- रांची विवि के जनजातीय भाषा विभाग के करम महोत्सव में थिरके राज्यपाल
प्रकृति प्रेम से ही पर्यावरण बचेगा
राज्यपाल ने कहा कि अपने देश के पर्यावरण को बचायें. पर्यावरण में हो रही समस्या को बचाने की जरूरत है. करम पर्व में धर्म और प्रकृति में आस्था व्यक्त की जाती है. आज पूरा विश्व पर्यावरण समस्या से ग्रसित है. प्रकृति आदिवासी समाज के हृदय में है. करम पर्व में सकारात्मक विचारों में उर्जा मिलती है. यह आदिवासी समुदाय की जीवन शैली में निहित है. करम पूजा में करम डाल को आंगन में लगाकर श्रद्धा भक्ति के साथ पूजा अर्चना करना, सामूहिक नृत्य- संगीत करम त्योहार में विशेष स्थान रखता है. भारतीय परंपरा में हम पेड़- पौधे, जीव- जंतु, सांप- बिच्छू का मान- सम्मान करते हैं. करम पूजा एक ऐसा त्योहार है, जो आदिवासी समुदाय को एक साथ लाता है. पारंपरिक गतिविधियों में भाग लेने के प्रेरित होते हैं. लोग संगीत प्रदर्शन, उत्सव के द्वारा क्षेत्रीयता की सांस्कृतिक विरासत को प्रदर्शित करते हैं. इस मौके पर विभागाध्यक्ष हरि उरांव, सांसद संजय सेठ, रांची विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ अजीत कुमार सिन्हा, श्यामा प्रसाद मुखर्जी के कुलपति डॉ तपन कुमार शांडिल्य, ओपेन यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर डॉ पीएन साहु, रजिस्ट्रार एमसी मेहता, उमेश लाल तिवारी, प्रो मनय मुंडा, प्रो बिरेंद्र सिंह मुंडा समेत विभाग के प्रोफेसर उपस्थित थे.नौ क्षेत्रीय भाषा में नृत्य-संगीत प्रस्तुत
कार्यक्रम में नौ क्षेत्रीय भाषाओं में पारंपरिक वेशभूषा, वाद्ययंत्र के साथ अलग- अलग नाच-गान हुआ. छात्र- छात्राओं ने अपने पारंपरिक वेशभूषा में पारंपरिक वाद्य यंत्र, ढोल- नगाड़ा, मांदर और बांसुरी के मधुर स्वर से सभी को झुमाया. इसे भी पढ़ें – रांची">https://lagatar.in/ranchi-accused-of-fraud-of-rs-4-crore-81-lakh-arrested-from-rajasthan/">रांची: 4 करोड़ 81 लाख की ठगी का आरोपी राजस्थान से गिरफ्तार [wpse_comments_template]
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