रावधानों और सुरक्षा की जवाबदेही  आरजीकेएमसीएच मेडिकल कॉलेज के अधिकारियों की है. चिकित्सा अधीक्षक और अन्य संबंधित अधिकारियों को तुरंत निलंबित किया जाए. डॉक्टरों के लिए सुरक्षित कार्यस्थल सुनिश्चित करने के लिए केंद्रीय सुरक्षा अधिनियम को लागू किया जाए. रात्रि पाली में काम करने वाले रेजिडेंट डॉक्टरों के लिए वार्ड और इमरजेंसी में अलग-अलग पुरुष/महिला डॉक्टरों के कमरे और शौचालय का प्रावधान होना चाहिए. पूरे कॉलेज और अस्पताल परिसर को कवर करने वाले पूरी तरह कार्यात्मक सीसीटीवी कैमरे होने चाहिए. पूरे परिसर और अस्पताल में 24 x 7 सक्षम गार्ड की व्यवस्था हो. कॉलेज परिसर में कार्यात्मक स्ट्रीट लैंप की व्यवस्था हो. डॉक्टरों के लिए 24 x7 अलग कैफेटेरिया की व्यवस्था हो. यह भी पढ़ें :  पीडीएस">https://lagatar.in/18-thousand-cardholders-did-not-get-sugar-due-to-pds-dealer-dso-said-will-take-action/">पीडीएस

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