1972 में किया गया था उद्घाटन
इस फैक्ट्री का शिलान्यास वर्ष 1966 में संयुक्त बिहार में तत्कालीन मुख्यमंत्री कृष्ण बल्लभ सहाय ने किया था, जिसका उद्घाटन 6 फरवरी 1972 को तत्कालीन राज्यपाल देवकांत बरुआ ने किया था. भले ही फैक्ट्री बंद पड़ी हो, लेकिन पशुपालन विभाग की फाइलों में यह फैक्ट्री आज भी चल रही है. सरकार आज भी इस बंद पड़ी बेकन फैक्ट्री में डॉक्टर और कर्मचारियों को लाखों की सैलरी देती है. इसलिए अब इस फैक्ट्री को बेकन फैक्ट्री नहीं, बल्कि वेतन फैक्ट्री भी कहा जाने लगा है. इसे भी पढ़ें- जमशेदपुर">https://lagatar.in/jamshedpur-effect-news-thalassemia-included-in-chief-ministers-critical-illness-treatment-scheme/">जमशेदपुर: खबर का असर – मुख्यमंत्री गंभीर बीमारी उपचार योजना में शामिल हुआ थैलेसीमिया
चारा घोटाले की जद में आयी थी बेकन फैक्ट्री
सन 1996 में इस प्लांट में मामूली सी गड़बड़ी आई थी, जिसे ठीक कराने में सरकार को कुछ पैसे खर्च करनी थी. लेकिन फैक्ट्री चारा घोटाले की जद में आ गयी. तब से बेकार पड़ा हुआ है. बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव को पशुपालन घोटाला के मामले में यहां अस्थाई जेल बनाकर रखा गया.फैक्ट्री के नाम पर प्रबंधक,डॉक्टर समेत 17 लोग दे रहे अपनी सेवा
बेकन फैक्ट्री के मुख्य प्रबंधक डॉक्टर संतोष टोप्पो बताती हैं कि इस बेकन फैक्ट्री में प्रबंधक, डॉक्टर और कर्मचारी समेत 17 कर्मी अपनी सेवा दे रहे हैं. कई डॉक्टर और कर्मचारियों से विभाग दूसरे जगह में सेवा ले रहा है. वर्तमान में इस बेकन फैक्ट्री में एक चौकीदार और दो पिऊन फैक्ट्री के सामान की देखरेख करने के लिए प्रतिदिन कार्य करने पहुंचते हैं. शुरुआती दौर में जब यह फैक्ट्री खुली थी, तो इसमें डॉक्टर समेत 77 कर्मचारी नियुक्त हुए थे. बहुत सारे लोग रिटायर हो गए हैं या फिर उनका निधन हो चुका है. इसे भी पढ़ें- ट्विटर">https://lagatar.in/mp-nishikant-and-dc-bhajantri-clashed-again-on-twitter/">ट्विटरपर फिर भिड़े सांसद निशिकांत और डीसी भजंत्री [wpse_comments_template]

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