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कानपुर : आईटीबीपी के 40-50 सशस्त्र जवानों ने पुलिस आयुक्त कार्यालय घेरा, हंगामा मचा

Kanpur : कानपुर में 40-50 सशस्त्र आईटीबीपी के जवानों द्वारा शनिवार को पुलिस आयुक्त कार्यालय को घेरे जाने पर हंगामा मच गया. खबरों के अनुसार जवान अपने एक  कर्मी की शिकायत पर कोई कार्रवाई न होने से नाराज थे.

 

 

आईटीबीपी की वर्दी में हाथों में हथियार लिए खड़े कर्मियों को देखकर कमिश्नरेट के पुलिसकर्मियों के पसीने छूट गये. वेपीछे हट गये. परिसर में लगभग एक घंटे तक तनाव बना रहा, बाद में पुलिस आयुक्त, मुख्यमंत्री कार्यालय और अन्य अधिकारियों के बीच लंबी चर्चा के बाद मामला शांत हुआ. 

 

दरअसल मामला यह था किआईटीबीपी शिविर में तैनात कमांडो विकास सिंह की माता निर्मला देवी को सांस लेने में तकलीफ के अलावा उन्हें कब्ज और कमजोरी थी. इसका इलाज तातमिल चौराहा स्थित कृष्णा अस्पताल में चल रहा था.

 

आरोप है कि इलाज के दौरान चिकित्सकों द्वारा लापरवाही की गयी, जिसके कारण निर्मला देवी के हाथ में संक्रमण फैल गया. बात इतनी बिगड़ गयी कि बाद में उनका हाथ काटना पड़ा. 

 

इस घटना से गुस्सा कर विकास मंगलवार, 19 मई को अपनी मां का कटा हुआ हाथ लेकर पुलिस आयुक्त के पास पहुंचा और गुहार लगाई कि अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ कार्रवाई की जाये.आईटीबीपी कमांडो विकास की शिकायत पर पुलिस आयुक्त ने मामला मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ) को सौंप दिया.  

 

सीएमओ ने एक जांच समिति गठित की. जांच समिति ने इस संबंध में एक रिपोर्ट सीएमओ में प्रस्तुत की. सूत्रों के अनुसार इस रिपोर्ट से कोई स्पष्ट निष्कर्ष नहीं निकला. इस कारण कोई कार्रवाई नहीं हुई.

 

कोई कार्रवाई नहीं होने से नाराज होकरआईटीबीपी जवान विकास लगभग 50 अन्य जवान और अधिकारियों के साथ पुलिस आयुक्त कार्यालय पहुंचा. इतनी संख्या मे जवानों को देखकर वहां हड़कंप मच गया. वहां तैनात पुलिसकर्मी पीछे हट गये. आईटीबीपी के जवान अस्पताल पर कार्रवाई की मांग  कर रहे थे.

 

सीएमओ में इसकी खबर भेजी गयी.  स्थिति की गंभीरता को देखते हुए सीएमओ ने अस्पताल की ओर से लापरवाही हुई थी या नहीं, इसकी स्पष्टता करने के लिए दोबारा जांच करने का आदेश जारी किया गया.

 

बता दें कि विकास सिंह मूल रूप से फतेहपुर के खागा हाथगांव के निवासी हैं.  वे  विकास महाराजपुर स्थित 32वीं बटालियन में तैनात हैं. आईटीबीपी का कार्यालय भी यहीं है.

 

विकास ने जानकारी दी कि मां निर्मला देवी को सांस लेने में तकलीफ के अलावा उन्हें कब्ज और कमजोरी की शिकायत थी. अपनी मां को उन्होंने महाराजपुर स्थित आईटीबीपी अस्पताल में दिखाया. लेकिन 13 मई को उनकी मां की तबीयत अचानक बिगड़ गयी.

 

डॉक्टरों ने उन्हें आईटीबीपी के पैनल में शामिल अन्य उच्च स्तरीय अस्पताल में रेफर कर दिया. विकास के अनुसार वे अपनी मां को एम्बुलेंस में लेकर जा रहे थे. रास्ते में जाम लग गया. उनकी मां की हालत गंभीर होती जा रही थी  इससे घबरा कर विकास अपनी मां को तुरंत तातमिल स्थित कृष्णा अस्पताल ले गये.

 

वहां डॉक्टरों ने मां को ऑक्सीजन लगाया और उनके हाथ में कैनुला (विगो) डाला. विकास का आरोप है कि अस्पताल के डॉक्टरों ने उसकी मां को गलत इंजेक्शन लगा दिया. इस कारण उनका हाथ काला पड़ गया. सूजन  बढ़ गयी.

 

इसके बाद विकास ने मां को 14 मई को बिठूर रोड, बकुंथापुर स्थित पारस अस्पताल में भर्ती कराया .17 मई को डॉक्टरों को पता चला कि संक्रमण हाथ में फैल चुका है. इस वजह से डॉक्टरों को उनका हाथ काटना पड़ा. 
 

 
20 मई को विकास अपनी मां का कटा हुआ हाथ लेकर इंसाफ के लिए पुलिस आयुक्त कार्यालय पहुंचे थे. पुलिस आयुक्त ने प्रकरण में सीएमओ से जांच रिपोर्ट मांगी थी.. पुलिस आयुक्त का कहना था कि जांच रिपोर्ट में कुछ भी स्पष्ट नहीं है,  रिपोर्ट में संभावना व्यक्त की गयी थी कि हाथ का इंन्फेक्शन धर्मा एम्बोलिज्म की वजह से हो सकता है.

 

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