डॉ मुखर्जी प्रखर राष्ट्रवादी नेता थे- बाबूलाल
बीजेपी विधायक दल के नेता बाबूलाल मरांडी ने कहा कि डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी प्रखर राष्ट्रवादी, एवं सिद्धांतवादी नेता थे. 33 साल की छोटी सी उम्र में वे कलकत्ता विश्वविद्यालय के कुलपति बन गये थे. तत्कालीन भारत सरकार की गलत नीतियों के खिलाफ मंत्रिमंडल से त्यागपत्र देकर वे संसद में विरोधी पक्ष की भूमिका निभाने लगे और कश्मीर का भारत में विलय के लिए प्रयत्न प्रारंभ कर दिया.डॉ मुखर्जी ने देश की अखंडता के लिए अपना श्रेष्ठ बलिदान दिया- धर्मपाल
प्रदेश संगठन महामंत्री धर्मपाल सिंह ने कहा कि देश की एकता एवं डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने देश अखंडता के लिए अपना श्रेष्ठ बलिदान दिया. उनकी प्रेरणा से ही आज भारतीय जनता पार्टी के करोड़ों कार्यकर्ता राष्ट्रवाद का अलख जगाते हुए अखंड भारत के सपने संजोने में निरंतर अपनी भूमिका निभा रहे हैं.कार्यक्रम में ये थे मौजूद
कार्यक्रम में प्रदेश महामंत्री सह सांसद आदित्य साहु, डॉ प्रदीप वर्मा, बालमुकुंद सहाय, वरिष्ठ नेता राकेश प्रसाद, हेमंत दास, सूरज चौरसिया, अविनेश सिंह, पंकज सिन्हा, आरती कुजूर,अशोक बड़ाईक, रंजीत चंद्रवंशी, संजय जयसवाल,लक्ष्मी कुमारी, सीमा सिंह, सुनील साहु और सोनी हेम्ब्रम मौजूद थे. इसे भी पढ़ें- आदिवासी">https://lagatar.in/people-who-have-converted-to-80-percent-religion-are-taking-advantage-of-tribal-reservation-ganesh-ram-bhagat/">आदिवासीआरक्षण का लाभ 80 फीसदी धर्म परिवर्तन कर चुके लोग उठा रहे हैं : गणेश राम भगत [wpse_comments_template]

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