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ये धर्मगुरु कहां से राजनीति में आ गये ? धर्मगुरुओं को मठ में रहना चाहिए, ये क्या बोल गये के चंद्रशेखर राव?

Hyderabad : ये धर्मगुरु कहां से राजनीति में आ गये ? धर्मगुरुओं को मठ में रहना चाहिए, पूजा पाठ और यज्ञ करना चाहिए. वे राजनीति में क्यों घुसपैठ कर रहे हैं. यह बयान तेलंगाना के सीएम के चंद्रशेखर राव का है. वे यूनिफॉर्म सिविल कोड के सवाल पर पत्रकारों से मुखातिब थे.                      ">https://lagatar.in/category/desh-videsh/">

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मोदी सरकार अपनी विफलताओं से ध्यान भटकाने के लिए यह सब कर रही है

जान लें कि यूनिफॉर्म सिविल कोड (समान नागरिक संहिता) बनाने को लेकर 22 वें राष्ट्रीय विधि आयोग ने आम जनता से विचार विमर्श की प्रक्रिया शुरू की है. इसे लेकर कांग्रेस सहित कुछ विपक्षी दल मोदी सरकार पर हमलावर है. आरोप लगाया कि मोदी सरकार अपनी विफलताओं से ध्यान भटकाने के लिए यह सब कर रही है. विधि आयोग द्वारा उठाया गया यह कदम यही दर्शाता है. समान नागरिक संहिता को लेकर तेलंगाना के सीएम के चंद्रशेखर राव (KCR) की प्रतिक्रिया इसी के लेकर आयी है.

केसीआर से  यूनिफॉर्म सिविल कोर्ड (UCC) को लेकर सवाल किया गया था

केसीआर से मीडियाकर्मियों ने यूनिफॉर्म सिविल कोर्ड (UCC) को लेकर सवाल किया था. पूछा गया कि समान नागरिक संहिता पर बात चल रही है. इसमें हर तबके से राय ली जायेगी. धर्मगुरूओं से भी राय ली जायेगी. इसी पर केसीआर ने कहा,`ये धर्मगुरू कहां से राजनीति में आ गये? धर्मगुरुओं को मठ में रहना चाहिए, पूजा पाठ करना चाहिए और यज्ञ करना चाहिए. राजनीति में घुसपैठ क्यों कर रहे हैं ? हंगामा कर रहे देश में.

विधि आयोग ने 2018 में  कहा था, कॉमन सिविल कोड की जरूरत देश को नहीं है

बता दें कि समान नागरिक संहिता को लेकर 22 वें राष्ट्रीय विधि आयोग अगले एक माह में जनता, सार्वजनिक संस्थान सहित धार्मिक संस्थानों व संगठनों के प्रतिनिधियों से विचार विमर्श की प्रक्रिया पूरी करने की बात की है. आयोग का कहना है कि जो लोग रुचि रखते हैं और इच्छुक हैं वे नोटिस की तारीख से 30 दिनों की अवधि के भीतर आयोग की बेबसाइट के माध्यम से या membersecretary-lci@gov.in पर ईमेल द्वारा भारत के विधि आयोग को अपने विचार प्रस्तुत कर सकते हैं. याद करें कि विधि आयोग ने 2016 में इस पर विचार विमर्श प्रक्रिया शुरू की थी. हालांकि मार्च 2018 में जनता के साथ विमर्श के बाद रिपोर्ट जारी करते हुए में कहा था कि फिलहाल कॉमन सिविल कोड की जरूरत देश को नहीं है. हालांकि उस समय फैमिली लॉ में सुधार की बात कही थी. [wpse_comments_template]

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