Ranchi: महालया के साथ बुधवार को पितृपक्ष का विसर्जन हो गया. साथ ही देवी पक्ष की शुरुआत हुई. अब आज नेम-निष्ठा से नवरात्र मंगल कलश की स्थापना हो रही है. श्रद्धालु नौ दिनों तक व्रत-उपवास कर मां जगदंबा की आराधना में रम जायेंगे. घरों और पूजा पंडालों में तो कलश स्थापना कर पूजा-अर्चना की ही जायेगी, साथ ही शहर के मंदिरों में भी नवरात्र उत्सव की धूम रहेगी. इसे लेकर सभी तैयारियां पूरी कर ली गयी हैं. देवी मंदिर और श्रीराम मंदिरों में इसके मद्देनजर खास साज-सज्जा की गयी है, जहां नौ दिनों तक नित्य देवी के विविध स्वरूपों की पूजा की जायेगी, कहीं दुर्गा सप्तशती तो कहीं नवाह्न पारायण पाठ की सुमधुर स्वरलहरियो से वातावरण सुबह से ही गुंजायमान रहेगा.
कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त
आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि का मान तीन अक्तूबर को पूरे दिन रहेगा. इस कारण संपूर्ण दिवस कलश स्थापना की जा सकती है, लेकिन आचार्य अजय मिश्रा के अनुसार अभिजित मुहूर्त दिन के 11:37 से 12:24 तक और विजय मुहूर्त दिन के 01: 55 से 2:45 तक करना अतिशुभकारी रहेगा. पूर्वजों को किया गया तर्पण
आश्विन कृष्ण पक्ष अमावस्या को शहर के स्वर्णरेखा घाट, बड़ा तालाब, हटनिया तालाब सहित विभिन्न जलाशयों, पिपल पेड़ के नीचे और देवालयों में पूर्वजों का श्राद्ध और तर्पण कर सनातनियों ने पितर देव से आशीष मांगा. मान्यता है कि इससे पितृगण प्रसन्न हो, पुत्र, धन और सौभाग्य का आशीर्वाद प्रदान करते हैं. शास्त्रों में मनुष्य के लिए तीन ऋण उल्लेखित है. देव ऋण, ऋषि ऋण और पितृ ऋण. इनमें से पितृ ऋण को श्राद्ध कर उतारना जरूरी माना जाता है, क्योंकि जिन माता-पिता ने हमारी आयु, आरोग्यता और सुख के लिए अनेक प्रयास किए थे. उनके ऋण से मुक्त न होने पर जन्म लेना निरर्थक है. इसी भाव को आत्मसात कर लोगों ने अपने पितरों का तर्पण और श्राद्ध किया. यहां रहेगी नवरात्र उत्सव की धूम
राधाकृष्ण मंदिर, कृष्णा नगर कॉलोनी में गुरुवार को सुबह कलश स्थापना के बाद श्रद्धालु दुर्गा सप्तशती पाठ करेंगे. अब यहां नवरात्र तक नित्य पूजा-पाठ और भजन कार्यक्रम का क्रमवार सिलसिला चलेगा. इसके अलावा यज्ञा बाबा आश्रम, मोरहाबादी, प्राचीन राम मंदिर, चुटिया, चिन्मय मिशन आश्रम, लेक रोड आदि में नवरात्र के मौके पर पूजा-अर्चना और पाठ आदि कार्यक्रमों का खास आयोजन किया जाएगा. [wpse_comments_template]
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