Ranchi : आदिवासी समाज की आस्था, संस्कृति और प्रकृति का पर्व करम उत्सव पूरे हर्षोल्लास से कॉलेजो में मनाया जा रहा है. शनिवार को श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय में एक दिवसीय करम पूर्व संध्या का आयोजन किया गया था. यह आयोजन आदिवासी छात्र संघ के बैनर तले आयोजित किया गया. जगलाल पाहन ने करम पेड़ का विधि विधान से पूजा कराई और करम देव की कहानी सुनाई.
पांच भाषाओ में एक मंच
इस अवसर पर श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय में पांच जनजातिय भाषा मुंडारी, कुडुख, संथाली, हो और खड़िया भाषा में एक और सामूहिक नृत्य प्रस्तुत की गई. जहां छात्रों ने आदिवासी संस्कृति, परिधानों, गीत-संगीत और नृत्य प्रस्तुत की. करम पूर्व संध्या पर महिला-पुरूष आदिवासी परिधान पहनकर अखड़ा में शामिल हुए. अखड़ा में आदिवासी छात्रावास, श्यामा प्रसाद मुखर्जी, रांची विश्वविद्यालय के जनजातीय भाषा विभागों के विद्यार्थी उपस्थित थे.
नगाड़ा की धुन और मांदर की थाप से छलके पाव
श्यामा प्रसाद मुख्रर्जी विश्वविद्यालय के विद्यार्थियो ने करम नृत्य प्रस्तुत किया. वहीं, आदिवासी छात्रावास की छात्राओं ने एक गीत में जावा उठाने से लेकर करम देव की विसर्जन तक की गीत और नृत्य से प्रस्तुत किए. खोड़हा मंडली में छात्र मांदर और नगाड़ा बजा रहे थे.
वहीं छात्राओं ने ताल से ताल और राग मिलाकर गीत और नृत्य प्रस्तुत किए. करम राग की धुन पर छात्र-छात्राएं हर ताल से ताल मिलाकर नाच रहे थे. इसके साथ ही दर्शक भी अखड़ा साथियों का ताली बजाकर उत्साह बढ़ा रहे थे.
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